
रतलाम। रखब देव बाबा साहब के जैन मंदिर पर अष्टम ध्वजारोहण महोत्सव का तीन दिवसीय भव्य आयोजन 5 दिसंबर से 7 दिसंबर तक बड़े हर्षोल्लास व श्रद्धा-भक्ति के साथ संपन्न होगा। तीनों दिनों में विविध धार्मिक कार्यक्रम, पूजन, आराधना और भक्ति संध्या का आयोजन रखा गया है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उपस्थित होने की संभावना है।
पहला दिन – 5 दिसंबर, शुक्रवार
प्रातः 9:00 बजे से श्री आदिनाथ पंचकल्याणक पूजन का आयोजन होगा। इस पूजन का लाभ विचक्षण मंडल द्वारा लिया गया है। पूजन संगीतमय साज-बाज के साथ सम्पन्न होगी।
दूसरा दिन – 6 दिसंबर, शनिवार
प्रातः 9:00 बजे से श्री पार्श्वनाथ पंचकल्याणक महापूजन आयोजित होगा, जिसका लाभ श्री कांतिलाल पारसमल चोपड़ा परिवार द्वारा लिया गया है। यह पूजन विचक्षण महिला मंडल द्वारा पढ़ाया जाएगा।
रात्रि 8:00 बजे से शत्रुंजय महातीर्थ भक्ति संध्या का आयोजन विचक्षण मंडल द्वारा किया जाएगा।
तीसरा दिन – 7 दिसंबर, रविवार
प्रातः 9:00 बजे से स्तर भेदी पूजन (आदिनाथ भगवान) पढ़ाया जाएगा। इसका लाभ चंद्रवीर परिवार द्वारा लिया गया है। इसी दिन मंदिर के शिखर पर ध्वजा चढ़ाने का सौभाग्य मनोहर लाल शैतानमल छाजेड़ एवं राकेश शिखरचंद सोनी परिवार को प्राप्त होगा। शाम 7:30 बजे से सभी देवरियों में विराजित परमात्माओं की भव्य अंगरचना व संगीतमय आरती का अलौकिक आयोजन होगा।
स्वामी वात्सल्य का आयोजन
मंदिर परिसर के पीछे एवं दादावाड़ी के पास खुले स्थान पर समाजजनों हेतु स्वामी वात्सल्य का विशाल आयोजन रखा गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता की संभावना है।
स्वामी वात्सल्य लाभार्थी — प्रभु पारसनाथ भेरूनाथ रहेंगे।
जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ श्री संघ एवं रखब देव बाबा साहब जैन मंदिर के अध्यक्ष अशोक चोपड़ा, कांतिलाल चोपड़ा, पदाधिकारी एवं संयोजक राजेंद्र कोठारी (पीआरओ), जितेन्द्र संचेती, शैलेंद्र पवैचा, अजीत सकलेचा, दीपक कोठारी, हेमंत बोथरा, चितरंजन लालन, लोकेश लालन, राजेंद्र कोठारी (सारंगी वाले), आलोक गांधी आदि सभी समाजजनों से विनम्र आग्रह करते हैं कि अधिक से अधिक संख्या में पधारकर धर्मलाभ ग्रहण करें और महोत्सव को सफल बनाएं।
रखब देव बाबा साहब जैन मंदिर मालवा क्षेत्र का 200 वर्ष पुराना प्राचीन तीर्थरतलाम शहर के मध्य, महलवाड़ा से लगे थावरिया बाजार क्षेत्र में स्थित यह लगभग 200 वर्ष पुराना जैन मंदिर मालवा क्षेत्र का अत्यंत प्रतिष्ठित एवं प्राचीन उपासना स्थल है। संवत 1886 में खरतरगच्छाचार्य जिनमहेंद्रसागर सूरीश्वरजी के करकमलों से इस मंदिर की प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। समय के साथ जर्जरित देवरी व संरचना देखकर सन् 1981 में रतलाम आगमन पर साध्वी परम पूज्य मणीप्रभाश्रीजी ने इसके जीर्णोद्धार का संकल्प कराया।
समाजजन की एकजुटता, जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ ट्रस्ट के सहयोग तथा जीर्णोद्धार समिति की सक्रियता से सन् 2009 में भूमि पूजन कर कार्य प्रारंभ हुआ। समिति अध्यक्ष श्री कांतिलाल चोपड़ा की तत्परता, कुमारपाल भाई वी. शाह, धोलका के विशेष सहयोग एवं साध्वी श्रीजी के मार्गदर्शन में 6 दिसंबर 2017 को 26 देहरियों में 86 प्रभु परमात्माओं की प्रतिष्ठा महामंगलाचरण के साथ सम्पन्न हुई।
आज यह मंदिर अपनी भव्यता और धार्मिक गरिमा में अत्यंत विकसित रूप में खड़ा है। आदिनाथ भगवान की मनोहरी प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है। संपूर्ण मंदिर में 100 से अधिक मूर्तियाँ स्थापित हैं।मालपुरा शैली पर आधारित दादावाड़ी का निर्माण मंदिर के पिछले भाग में हुआ है। अग्रभाग में यतिजी की गादी विराजित है। प्रवेश द्वार पर दोनों ओर गजराज की भव्य मूर्तियाँ मंदिर की शोभा बढ़ाती हैं। मंदिर परिसर स्थित दादावाड़ी को शीघ्र ही नवीन स्वरूप देने का कार्य भी प्रगतिरत है।
