
रतलाम। सृजन महाविद्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या डॉ. मंगलेश्वरी जोशी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि “विद्यार्थी जीवन पहचान प्राप्त करने का समय है।” इसी अवस्था में व्यक्ति के भीतर जिज्ञासाओं की पूर्ति और आत्मविकास का सामर्थ्य सबसे अधिक होता है।
डॉ. जोशी ने अपने उद्बोधन में “फाइव डी” Devotion (निष्ठा), Duty (कर्तव्य), Discipline (अनुशासन), Discrimination (विवेक) और Determination (दृढ़ निश्चय) पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थी यदि इन पांच मूल्यों को अपने जीवन में उतार लें तो सफलता निश्चित है।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण संस्था के चेयरमैन एवं सृजन भारत के संयोजक अनिल झालानी ने दिया। उन्होंने कहा कि “शिक्षा मनुष्य का गुण है, और इस गुण के बिना मानवता अधूरी है।” उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज संसाधनों की कोई कमी नहीं है; केवल सही दिशा में प्रयास और जिज्ञासा की आवश्यकता है। संस्थान के समन्वयक निसर्ग दुबे ने संचालन करते हुए कहा कि “यदि विद्यार्थी अपने चित्त को परिष्कृत करता है, तो उसे विवेक और वैराग्य की प्राप्ति होती है; और जब विवेक प्रबल होता है, तब अनिश्चितता भी सुनिश्चितता बन जाती है।”
कार्यक्रम के समापन पर डॉ. जोशी ने ओरिएंटेशन गेम्स के अंतर्गत आयोजित क्विज़ और सितोलिया प्रतियोगिताओं के विजेता एवं उपविजेता टीमों को मेडल और प्रमाणपत्र प्रदान किए। संस्था के प्राचार्य डॉ. जिंदल यादव ने आभार मानते हुए उपस्थित विद्यार्थियों से डॉक्टर मंगलेश्ववरी जोशी के द्वारा बताए गए बिंदुओं को जीवन में धारण कर सफल होने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर प्रथम वर्ष विभागाध्यक्ष डॉ. इम्तियाज़ खान, खेल शिक्षिका ताहिरा खान, तथा अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे।