
समदड़ी मजल । संस्कृति की उपेक्षा करना अनदेखा करना साक्षात महापुरुषों को स्वयं के पांव तले कुचलने के समान पाप कमाना है । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने राम जन्मभूमि समारोह को संबोधित करते कहा कि संस्कृति से ही संस्कारों का बीजारोपण होता है और चरित्र का निर्माण होता है । उन्होंने कहा कि विश्व के सभी महापुरुषों का निर्माण भारतीय संस्कृति से हुआ है जगतगुरु बनने का सौभाग्य मिला है उसकी रक्षा करना हमारा प्रथम कर्तव्य है । राष्ट्रसंत ने कहा कि दुर्भाग्य पाश्चात्य दुनिया भारतीय संस्कृति को अपना कर गौरवान्वित महसूस हो रही है और हम उनके थूके हुए को चाट रहे । मुनि कमलेश ने बताया कि भारतीय संस्कृति विश्व में सबसे प्राचीन संस्कृति है जिसका उद्भव ऋषि मुनियों के आध्यात्मिक ज्ञान के सहारे हुआ है विज्ञान भी जिसका लोहा मान रहा है । जैन संत ने कहा कि भारतीय जीवनशैली ही स्वास्थ्य पर्यावरण आर्थिक ता और विश्व को विनाश से बचाने की क्षमता रखता है राम जन्मभूमि के निर्माण के लिए जैन समाज पूरे देश में करोड़ों का दान दे रहा है मंदिर नही संस्कृति का प्रतीक है पूरे विश्व को सन्मार्ग प्रदान करेगा संपूर्ण संत समाज की ओर से राष्ट्रसंत का स्वागत किया गया विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम मैं भारी संख्या में जनता ने भाग लिया ।