



रतलाम 30 अक्टूबर । आज गुरुवार को श्रुत संवर्धन वर्षा योग 2025,श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर स्टेशन रोड, रतलाम आचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 सद्भभाव सागर जी महाराज. एवं क्षुल्लक 105 श्री परम योग सागर जी महाराज के सानिध्य मे एवं ब्रह्मचारी राहुल भैया जी के कुशल मार्गदर्शन मे सिद्धचक्र आराधना विधान महामंडल के दूसरे दिन साआनंद संपन्न हुआ। विधान पूजन के दौरान विधान मे बैठे इंद्र इंद्राणीयो द्वारा प्रभु भक्ति की तथा रात्री मे श्री जी की आरती की गयी। सिद्धचक्र विधान समाज में एक अत्यंत पवित्र, शुभ और कल्याणकारी पंचदिवसीय अनुष्ठान है। यह विधान अतिशय लाभ, शांति, रोग-निवारण, और आत्म-शुद्धि के लिए किया जाता है। इसमें पंच परमेष्ठियों (अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु) के साथ धर्मरत्न त्रय — सम्यग्दर्शन, सम्यक्ज्ञान, और सम्यक्चारित्र की आराधना होती है
इसमें आज दूसरे दिन पंच परमेष्ठी आराधना दिवस मनाया गया जिसमें मुख्य भाव पंचपरमेष्ठी की साधना और आत्मिक शुद्धि होती है। इसमें अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु—इन पाँच परमेष्ठियों का विशेष पूजन।पंचपरमेष्ठी स्तोत्र, षोडशकार पूजा, और नमोकार महामंत्र के 108 या 1008 जाप।मंडल के मध्य में “सिद्ध शिला” प्रतीक रूप में स्थापित की जाती है।साधक ध्यान करते हैं कि उनकी आत्मा क्रमशः राग-द्वेष से मुक्त होकर सिद्ध अवस्था की ओर बढ़ रही है।इस दिन शुद्ध अन्न-व्रत या एकासन का पालन किया जाता है। विधान में आज आत्मा में स्थित परम शुद्धता (सिद्ध अवस्था) का चिंतन और अनुभव किया जाता है।
कल तीसरा दिन रहेगा जिसमें धर्मरत्न त्रय पूजा (सम्यग्दर्शन, ज्ञान, चारित्र) का विधान संपन्न किया जाएगा। इसमें मुख्य भाव मोक्षमार्ग के तीन रत्नों की साधना रहेगी। तीनों रत्नों के प्रतीक दीपक प्रज्वलन से आरंभ।”सम्यग्दर्शन स्तवन”, “ज्ञानाराधना”, “चारित्र पूजा” का पाठ रहेगा तथा इसका भावार्थ — सही दृष्टिकोण, सही ज्ञान और सही आचरण अपनाना है
प्रवचन, ध्यान और स्वाध्याय सत्र आयोजित होते हैं।जीवन में सच्चे मार्ग की पहचान और उसका पालन करना होता है। जो साधक इन दिनों में श्रद्धा, संयम और ध्यान के साथ विधान करता है, वह आत्मा को कर्मों से शुद्ध कर मोक्ष के द्वार के समीप पहुँचा देता है।
श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन श्रावक संघ, श्री विद्या सिंधु महिला मंडल श्री विमल सन्मति युवा मंच एवं सकल दिगंबर जैन समाज के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में सिद्ध चक्र विधान कर रहे हैं उक्त जानकारी चंद्रप्रभ दिगंबर जैन श्रावक संघ संयोजक मांगीलाल जैन ने दी।