विश्व शांति, अहिंसा, शाकाहार, पर्यावरण, भारतीय संस्कृति के प्रणेता थे अर्हत ध्यान योगी आचार्य सुशील कुमार जी म. सा.

रतलाम । पूरे विश्व मे अहिंसा, पर्यावरण, विश्व शांति, योग, सर्वधर्म समभाव, का संदेश देने वाले आचार्य सुशील कुमार जी म सा का 100 वा जन्म दिवस शताब्दी महोत्सव के रूप मे पूरे वर्ष 15 जून 2025 से 15 जून 2026 तक मनाया जायेगा । उक्त जानकारी देते हुए वरिष्ठ पत्रकार मोतीलाल बाफना ने बताया की पूज्य गुरुदेव की सुशिष्या साध्वी दीप्ती जी ओर साध्वी लक्षिता जी के सानिध्य व विश्व अहिंसा संघ ट्रस्ट नई दिल्ली के तत्वधान मे 15 जून रविवार को डॉ अम्बेटकर इंटरनेशनल सेंटर, 15 जनपथ नई दिल्ली मे मनाया जायेगा ।
ट्रस्ट के कार्याध्यक्ष गौतम ओसवाल ने बताया की कार्यक्रम मे पूज्य संत कृष्ण शाह विद्यार्थी महाराज राष्ट्रीय वाल्मीकि मंदिर के आर्शीवचन से शुभारम्भ होगा । कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि रामनाथ कोविंद पूर्व राष्ट्रपति, दतात्रेय होसबोले सर कार्यवाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रहेगेव। अति विशिष्ट अतिथि आलोक कुमार अध्यक्ष विश्व हिन्दु परिषद, किशोर मकवाना चेयरमेन राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग होंगे ओर विशिष्ट अतिथि गोपाल आर्या, कपिल खन्ना, सुश्री नलिनी अस्थाना, सुश्री कमलिनी अस्थाना, सुश्री शिप्रा पाठक, राजेंद्र वरवाते, सुरेश मल्होत्रा, सत्य भूषण जैन होंगे ।
श्री बाफना ने बताया की आचार्य सुशील कुमार जी म सा का जन्म गांव शिकोहपुर गुड़गांव हरियाणा के ब्राह्मण परिवार मे हुआ था, बचपन मे आपका नाम सरदार सिंह था । जैन धर्म के सिद्धांतो से प्रेरित होकर दादा गुरुदेव श्री रूपचंद जी म सा जंगरावा वाले ओर पूज्य श्री छोटेलाल जी म सा से आपने दीक्षा लेकर पूरे विश्व मे अनेक स्थलों पर सर्वधर्म सम्मेलन का आयोजन कर अहिंसा, पर्यावरण, विश्व शांति, योग का प्रचार प्रसार किया । विश्व के प्रमुख धर्म गुरु, धर्मचार्यो, राष्ट्रीय राजनेता , प्रबुद्ध हस्तियों के साथ आचार्य श्री ने गौरक्षा आंदोलन, पशु बली को बंद करवाते बुचड़खाने बंद करवाने का आव्हान किया जिसका पूरे देश मे समर्थन मिला । आचार्य श्री ने अविचल भाव से अर्हत योग ध्यान की साधना करते जो अमृत पाया उस बल पर आपने विश्व कल्याण हेतु मुक्त भाव से वितरित किया । आचार्य श्री ने पूरे विश्व का भ्रमण करते कई राष्ट नेताओं, भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति , तत्कालीन प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रीगणो, सर्व धर्म गुरुओ से खुले दिल ओर दिमाग़ से विचार विमर्श कर भारत को विश्व गुरु बनने की दिशा मे मार्गदर्शन दिया ।