रखबदेव बाबा साहब के जैन मंदिर पर ध्वजा महोत्सव का धूमधाम से समापन

मूल नायक आदिनाथ भगवान के शिखर पर एवं 27 देहरियों पर लहराई ध्वजाएं

रतलाम। मूल नायक आदिनाथ भगवान के मंदिर के शिखर पर ध्वजा लहराने के साथ ही मंदिर परिसर में स्थित परमात्मा की अनेक देहरियों पर ध्वजारोहण का अद्भुत और भव्य दृश्य देखने को मिला। लगभग 200 वर्ष प्राचीन रखबदेव बाबा साहब के जैन मंदिर परिसर में तीन दिवसीय ध्वजा महोत्सव के समापन अवसर पर भक्तिमय उल्लास चरम पर रहा।
जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ श्री संघ के अंतर्गत आयोजित तीन दिवसीय ध्वजा महोत्सव के अंतिम दिन रविवार, 7 दिसंबर को प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी लाभार्थी परिवार मनोहरलाल शैतानमल छाजेड़ एवं राकेश शिखरचंद सोनी परिवार सहित अनेक श्रद्धालुओं ने हर्षोल्लास के साथ ध्वजा चढ़ाने का पुण्य लाभ लिया।
मंदिर के चारों ओर स्थित 27 तीर्थंकर देहरियों पर भी विभिन्न लाभार्थी परिवारों द्वारा धर्ममय वातावरण में ध्वजा चढ़ाई गई। प्रत्येक देहरी पर श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रभु के प्रति श्रद्धा अर्पित की।
इससे पूर्व सतरभेदी पूजन एवं आदिनाथ भगवान की विशेष पूजा चंद्रवीर परिवार के अमृत योगेंद्र जी द्वारा परम श्रद्धा से पढ़ाई गई। सुबह 9:30 बजे से थावरिया बाजार स्थित मंदिर पर श्रद्धालुओं का लगातार तांता लगा रहा और पूरा परिसर भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक भव्यता से सराबोर हो उठा।
धर्मसभा में आचार्य निपुणसागर मसा एवं आचार्य नयप्रभ मसा के शिष्य मंडल के सानिध्य में ध्वजा के आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत किया गया। तीन दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर मंदिर परिसर में स्वामी वत्सल आयोजन रखा गया, जिसमें समुदायजन एवं आमंत्रित गणमान्य सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन श्री संघ अध्यक्ष अशोक चोपड़ा एवं मंदिर संयोजक कांतिलाल चोपड़ा ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर श्री फतेहलाल कोठारी, राहुल मेहता (मुंबई), श्रेणिक ज्ञानचंद सराफ, राजेंद्र कोठारी (P.R.O.), जितेंद्र संचेती, शैलेंद्र पावैचा, अजीत सकलेचा, दीपक कोठारी, हेमंत बोथरा, चितरंजन लालन, लोकेश लालन, राजेंद्र कोठारी सारंगीवाले, आलोक गांधी, विनीत गांधी, अशोक चौटाला, जयंतीलाल जैन, सुरेंद्र जैन पावैचा, प्रदीप श्रीमाल, ललित पोरवाल सहित समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

रखबदेव बाबा साहब जैन मंदिर — मालवा क्षेत्र का 200 वर्ष पुराना प्राचीन तीर्थ

रतलाम शहर के मध्य, महलवाड़ा से लगे थावरिया बाजार क्षेत्र में स्थित यह लगभग 200 वर्ष प्राचीन जैन मंदिर मालवा क्षेत्र के प्रमुख उपासना स्थलों में से एक है। संवत 1886 में खरतरगच्छाचार्य जिनमहेंद्रसागर सूरीश्वरजी के करकमलों से इस मंदिर की प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई थी। समय के साथ देहरी व संरचना जर्जरित होने पर सन् 1981 में साध्वी परमपूज्य मणीप्रभाश्रीजी के संकल्प के अनुसार मंदिर के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया गया। समाजजन की एकजुटता, जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ ट्रस्ट के सहयोग एवं जीर्णोद्धार समिति की सक्रियता से सन् 2009 में भूमि पूजन कर कार्य प्रारंभ हुआ और 6 दिसंबर 2017 को भव्य महामंगलाचरण के साथ 26 देहरियों में 86 प्रभु प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई।

आज यह मंदिर अपनी भव्यता, शांत आध्यात्मिक आभा और धार्मिक गरिमा में विशेष पहचान रखता है—

  • आदिनाथ भगवान की मनोहरी प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है।
  • संपूर्ण मंदिर परिसर में 100 से अधिक मूर्तियाँ स्थापित हैं।
  • मालपुरा शैली पर आधारित भव्य दादावाड़ी का निर्माण मंदिर के पिछले भाग में स्थित है।
  • अग्रभाग में यतिजी की गादी विराजित है।
  • प्रवेश द्वार पर दोनों ओर गजराज की भव्य प्रतिमाएँ मंदिर की शोभा बढ़ाती हैं।
  • दादावाड़ी के नवीन स्वरूप का कार्य भी वर्तमान में प्रगतिरत है।