साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ विकास दुबे डॉ शिवमंगल सिंह सुमन सम्मान से सम्मानित

रतलाम मेरे लिए आत्मीयता का छलछ लाता सागर डॉक्टर विकास दवे

रतलाम । डॉ शिवमंगल सिंह सुमन स्मृति शोध संस्थान द्वारा डॉक्टर सुमन की स्मृति में सारस्वत सम्मान केपावन अनुष्ठान का गरिमामय आयोजन सैलाना रोड स्थित प्रिंस पैलेस मे हुआ। जिसमें साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ विकास दवे को डॉ शिवमंगल सिंह सुमन स्मृति सम्मान अर्पित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता गीतकार और पूर्व निदेशक भारत भवन भोपाल श्री नरेंद्र दीपक ने की ।मुख्य अतिथि के रूप में विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन की हिंदी विभाग की आचार्य एवं अध्यक्ष डॉ प्रेमलता चुटेल ने संबोधित किया। डॉ दवे के साथ साहित्यकार महेश बैरागी भी मंचासीन रहे ।सारस्वत अतिथि डॉ विकास दवे को साफा बांधकर जहां सम्मान स्वरूप शाल श्रीफल प्रतीक चिन्ह प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया ।वहीं मंचासीन सभी अतिथियों का पुष्प हार शॉल स्मृति चिन्ह के साथ वासंती दुपट्टे से भी सम्मान करने से आयोजन में वसंत की उमंग धूल गई ।एक और संयोग यह कि डॉ सुमन के अलावा संत रविदास जी को एवं गीतकार पंडित नरेंद्र शर्मा तथा शहीद चंद्रशेखर आजाद का भी पुण्यस्मरण किया गया ।राष्ट्रवादी चिंतक सारस्वत अतिथि डॉ विकास दवे को प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनका सम्मान डॉ सुमन शोध संस्थान के अध्यक्ष रामेश्वर लाल शर्मा आयोजक डॉ शोभना तिवारी दिनेश तिवारी एवं संस्थान के पदाधिकारियों प्रदीप शर्मा राजेश कोठारी भारत सिंह सोलंकी आदि के द्वारा किया गया। रतलाम जिले के आलोट में जन्मे और रतलाम को अपनी शिक्षा स्थली मानने वाले सारस्वत अतिथि डॉ विकास दवे ने भाव विभोर होकर कहा कि रतलाम शहर मेरे लिए आत्मीयता का छलछल ता सागर है रतलाम सहित गृह जिले से प्राप्त स्नेह और परिवार से विरासत में मिली राष्ट्रवाद से ओतप्रोत भावना ने मुझे सही दिशा में आगे बढऩे की प्रेरणा दी साहित्य अकादमी के निदेशक का पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि मालवा अंचल के साहित्यकारों की पहुंच स्थापित करना मेरी प्राथमिकता होगी उन्होंने कहा अकादमी निदेशक के रूप में मुझे दायित्व मिलने से अकादमी में पहली बार मालवा निमाड़ का यह सम्मान मुझे मिला है ।उन्होंने साहित्य के साथ साहित्यकार की चिंता की आवश्यकता बताई आगे कहा कि मैं नए विमर्श की तलाश में निकला हूं उन्होंने बताया की समरसता केविमर्श में कई बार समाज में खाई पैदा हो जाती है स्त्री विमर्श कई बार स्त्री के सम्मान बढ़ाने के बजाय नारी की अस्मिता पर ही प्रहार करता है डॉक्टर दवे साहित्यकारों से अकादमी को और ज्यादा गतिशील बनाने के प्रयासों की बात कही । अध्यक्षीय उद्बोधन में गीतकार नरेंद्र दीपक ने जहां समाज में साहित्य हाशिए पर होने को लेकर चिंता जताई वहीं रतलाम के सारस्वत सम्मान समारोह में उमड़े प्रबुद्ध जनों को देखकर संतोष जताया और आयोजक डॉ शोभना तिवारी को साधुवाद दिया ।श्री दीपक ने कहा कि दवे जी गंभीर चिंतन के धनी हैं सारस्वत सम्मान प्राप्त करने वाले विकास दवे तो केवल एक प्रतीक है वास्तव में उनका सम्मान करना एक विचारधारा का सम्मान करना है ।उनका सम्मान कर हम अपना सम्मान कर रहे हैं पात्र व्यक्ति का चयन कर उसका सम्मान हमारी अच्छी दृष्टि को इंगित करता है ।