सर्किल जेल रतलाम में बंदियों के जीवन रूपांतरण हेतु प्रवचन

स्वामी आत्मानंद सरस्वती महाराज के सान्निध्य में आध्यात्मिक कार्यक्रम संपन्न

रतलाम। मध्य प्रदेश का जिला सर्किल जेल रतलाम अपने कैदियों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के कार्यों के लिए एक विशिष्ट पहचान बना चुका है। यहाँ जेल प्रशासन के सतत प्रयासों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से सेवा, प्रेरणा और रचनात्मकता से जुड़ी अनेक गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।
जेल अधीक्षक श्री लक्ष्मण सिंह भदौरिया और उप जेल अधीक्षक श्री ब्रजेश मकवाना के नेतृत्व में बंदियों के जीवन में सुधार लाने हेतु कई सेवा प्रकल्प चलाए जा रहे हैं। इन प्रयासों में नगर के समाजसेवियों और संस्थाओं का भी निरंतर सहयोग मिल रहा है। इसी कड़ी में वाघेला गौ सेवा जीवदया समिति के प्रमुख दिनेश वाघेला, बाबूलाल सिसोदिया, योग एवं प्रकृति सेवक विशाल कुमार के संयोजन से जेल परिसर में श्रृंगेरी मठ के दंडी स्वामी आत्मानंद जी सरस्वती महाराज के सानिध्य में आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प माला अर्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात स्वामी आत्मानंद सरस्वती महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि “जब तक साधक साधना में संलग्न नहीं होगा, उसे मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं साथी उन्होंने रामकृष्ण परमहंस विवेकानंद भगवान श्री राम और श्री कृष्ण के जीवन के संघर्षों पर प्रकाश डाला और बताया कि संघर्ष तो जीवन में सभी को करना पड़ता है चाहे भगवान भी क्यों ना हो।
प्रवचन के उपरांत कैदियों के लिए स्वल्पाहार एवं प्रसादी वितरण किया गया। इस अवसर पर बी. एल. परमार, राहुल वाघेला, शिवराज सिंह चौहान, रविंद्र प्रताप सिंह, रविदास सिंह सहित जेल स्टाफ और समिति सदस्य उपस्थित रहे।