श्री जैन दिवाकरीय महासती जी पूज्य श्री धैर्य प्रभा जी म. सा.आदि ठाणा -5 पोरवाल पैलेस दिवाकर दरबार चातुर्मास 2025
इंदौर 30 जुलाई । पोरवाल पैलेस का यह चातुर्मास धीरे-धीरे लेकिन मजबूती से आगे बढ़ रहा है! तपस्वियों के मजबूत आत्मबल और पूज्य महासती जी के सद्पुरुषार्थ ने इस चातुर्मास को दिव्यता प्रदान की है। तप साधना के सर्वोच्च शिखर(मास खमण्) को छूने का हौसला रखने वाले भाई-बहनों का..मानो मौसम भी अपनी अनुकूलता से अभिनंदन कर रहा है।
आज की धर्म सभा मे पूज्य श्री धीर प्रभा जी म.सा.को सुनने का भी अवसर मिला । आलस विषय पर एक दृष्टांत देते हुए आपने फरमाया की आलस यह इंसान का शत्रु है। आप अपनी चेतना से भगवान महावीर भी बन सकते हो..तो अपने आलस से कुंभकरण भी बन सकते हो। जो सोएगा वो खोयेगा। इसलिए जीवन में कभी प्रमाद न करे! गुरु चरण में मेरा नमन है..इन्हीं के हवाले -2 ।
इस भक्ति गीत से पूज्य धेर्य प्रभा जी म. सा. ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए एक दृष्टांत के माध्यम से समझाने का प्रयत्न किया की दुश्मन को बाहर से बुलाने की जरूरत नहीं है वह तो घर में ही मौजूद है अर्थात अपने आंतरिक शत्रुओं से निपटने की तैयारी रखो । उसके बाद कल अपनी अपनी 5 गलतियां बताने का जो होमवर्क धर्म सभा को दिया था..पूछते हुए कहा कि आप अपनी पांच गलतियां बताएं और धर्म सभा में बैठे रूचिवान युवा श्रावक श्री हिमांशु जी मालवामिल ने अपनी पांच कमियों को सभा के सामने रखा जिसको सभी ने ध्यानपूर्वक सुना। कल के ट्रीटमेंट विषय पर पूज्य श्री धेर्य प्रभा जी म. सा.ने आज फरमाया कि आप लोग अपने जज खुद ही बन बैठे हो अपने आप को सही और गलत सिद्ध करने का फैसला खुद ही कर लेते हो! आपकी इन्वेस्टिगेशन चल रही है ! मुझे आपकी गलतियो की जड़ तक जाना है !
आज मैं आपको आपकी अगली कमजोरी बताती हूं उस कमजोरी का नाम है-
(2) माइंड आइसलेस अर्थात दिमाग की ठंडक खत्म हो जाना
आप कई बरसों से संत महात्माओं को सुन रहे है क्या बदला आपका!
आपके दिमाग की ठंडक खत्म हो गई है! आप जहां के जहां खड़े हो अरे अपने मन की तो आपने बहुत मान ली अब भगवान महावीर की मान लो! पहले आपको गुस्सा आता है और फिर जुबान से आग निकलती है! चंडकौशिक का उदाहरण दिया जिसको क्रोध की वजह से दो बार मनुष्य योनि मिली फिर भी अपने कर्मों का फल भोगना पड़ा ! जो आसान है वह सही नहीं होता है और जो सही है वह आसान नहीं होता ! गुस्सा करना सरल है या गुस्सा रोकना बोलो ना मेरे ज्ञानी भाईयो..अरे आपके क्रोध का तो क्या ही कहना! जाम में बार-बार हार्न बजाओगे तो क्या रास्ता मिल जाएगा ! कितना क्रोध लेकर बैठे हो घर में भी आपके अपने भी आपसे डरते है! गुरुदेव कहते हैं कि यदि 48 मिनट से ज्यादा क्रोध आ जाए तो आपका अनंत कर्मों का पाप बंध होता है! दिमाग गरम हो जाए तो अपने पराये का भी भेद मिट जाता है ! एक बहुत ही हृदय स्पर्शी दृष्टांत सुनाया जिसमें नई कार पर स्क्रैच कर देने के कारण एक पिता ने अपने छोटे से मासूम बच्चे की उंगलियों को हथौड़ी से तोड़ दिया !
इस कथानक से शिक्षा दी की क्रोध में हम कितना नुकसान कर बैठते है! जब भी आपको गुस्सा आए तो एक सूत्र याद रखना की क्रोध को उसी समय नही 5 मिनट बाद करना है! प्लीज स्टॉप योर एंग्री माइंड!
(3) आईज शेम लेस( आंखों की शर्म का खत्म होना)
इस दुनिया में जितने भी पाप होते हैं उसका प्रवेश द्वार है आंखें! धर्म का प्रवेश द्वार है कान ! अपनी आंखों को इतना भी बिकाऊ मत बनाओ! आंखों को नजर हो तो ऐसी कि जैसे गुरु की नजर जिस पड़ जाए जीवन बदल जाता है!
अरे इंदौर वालों.. बिल्डिंग से गिरोगे तो फिर भी बच सकते हो लेकिन नजरों से गिर गए तो नहीं बच पाओगे! आज 99% लोग अपनी नजरों का गलत उपयोग कर रहे है! अपनी नजरों से अच्छा चुनो बुरा नहीं! जब तक आंखों में विकार नहीं आता है तो मन में भी पाप नहीं आएगा! कुदरत का अनमोल वरदान है आंखें इनका उपयोग कर लो । अरे आंखों की कीमत जानना है तो अंधे से पूछो!