वैचारिक दरिद्रता को दूर करती है मां सरस्वती

रतलाम ।  सनातन सभ्यता देवियों का अत्यंत महत्व है प्राचीन परंपराओं की बात करें तो सभी देवियां हमारी आराध्य और पूजनीय है। मां शक्ति, मां काली, महालक्ष्मी यह सब हमारे जीवन में समर्थ और वैभव का शंखनाद करती है तो मां सरस्वती एकमात्र ऐसी देवी है जिस की आराधना से हमारी शैक्षणिक दरिद्रता दूर होती है हमारे विचारों में उन्नति और संस्कारों में पवित्रता पैदा होती है । इसलिए मां सरस्वती का वंदन प्रत्येक घर में होना चाहिए।
सुविचार शासकीय प्राथमिक विद्यालय खारा खेड़ी में सामूहिक सरस्वती पूजन में प्रधानाध्यापक तथा शिक्षक सांस्कृतिक संगठन के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने व्यक्त किए । आपने कहा कि विद्यालय प्रांगण में ही मां सरस्वती का पूजा अर्चना अनिवार्य नहीं है अभी तो घर-घर में मां सरस्वती की पूजा और आराधना होना चाहिए जो हमारे विचारों को शुद्धता प्रदान करती है । शिक्षा और संस्कारों में नवसृजन के गीत गाती है खासकर विद्यार्थियों के लिए विद्या उत्सव के रूप में समूचा भारत वर्ष मनाता है हमारे देश की सांस्कृतिक समृद्ध ता मां सरस्वती की आराधना से ही फैल रही है ।
आरंभ में राधेश्याम भाभर, शिक्षक पालक संघ के अध्यक्ष शिक्षिका वंदना अग्निहोत्री, किरण सिंह अंबाराम ने मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया । सरस्वती वंदना रोशनी भावर मैं प्रस्तुत की । इस अवसर पर विद्यालय प्रांगण में समस्त ग्रामवासी पंच तथा महिला कार्यकर्ता उपस्थित थे ।  कार्यक्रम का संचालन बंदना अग्निहोत्री ने किया ।

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