परीक्षित आगमन एवं सुखदेव जी आगमन के मार्मिक प्रसंग पर भावविभोर हुए भक्त


रतलाम 3 जून । जीवन में जब भी कोई ऐसा संकट आ जाए की कोई मार्ग दिखाई नहीं देवे । आप स्वयं को दुविधाओं के चक्रव्यूह में घिरे महसूस करें तब तुरंत किसी भी संत की शरण स्वीकर कीजिये । इससे आपके जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल जायेंगे । सच्चे संत बिना किसी चार्ज के आपको रिचार्ज कर देते है ।यह हमेशा याद रखिये कि बिना हरि की कृपा के संत नहीं मिलते है । परमात्मा के दूत के रूप में संत आपके जीवन से संकटों का समाधान करते हुए जीवन में ज्ञान और वैराग्य का जागरण करते है ।
यह प्रेरक दिग्दर्शन महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वतीजी महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव के दुसरे सत्र में किया । वे श्री हरिहर सेवा समिति मोहनलाल भट्ट परिवार एवं श्री कालिका माता सेवा मंडल ट्र्स्ट द्वारा पुरुषोत्तम मास के अवसर पर दयाल वाटिका सैलाना रोड पर मोक्षदायिनी कथा का श्रवण करवा रहे है । आरम्भ में आयोजक परिवार के मोहनलाल भट्ट, महेंद्र भट्ट, सुनील भट्ट आदि ने पोथी पूजन किया । कथा प्रसंग में बुधवार को परीक्षित आगमन एवं सुखदेव जी आगमन का मार्मिक चित्रण किया गया । गुरुवार को ध्रुव चरित्र का का प्रसंग रहेगा ।
संत भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संचार करते है
पूज्य स्वामीजी ने बताया कि श्रीमद भागवत में प्रसंग आता है कि भक्ति दैवी अपने पुत्र ज्ञान और वैराग्य की मूर्छा से दुखी है तभी देवर्षि नारदजी का आगमन आता होता है । इसका व्यवहारिक जीवन में यही अर्थ है कि जब भी हमारे जीवन में कष्ट आते है तब संत का आगमन न केवल हमारे दुःख दर्द का निवारण करने के लिए होता है बल्कि हमें मोह निद्रा से जगाकर भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संचार भी करते है ।
बदले में जीवन को बदलना चाहते है
उन्होंने कहा कि जिसका चित्त परमात्मा की भक्ति से शांत हुआ है, वे ही आपकी चिंता का समाधान करते हुए उसे शांत कर सकते है । जो शांत है वही संत है और जो संत है वही शांत है । उनके मन मेव किसी प्रकार का उहापोह नहीं होता है । ऐसे संत के पास सम्पूर्ण अहोभाव से जाने से चिंता का समाधान अवश्य मिलेगा, यही सन्देश श्रीमद् भागवत कथा देती है । परमात्मा की भक्ति से जिसका ह्रदय छलकता है, ऐसे सच्चे संत बिना किसी चार्ज के आपको रिचार्ज कर देते है । बदले में आपसे कुछ नही चाहते बल्कि आपके जीवन को बदलना चाहते है।
संत जीवन को सच्ची राह बतलाते है
स्वामीजी ने कहा कि संतो का कार्य चमत्कार अथवा तमाशाबाजी करना नहीं होता है । हमारे धर्मं शास्त्रों में जीवन में पग पग पर आने वाली परेशानियों के लिए शास्त्रोक्त उपाय बताये गए है, इन्ही की मदद से संत जीवन को सच्ची राह बतलाते है । शास्त्र का जीवन में अनुसरण करने से जीवन संकटों से मुक्त होकर परमात्मा की भक्ति में लग जाता है । यही मनुष्य जीवन की सार्थकता है । चिंता को त्यागकर प्रभु का चिंतन करना चाहिए । जीवन में भक्ति का प्रार्दुभाव करने के लिए भगवान की कथा का अवश्य श्रवण करना चाहिए । पुरुषोत्तम मास में यह अवसर रतलाम को श्री मोहनलाल भट्ट परिवार ने देकर बड़ा पुण्य का कार्य किया है ।
कथा का समय परिवर्तित
इस अवसर पर आरडीए अध्यक्ष मनोहर पोरवाल ने स्वामीजी के दर्शन कर आरती में भाग लिया । उनका आयोजन समिति की ओर से अभिनन्दन किया गया । यंहा सर्वश्री पातीराम शर्मा, रमेश शर्मा, भेरुलाल शर्मा, जानी राव, रोहित राव, विजय शर्मा, मदनलाल भट्ट, कैलाश जाट, राजाराम मोतियानी, हरीश बिंदल , मोना-निशा राव आदि ने स्वागत – वन्दन किया गया । संचालन करते हुए सुनील भट्ट करते हुए बताया कि कथा का समय प्रतिदिन शाम 5 बजे से किया गया है । यह जानकरी मीडिया प्रभारी राकेश पोरवाल ने दी ।