

रतलाम। मित्रता मित्र की हैसियत से नहीं होती उसके गुण दोष के आधार पर होती है। मित्र धर्म हमेशा मित्र के लिए समर्पित होना सिखाता है और संकट आने पर मित्र की रक्षा करने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने की भावना ही मित्र धर्म का सर्वोच्च लक्षण है । मित्र चाहे गलत हो तो भी उसका साथ मुसीबत में अवश्य देना चाहिए और यदि मित्र श्रेष्ठ गुण से सज्जित हो तब तो और भी उसकी हर गतिविधि में सहयोग करना अपना प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए प्रमुख धर्म होना चाहिए। महान योद्धा कर्ण यह जानते भी की अपना मित्र दुर्योधन गलत है फिर भी पूरे महाभारत के युद्ध में उसके साथ खड़ा रहे। वहीं दूसरी तरफ भगवान कृष्ण ने अपने परम मित्र बालसखा सुदामा को आदर्श मित्र बनाकर उसकी दरिद्रता को हमेशा के लिए दूर कर दिया। श्रीमद् भागवत कथा मैं वर्णित महाभारत काल की अनेक कथाएं जीवन के आदर्शों को स्थापित करती है।
संकट काल में स्त्री की परीक्षा भी बड़ी महत्वपूर्ण होती है। अपने पति और परिजन के लिए हमेशा स्त्री को अपना श्रेष्ठ चरित्र निर्वाह करना चाहिए। पति पुत्र और सभी को धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना चाहिए।विपरीत परिस्थितियों अनुकूल बनाने में स्त्री की योग्यता का परीक्षण होता है. कुंती ने पांडवों को जिस प्रकार अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध धर्म युद्ध करने के लिए प्रेरित किया है वह मानव जाति के लिए हमेशा याद रहेगा। उपरोक्त उद्गार मंगल मूर्ति रेजिडेंसी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन उपस्थित धर्मालुजनों को संबोधित करते हुए प्रसिद्ध भागवत आचार्य पंडित योगेश्वर शास्त्री जी ने व्यक्त किये।
आपने कहा कि युद्ध तो पांडवों और कौरवों के बीच में अधिकार और राज्य सिंहासन के लिए हुआ था। लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने इस युद्ध को भी धर्म युद्ध में परिवर्तित कर सनातन शाश्वत मूल्यों को प्रतिपादित किया।इस युद्ध के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण ने मानव जाति को अन्याय अत्याचार की विरुद्ध लड़ना सिखाया।धर्म के लिए अधर्मी और दुराचारी शक्तियों का विनाश करने में किसी भी प्रकार का संकोच नहीं करना चाहिए।समझाने और समझोते के बाद भी यदि परिस्थितियों नहीं सुधरे तो अंतिम विकल्प युद्ध ही होता है। अर्जुन ने जब शस्त्र उठाने के लिए श्री कृष्ण को मना कर दिया तब भगवान ने कहा कि धनुर्धर अर्जुन रणभूमि वीरों के कर्तव्यों से जानी जाती है रिश्तो के बंधन से नहीं। इसलिए युद्ध करो और धर्म की रक्षा करो तभी पृथ्वी पर सौहार्द सद्भावना और प्रेम की स्थापना होगी। आपने श्री कृष्ण-सुदामा मिलन और करण दुर्योधन मित्रता को पात्रों से अभिनय करवा कर दर्शाया पंडित शास्त्री जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा कलयुग में मानव जीवन के उद्धार के लिए सर्वोत्तम कथा मानी गई है कथा का श्रवण मात्र हमारे पापों को नष्ट कर देता है हमारे कुविचारों को नष्ट कर देता है।
आरंभ में पोथी पूजन पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, पूर्व रतलाम केसरी गौरव पहलवान, रंग गर्मी चिंतक कैलाश व्यास, लायंस क्लब रतलाम क्लासिक के अध्यक्ष एमके जैन, निमिष व्यास, एडवोकेट सुनील जैन, गोपाल जोशी, श्याम सुंदर भाटी, राधेश्याम तोगड़े, दशरथ जोशी, रमेश परमार, मिथिलेश मिश्रा, भगवती लाल सालवी, दिलीप वर्मा, अरविंद मिश्रा, जगदीश सोनी, महेंद्र लोट, मधुसूदन जोशी, विजय व्यास नागदा, प्रद्युम्न पांडे, अखिलेश राजावत, महेश व्यास, राजेश जोशी, कमलेश पालीवाल आदि ने करते हुए शास्त्री जी का सम्मान किया।
इस अवसर पर मुख्य जजमान श्री कैलाश शर्मा, महेश शर्मा, दिनेश शर्मा, सुनील शर्मा, निखिलेश शर्मा, मनीष शर्मा, प्रियेश शर्मा, संदीप शर्मा, गौरव शर्मा, दिव्यांश शर्मा, बालकृष्ण राजावत, हरि बल्लभ शर्मा, विनोद शर्मा, राजेंद्र व्यास, तुषार व्यास, लखन व्यास, महेंद्र व्यास, प्रशांत शर्मा, प्रगति शर्मा, प्रियंका शर्मा, विवेक जोशी, प्रमुखता जोशी, दीपक व्यास, रुचिका व्यास, समिता शर्मा, गार्गी शर्मा आदि ने व्यासपीठ तथा समस्त विद्वान पंडितों का सम्मान किया । कार्यक्रम का संचालन दिलीप वर्मा तथा आभार प्रियेश शर्मा ने व्यक्त किया।