लुप्त हो चुकी रतलामी प्राचीन आंवला नवमी परिक्रमा यात्रा को जीवित रखे हुए है श्री आनंद कसेरा

रतलाम 1 नवम्बर । नर्मदा परिक्रमा, पंचक्रोशी परिक्रमा, गोवर्धन परिक्रमा तो हम सब जानते है। परन्तु आंवला नवमी पर रतलाम शहर में प्राचीन समय से चली आ रही नगर परिक्रमा की जानकारी बहुत कम लोगों को होगी।
रतलाम मे सदियों पूर्व से कसारा उकांला से यह परिक्रमा आरंभ होकर करमदी रोड़, कालागोरा भेरू, सागोद रोड राम मंदिर, देवरा देवनारायण, जावरा रोड़, भक्तन की बावड़ी, महू रोड़ होते हुए पुन: कसारा उकांला पर पूर्ण होती है। भले ही समय के साथ-साथ अब यह धार्मिक परम्परा अपना अस्तित्व खोती चली गई है, परन्तु कसारा बाजार निवासी एक सज्जन इस परिक्रमा को ऐतिहासिक रूप से संजोए हुए है।
किसी समय के सम्पूर्ण रतलाम शहर के बाहय क्षेत्रों मे खेतों की कच्ची  डगर, पगडंडी , मेढें-सेढ़े के रास्ते से गुजरती लगभग 20 किलोमीटर परिधि की 8-10 घंटे की यात्रा की, इस परम्परा को जीवित रखे हुए है शहर के एक मात्र परिक्रमार्थी श्री आनंद जी कसेरा।
कल जब 40 वे वर्ष संकल्प व्रत को अनवरत पालन करते हुए पुन: अपने स्थान पर जब वे लौटे तब इस भक्त के चहरे पर थकान के स्थान पर ताजगी, तेज और तपस्या का मिश्रित भाव था। आंवला नवमी पर गौशाला रोड़ स्थित श्री राम गोपाल मंदिर में सनातन धर्म सभा, रतलाम द्वारा उनका स्वागत व अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर सनातन धर्म सभा के पदाधिकारियों एवं सभी उपस्थित धर्म प्रेमियों को संबोधित करते हुए अध्यक्ष अनिल झालानी ने आगामी वर्षों में इस धार्मिक आयोजन को पुर्न जीवित करने की आवश्यकता बताई तथा रतलाम की पहचान स्वरूप इस नगर परिक्रमा को आगामी वर्षो में वृहद स्वरूप मे भक्तिभाव से आयोजित करने पर अभियान चलाने का संकल्प लिया।
श्री आनंद कसेरा के अभिनंदन के इस कार्यक्रम के दौरान यज्ञाचार्य श्री दुर्गाशंकर जी, रमेश व्यास, डॉ. राजेन्द्र शर्मा, नवनीत सोनी, बृजनंदन मेहता, पंडित संजय ओझा, पंडित बृजभूषण पंड्या, अभिभाषक रमेश गर्ग सहित अनेक भक्तजन व समिति सदस्य उपस्थित थे।