दवे जी का नाम प्रदेश के गिने चुने चुने राष्ट्रवादी लोगों में शुमार है उनका सम्मान राष्ट्रवादी और रचनात्मक सोच का सम्मान है डॉक्टर सुमन का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि सुमन जी किसी वाद के प्रभाव में नहीं रहे वे मानवतावादी कवि थे मालवा अंचल की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि मालवा के लोगों के मन में प्रेम बहता है। उन्होंने डॉ सुमन शोध संस्थान के प्रयासों को साहित्यिक चेतना का संवाहक बताया। समारोह की मुख्य अतिथि डॉ प्रेमलता चुटे ल ने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में आ रही जड़ता को तोडऩा जरूरी है ऐसे में मेरीशिष्याऔर शोध संस्थान की संचालक डॉ शोभना तिवारी तथा पदाधिकारियों द्वारा किए जा रहे सार्थक प्रयास यही उम्मीद जगाते हैं आज एक विचार धारा को हमने सम्मानित किया मध्य युग के संतो के स्मरण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि संतों की समरसता को जीवन में आत्मसात करने की जरूरत है सारस्वत सम्मान प्राप्त डॉक्टर दवे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बाल साहित्य पर शोध को लेकर उनका कार्य आदर्श है वर्तमान परिपेक्ष में स्वतंत्रता के नाम पर आ रही उचनखलता पर चिंता जताई ।आगे कहा कि मां मातृभाषा और मातृभूमि का कोई विकल्प नहीं है डॉक्टर सुमन की रचना तूफानों की ओर घुमा दो नाविक निज पतवार तथा वरदान मांगूंगा नहीं जैसी रचनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सुमन जी ने इन के माध्यम से संघर्षों को चुनौती दी है ।डॉ विकास दवे के मित्र साहित्यकार महेश बैरागी ने मौजूदा परिप्रेक्ष्य में शास्त्र को शस्त्र बनाकर समस्या का समाधान निकालने की जरूरत बताई ।उन्होंने कहा कि डॉ दुबे को युवा पीढ़ी को इसी मार्ग से प्रशस्त करने में महारत हासिल है ।उन्होंने कहा कि प्रारंभ से ही विकास जी भगत सिंह तथा चंद्रशेखर के विचारों से प्रभावित रहे ।वहीं परिवार में मिले राष्ट्रवाद के संस्कार ने उन्हें ध्येय से कभी विमुख नहीं होने दिया ।आयोजक संस्थान की संचालक डॉ शोभना तिवारी ने स्वागत उद्बोधन में सारस्वत अतिथि डॉ विकास दुबे की देवपुत्र पत्रिका के कुशल संपादन से लेकर सार्थक साहित्य सृजन की चर्चा कर साहित्य अकैडमी द्वारा नई दिशा देने का जिक्र किया ।उन्होंने अध्यक्षता कर रहे नरेंद्र दीपक तथा मुख्य अतिथि डॉ प्रेमलता चुटैल को अपना पथ प्रदर्शक बताया ।उन्होंने कहा कि डॉ सुमन संस्थान भाषा एवम लोक संस्कृति को लेकर भी सतत सक्रिय है ।नए संकल्प को मूर्त रूप देने के प्रति हम कृत संकल्प है। अंत में डॉक्टर शोभना तिवारी ने ही आभार माना प्रारंभ में मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से आयोजन प्रारंभ हुआ ।अखिलेश स्नेही ने स्वस्तिवाचन किया तथा डॉ सुमन की मिट्टी की महिमा का रचना पाठ किया । रश्मि उपाध्याय ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की ।प्रदीप बेस सारस्वत अतिथि डॉ दवे का परिचय दिया। प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत संस्थान के पदाधिकारियों ने किया। सारस्वत अतिथि का स्वागत नगर की सभी संस्थाओं तथा साहित्य प्रेमियों द्वारा भी किया गया स्वागत करने वालों में डॉ मंगलेश्वरी जोशी डॉक्टर सुलोचना शर्मा पत्रकार श्री सुरेंद्र जैन ऋषि कुमार शर्मा पण्डित मुस्तफा आरिफअखिल स्नेही राजेश कोठारी के साथ नगर की संस्थाओं में डॉक्टर मोहन परमार रामचंद्र अंबर रश्मि पंडित अनुरूप शर्मा राजेश रावल दिलीप जोशी इंदु सिन्हा विजय सक्सेना आदि आदि प्रमुख थे संस्थान के अध्यक्ष का 82 वे जन्मदिवस पर अतिथियों ने बधाई देते हुए भी स्वागत किया ।समरोह में महाविद्यालय के प्राध्यापक गण डॉ महेंद्र जैन डॉ सरोज खरे डॉ मंगलेश्वरी जोशी डा सुलोचना शर्मा प्राचार्य ममता अग्रवाल सहित कई गणमान्य साहित्यकार उपस्थित रहे ।