
बालोतरा नाकोड़ा जैन तीर्थ । निर्दोष को दुख देना यातना देना सताना उसे दुखी देखकर हर्षित होना उसे बड़ा और कोई पाप नहीं उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने श्री नाकोड़ा जैन तीर्थ में संबोधित करते कहा कि ऐसा व्यक्ति शैतान है विश्व के किसी धर्म में उसका प्रवेश नहीं है । उन्होंने कहा कि संवेदनहीन आदमी सभी तीर्थों की यात्रा कर ले कठोरतम साधना कर ले उसका धर्म करना वह मुर्दे को शृंगार कराने के समान है ।
मुनि कमलेश ने कहा कि धर्म को किसी पंथ परंपरा में कैद नहीं किया जा सकता मानवीय गुणों का विकास करें वही सच्चा धर्म है । राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि किसी को दुख से मुक्त करने के लिए अपने सुख को न्योछावर कर देता है निस्वार्थ भाव से वह धरती पर चलता फिरता देवता है ।जैन संत ने कहा कि गरीब अमीर छोटे-बड़े अपने पराए को देखकर सहयोग के लिए आगे आता है वह स्वार्थ मय है उसे सच्ची संवेदना नहीं कहा जा सकता प्राणी मात्र के प्रति समान भाव से संवेदना ही धर्म का द्वार है । तीर्थ अध्यक्ष रमेश कुमार जी मुथा उपाध्यक्ष गणपत चोपड़ा ट्रस्टी छगन जी बोहरा चंद्र प्रकाश मेहता चेतन कोठारी आदि ने राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश एवं विरल रत्न विजय जी का आदर की चादर समर्पित करके अभिनंदन किया 10 जनवरी को मुनि कमलेश नाकोड़ा तीर्थ से जसोल गढ़ सिवाना समदड़ी बिहार करते हुए पश्चिम भारतीय प्रवर्तक गुरुदेव रमेश मुनि जी की जन्म भूमि मजल पधारने की संभावना है । घनश्याम मुनि, अरिहंत मुनि, गौतम मुनि, कौशल मुनि, अक्षत मुनि आदि ठाणा ने मुनि कमलेश के अभिनंदन पर आभार व्यक्त किया ।