जो ताजगी गार्डन के फूलो मे है वो किसी ओर फूलो मे नहीं : डॉ संयमलता म.सा.

सुख की घड़ी मे भी ईश्वर को याद करना चाहिए ताकि कभी दुख ना आये : डॉ कमलप्रज्ञा म.सा.

रतलाम । जो ताजगी गार्डन के फूल मे है, वह गमले के फूल मे नही है ओर जो महक गमले के फूल मे है वैसी प्लास्टिक के फूल में नही। कुछ व्यक्ति गार्डन के फूल की तरह होते है खुद भी खाते है और को भी खिलाते है, सबका ख्याल रखते है, कुछ व्यक्ति गमले के फूल समान होते है जो खुद खाते है ज्यादा से ज्यादा अपने परिवार का ध्यान रखते है, बाकी किसी के बारे में नही सोचते है। और कुछ व्यक्ति कागज के फूल के समान होते है जो न तो खुद खाते है न दुसरो को खिलाते है । उक्त विचार नीमचौक जैन स्थानक पर आयोजित धर्मसभा मे महासाध्वी डॉ संयमलता म सा ने व्यक्त किये ।आपने कहा की दातारों का मजा यही है खाने और खिलाने में, कंजूसों का मजा यही है धन जोड़ जोड़ मर जाने में । हमारा मोह संसार में है। मोहनीय कर्म की स्थिती में 70 क्रोडा क्रोडी सागरोपम भोगना पडेगा। बडे बडे घरों मे कुत्ते बड़ी बड़ी गाडी में घूमते है है एसी घर मे रहते है मालिक उन्हें खुद नहलाता है, भले ही माता पिता की सेवा न करता हो, परिग्रह रखोगे तो सुख सुविधाएं मिलेगी लेकिन ऐसे कुत्ते जैसा भव मिलेगा। धन मे अत्याधिक आसक्ति रखोगे तो अगले जन्म में नाग बनकर उस धन की चौकीदारी करोगे। भगवान महावीर के 1.59 लाख श्रावक थे लेकिन केवल 10 श्रावकों का वर्णन विशेष आता है क्योंकि उन्होने परिग्रह परिमाण व्रत और श्रावक के 12 व्रतों को धारण किया था। आगम मे दान का वर्णन आया है। दान, शील, तप और भाव ये 4 मोक्ष के मार्ग है। तीर्थंकर भी संयम ग्रहण करने के पूर्व वर्षीदान करते थे। अभी भी दीक्षा के पूर्व वर्षीदान दान किया जाता दी क्योकि दान के बगैर मोक्ष मिलने वाला नही है। साध्वी डॉ कमलप्रज्ञा मसा ने फरमाया की जितना दुख की घड़ी में हम ईश्वर और संत सती को याद करते है यदि उतना ही सुख में भी याद करे तो दुख आएगा ही नहीं। जब व्यक्ति दुनिया से चला जाता है तो लोग कहते है की फंला शान्त हो गया । मतलब व्यक्ति जीते जी कभी शान्त नही रहता है हमेशा अशान्त रहता है। राम नाम सत्य है अरिहन्त नाम सत्य है यह हम बात हम मृत व्यक्ति की शवयात्रा मे ही क्यों बोलते है क्या मृत व्यक्ति को सुनाते है। अरे राम नाम तो हमेशा से ही सत्य है अरिहन्त नाम भी हमेशा सत्य है। तो दुख के समय ही हम क्यों कहते है कि राम नाम सत्य है, अरिहन्त नाम सत्य है, सुख में भी तो राम नाम और अरिहन्त नाम ही सत्य होता है । क्या सुख के समय राम नाम और अरिहन्त नाम असत्य हो जाता है।