जीवन को उन्नति के शिखर पर पहुंचाने के लिए परमात्मा ने कई सुत्र दिये : डॉ संयमलता म.सा.

रतलाम 30 जुलाई । क्रोध प्रिती का नाश करता है। जो क्रोध करता है उसे नाग की उपमा दी गई हैं। जीवन को उन्नति के शिखर पर पहुंचाने के लिए परमात्मा ने कई सुत्र दिये है। क्रोध नही करोगे तो कर्मों  के बंध तो टूटेंगे  ही साथ ही साथ समाज में घर में सम्मान प्राप्त करोगे। घर में टीवी सेट है सोफासेट है, डायमंड सेट है टीसेट  भी है लेकिन फिर भी  हमारी लाईफ अपसेट है। उक्त विचार जैन स्थानक पर धर्मसभा मे महासती डॉ संयमलता म सा ने व्यक्त किये ।
आपने फरमाया की आपके सामने मिठाई रखी है क्या उसे देखने से मिठाई का स्वाद आ जाएगा नही आएगा,  उसी प्रकार धर्म को सुनने से नही ग्रहण करने की जरूरत है, हाथ में पानी का लोटा है वजन लगेगा, वही पानी अगर पी लोगे तो वजन नही लगेगा। शाल कन्धे पर या हाथ में है तो वजन लगेगा लेकिन वही शाल ओड़ लोगो तो वजन नही लगेगा। मतलब ऊपर ऊपर से धर्म नही होगा, धर्म को हमारे भीतर उतारना पड़ेगा।
धर्मसभा की सम्बोधित करते हुए साध्वी सौरभप्रज्ञा जी म.सा. ने कहा की कषाय कर्म बंध का मूल कारण है, कषाय से जन्म मरण भव की वृद्धि होती है। क्रोध के आवेश में आकर मनुष्य समस्त रिश्तो को तोड़ देता है। क्रोध को चांडाल की और काल की उपमा दी गई है । हमारे हृदय मे जलती हुई भयंकर अग्नि क्रोध है। क्रोध चार प्रकार का होता है। पहला है अनन्तानुबन्धी क्रोध  जो की पर्वत मे पड़ी दरार के समान होता है यह दरार कभी भी नहीं भर सकती है। व्यक्ति मरते दम तक और मरने के बाद भी क्रोध नही छोड़ता है। ऐसे व्यक्ति की गति नरक गति होगी। दुसरा अप्रत्याख्यानी क्रोध यह सूखे तालाब की मिट्टी में पड़ी दरार के समान होता है।  सुखे तालाब मे कुछ समय बाद बारिश के पानी से वह दरार भर जाती है। इस क्रोध की अवधि 12 महीने की होती है। ऐसे व्यक्ति तिर्यंच गति में जाते है। तीसरे प्रकार का क्रोध है प्रत्याख्यानी क्रोध : जमीन की मिट्टी मे पड़ी हुई दरार के समान होती है केवल 2/3 बार प्रेम से समझाने से व्यक्ति अपना क्रोध छोड़ देता है, ऐसे क्रोध की अवधि 04 महीने की होती है चौमासी प्रतिक्रमण तक की ऐसे व्यक्ति मनुष्य भव में जाते है । चौथे प्रकार का क्रोध है संज्वलन क्रोध, यह पानी में पड़ी दरार के समान होता है, जो दरार तुरंत भर जाती है,  यह सबसे हल्का क्रोध होता है, क्षणिक होता है इसमें व्यक्ति तुरन्त माफी मांग लेता है या माफी दे देता है।  इस क्रोध की अधिकतम अवधि 15 दिन की बताई गई है, पक्खी प्रतिक्रमण तक की।  
क्रोध करने के 04 कारण होते है । जिसमें पहला है इच्छा, कामना या अपेक्षा की पूर्ति नहीं होना। क्रोध का दूसरा कारण है कि हमें क्रोध हमेशा हमेशा दुसरे की गलतियों पर आता है। क्रोध का तीसरा कारण है कि क्रोध हमेशा कमजोर व्यक्ति के ऊपर आता है।  क्रोध में कभी अन्न का अपमान मत करना, गुस्से में भूख नहीं लगती, नींद नहीं आती है। एक बार गुस्सा करने से 1000 ज्ञान कोशिकाएं नष्ट हो जाती है । अगर आपको अपनी मेमोरी को मजबूत करना है तो क्रोध करना छोड़ दो।