

रतलाम। अ.भा. कथानुभूति कहानी संकलन की कहानियाँ, समाज और आसपास होने वाली चीजों को सहज सहेजने का अदभुत संकलन है । संकलन की कहानियाँ हमें प्रभावित करती है तथा बचपन में सुनी पढ़ी कहानियों की स्मृतियों को ताजा कर देती है। उक्त बात ”अनुभूतिÓÓ संस्था एवं सहयोगी संगठन मध्यप्रदेश जैन साहित्य संगम के संयुक्त तत्वावधान में शा. मेडिकल कॉलेज के सामने निजी होटल रतलाम में आयोजित कथानुभूति के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षाविद् एवं साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला ने व्यक्त किए । आपने यह भी कहा कि कथानुभूति का प्रकाशन कर अनुभूति संस्था ने अपना नाम संग्रह प्रकाशन इतिहास में अंकित करवा लिया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. श्रीमती सुलोचना शर्मा ने कहा कि कहानी संकलन में कहानियों में कहे गए कथ्य एवं तथ्य तथा शिल्प वास्तव में सराहनीय है। कहानीकार अपनी बात को कहने में सफल रहे । साहित्य समाज का मार्गदर्शन होता है । आपने संस्था को सुझाव दिया कि अब बाल जीवन पर संकलन प्रकाशित होना चाहिए ।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि गीतकार एवं मध्यप्रदेश जैन साहित्य संगम के राष्ट्रीय सचिव श्री मनोज मनोकामना (झाबुआ) ने कहा कि आज के समय में युवा पीढ़ी साहित्य से विलुप्त होकर सोशल मीडिया से जुड़ रही ह है । जबकि किताबों में छपे शब्द हमें वर्षो से प्रेरणा देते है । आपने आशा व्यक्त हैकि अनुभूति ऐसे समय में नई पीढ़ी के नए हस्ताक्षरों को जोडऩे का प्रयास करेगी ।
मध्यप्रदेश जैन साहित्य संगम के संरक्षक राजेन्द्र काठेड़ (नागदा जं.) ने अपने उदबोदन में कहा कि साहित्य समाज से रूबरू होकर समाज को उचित मार्गदर्शन करता है। अनुभूति संस्था ने ५० वर्ष स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया जाना संस्था की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मध्यप्रदेश जैन साहित्य संगम के संरक्षक श्री कैलाश जैन तरल गीतकार (उज्जैन) ने कहा कि हमने बहुत शहरों में देखा कि साहित्य संस्थाओं का गठन तो बड़े जोश खरोश से होता है किन्तु कुछ समय पश्चात यह संस्थाएं विलुप्त हो जाती है । ऐसे समय में अनुभूति संस्था अद्र्धशती तक अपनी उच्चतम साहित्यिक गतिविधी सक्रियता से चल रही है यह एक अपने आप में कीर्तिमान है ।
कथानुभूति कहानी संकलन पर प्रकाश डालते हुए श्रीमती प्रोफेसर मीनासिंह सोलंकी प्राचार्य शा. महाविद्यालय आलीराजपुर ने कहा कि कहानी संकलन की अधिकांश कहानियों की विशेषताएं और खुबियों को कथा शिल्प की दृष्टि से विश्लेषण कर उन्हें समाज के लिए महत्वपूर्ण कहानियाँ बताया। अनुभूति संस्था के संंरक्षक ठा. रमणसिंह सोलंकी (इंदौर) अतिथि ने अतिथि परिचय देते हुए स्वागत भाषण दिया। संस्था अध्यक्ष डॉ. मोहन परमार ने अनुभूति संस्था के ५० वर्ष स्वर्ण जयंती वर्षके प्रवेश पर कहा कि हमने सभी सदस्यों में आपसी समन्वय और सहयोग के आधार पर अनुभूति संस्था ने यह यात्रा पूर्ण की है।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित किया गया। इसके पश्चात मध्यप्रदेश जैन साहित्य संगम के अध्यक्ष श्री दिनेेश कुमार जैन एवं अनुभूति सचिव मुकेशसोनी आदि ने अतिथियों का स्वागत किया गया।
कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन श्री रामचन्द्र गेहलोत अम्बर ने किया एवं संस्था की विगत ५० वर्षो की साहित्य कार्यक्रम की गतिविधियों की रिपोर्ट श्री सतीश जोशी (नगरा) ने प्रस्तुत की । सम्पादकीय का वाचन गीतकार श्री हरिशंकर भटनागर ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन अन्तर्राष्ट्रीय कवि एवं शायर अब्दुल सलाम खोकर ने किया।
इस अवसर पर डॉ. प्रदीप सिंह राव, डॉ. कारूलाल जमरा, डॉ. कैप्टनएन.के.शाह, श्रेणिक बाफना, डॉ. शोभना तिवारी, डॉ. गीता दुबे, इन्दु सिन्हा, श्रीमती छवि नीलीमा सिंह, रूपाली जैन, ललिता भूरिया, विनिता ओझा, श्रद्धाजलज घाटे, समृद्धि भटनागर, अनामिका भटनागर, रामचन्द्र फुहार, राधेश्याम परिहार नामली, ओमप्रकाश परमार, जगदीश चौहान, हेमंत मेहता, गौरीशंकर खिंची, शिवराज जोशी, रणजीतसिंह राठौर, जुझारसिंह भाटी, प्रकाश हेमावत, अकरम शैरानी, दिलीप कुमार जोशी, नरेन्द्रसिंह डोडिया, नरेन्द्रसिंह पंवार, धनजंय बड़कुले, सय्यद शौकत अली, सुभाष यादव, दुलीचंद प्रजापति, सुरेश माथुर, जगदीश उपाध्याय, निवेदिता देसाई, अंजनी कुमार पाण्डे, असीम उपाध्याय, बाबुलाल परमार रावटी, पुनमचंद भूरिया सहित इन्दौर, उज्जैन, झाबुआ, आलीराजपुर, जावरा, सैलाना, सरवन, नागदा जं., रावटी, पेटलावद, आदि क्षैत्रों के साहित्यकार एवं प्रबुद्धजन उपस्थित थे । अंत में आभार लक्ष्मण पाठक द्वारा व्यक्त किया गया।