प्रेम शांति और सद्भाव धर्म का मूल प्राण है – राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश

चेन्नई एमकेएम 7 दिसंबर। धर्म और समाज की पवित्र जाजम पर अराजकता फैलाने वाले ,हिंसा को बढ़ावा देने वाले, नफरत का जहर उगलने वाले, कट्टर सांप्रदायिकता का उन्माद फैलाने वाले का अभिनंदन और सम्मान किया जाता है जो धर्म और मानवता के साथ घिनौना षड्यंत्र है l उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने महा सती तीर्थांजना जी की बड़ी दीक्षा समारोह को संबोधित करके कहा की ऐसे गिरे हुए लोगों का सम्मान होता है तो धर्म बदनाम होता है युवा पीढ़ी में आस्था का पलायन हो रहा हैl उन्होंने कहा कि आक्रामक और जुल्म करने वाले लोगों को किसी भी धर्म में प्रवेश नहीं हैl उनको तो अपराधी की भांति बहिष्कार करके दंडित करना चाहिए l
मुनि कमलेश से बताया कि विश्व के सभी धर्म के महापुरुषों ने न्यूनतम धार्मिकता की आचार संहिता बनाई हैl जिसमें उनके भक्त नैतिक हो देशभक्त हो ,प्रेम सद्भाव का पुजारी हो, नशा मुक्त हो ,तभी उसका धर्म में प्रवेश संभव है l
राष्ट्र संत ने कहा कि अनैतिक लोग यदि आदर्श बनते हैं पूजनीय बनते हैं यह धर्म समाज के सबसे बड़ा खतरा हैl धर्म को नास्तिकों से नहीं धर्म के ठेकेदारों से खतरा है l जैन संत ने कहा कि प्रेम शांति और सद्भाव धर्म का मूल प्राण हैl इसके बिना तीन कल में भी सुख चैन शांति समृद्धि और विश्व शांति नहीं आ सकती है l
आचार्य श्री हीराचंद्र विजय जी ने कहा कि जब धार्मिक आत्मा ने उन्माद सवार होता है वह उसके लिए वह समाज के लिए अभिशाप बनता है l घणी वर्य मनीष प्रभा सागर जीने मंगलाचरण किया lसुलोचना जी महाराज की शिष्य घोषित की गई मुनि कमलेश ने नव दीक्षित को अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच की ओर से चादर भेंटटकीआदिनाथ जैन ट्रस्ट शुले ने समारोह का आयोजन किया मंच संचालन मनोज राठौर ने किया बंदूक गैलरी मोहन मनोज जैन ने भक्ति गीत प्रस्तुत किया जिन आजा बिहार सेवा समिति संयोजक मधु बोहरा ने बताया कि देवेंद्र कुमार बोहरा हेमराज चंडालिया राकेश कुमार पुनमीया अशोक बाफना, सुभाष चंद्र दुनीवाल एवं संस्कार मंच के दीपक बाघमार, कमलेश जैन कार्यकर्ताओं ने बिहार सेवा का लाभ लिया।