तीर्थंकर परमात्मा की वर्तमान व्यवस्था पर उपाध्यायश्री प. पू. प्रविण ऋषीजी म.सा. का सटिक चिंतन

धुलिया (प्रकाश कोचेटा)। उपाध्याय प्रवर पूज्य श्री प्रविण ऋषीजी मसा ने धुलिया में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कलेक्शन,फक्शन, और सेंड आँफ बस यही आज की हर जगह संघ क ा काम रह गया । समाज की समस्याएं, आवश्यकता इसके बीच दब गई इसीलिए कही जगह हमारे भाई बहन धर्म परिवर्तन कर रहे है तो कही लडकियां अजैन समाज मे जा रही है इसकी और किसी भी संघ पदाधिकारी का संघ व्यवस्था का संचालन कर रहे इनका ध्यान नही है इसकी बडी वेदना है। बस संघ का संघपती बनाना, पदाधिकारी बनना और अपना निर्धारित सत्ता का कार्यकाल पुर्ण करना,आगे बढाना ऐसा स्वरुप आज संघ का बन गया है ।
अपने संघ का संचालन करना बडा सौभाग्यशाली बात है पर अपनी जिम्मेदारी का दायित्व सही तरिके से नही निभाना इसके जैसा दुर्भाग्य और कोई नही । हर संघ की प्रतिष्ठा उनकी समाज के प्रति रही निष्ठा से बढती है । संघ में व्यक्ति नही व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है और संघ के प्रति, संघ के सदस्यों के प्रति समर्पित भावना,आदर सम्मान सभी को यथायोग्य मान-सम्मान यह संघ का संचालन करने वाले व्यक्ती में महत्वपूर्ण है ऐसा चिंतन पूज्यश्रीजी ने सभी को दिया।
आज पुरे देश में आवश्यकता है सभी अपने संघ के प्रोटोकॉल का पालन कर और संघ का संचालन करने वालो का यह दायित्व है की समाज में दी हुई जिम्मेदारी के विश्वासपात्र बनकर एक व्हिजन संघ समाज का रखकर कार्य करे । संघ का गौरव कैसा बढे संघ और संघ का हर एक सदस्य संघ के हमेशा किस तरह समाधान, प्रसन्नता पुर्वक जुडा रहे इसलिए सभी कटिबद्ध रहे। ऐसा संदेश पूज्यश्रीजी ने इस धर्मसभा के प्रवचन के माध्यम से पुरे देश की संघ व्यवस्था को दिया।

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