गुरु मिश्री- प्रताप पुण्यतिथि एवं जन्मोत्सव भव्य रुप से मना
रतलाम । नीमचौक श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी डॉ श्री संयमलताजी म. सा.,डॉ श्री अमितप्रज्ञाजी म. सा.,डॉ श्री कमलप्रज्ञाजी म. सा.,श्री सौरभप्रज्ञाजी म. सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में मरुधर केसरी श्री मिश्रीमल जी म. सा एवं मेवाड़ भूषण श्री प्रतापमल जी म. सा. की पुण्यतिथि के निमित्त गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया धर्म सभा को संबोधित करते हुए साध्वी संयमलता ने मरुधर केसरी श्री मिश्रीमल जी म. सा. के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा की दया अहिंसा और परमार्थ के कार्य से देश और समाज की दशा सुधारी थी। वे एक वटवृक्ष थे जिसकी छाया तले लाखों दुखी प्राणियों को शांति मिलती थी। वह एक सुंदर गुलाब थे जिसकी विद्यमानता ही गुलशन को महका देती थी। श्री प्रतापमल जी की जीवनी पर बखान करते हुए कहा कि वे आत्मबल और मनोबल के धनी थे। जो भी उनके चरणों में आता अपने दुख, कलेश व परेशानियां उनकी झोली में डाल देता और बदले में सुख शांति और प्रसन्नता लेकर लौटता। आप एक ऐसे कुशल व्यक्ति थे जो भंवर में फंसी किश्ती को बड़ी आसानी से बाहर ले आते थे। आपकी एक नजर लोगों को निहाल और मालामाल बना देती थी। आपकी साधना में विकारों का बहिष्कार था, विचारों का परिष्कार था, एवं आत्मा का साक्षात्कार था।
महासती कमलप्रज्ञा ने कहा भाग्य और पुरुषार्थ जीवन के वह दो पहलू है जिससे हर व्यक्ति का जीवन बंधा हुआ है। हर आदमी को अपने जीवन में वही मिलता है जो उसके भाग्य में लिखा है, परंतु मिलता पुरुषार्थ से हैं। आदमी वही पाएगा जो उसके नसीब में है, पर मेहनत से। भाग्य के भरोसे रहकर और पुरुषार्थ छोड़कर निठल्ले बैठने से कुछ हासिल नहीं होता।
इस अवसर पर पार्श्व पद्मावति के एकासन का आयोजन किया गया, जिसमे 500 से ज्यादा एकासन तप धारी श्रावक श्राविका थे । जिसके लाभार्थी श्रीमती प्रभादेवी पन्नालाल आशीष कटारिया परिवार रहा ।