अष्टापद तीर्थ से पालीताणा जैन तीर्थ की 45 दिवसीय पैदल यात्रा रतलाम पहुंची


रतलाम। भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर रतलाम शहर ने मंगलवार सुबह एक ऐतिहासिक दृश्य का साक्षात्कार किया, जब अष्टापद तीर्थ से पालीताणा जैन तीर्थ की 45 दिवसीय पदयात्रा पर निकले छः री पालीत ऐतिहासिक पैदल संघ ने आचार्य श्री जिन पियूष सागर सूरीश्वर की पावन परंपरा के अंतर्गत साधु–साध्वियों की मंगल निश्रा में नगर में प्रवेश किया। प्रभु वंदना, गजराज की अगवानी, गूंजते बैंड–बाजों और नृत्यमग्न श्रद्धालुओं के बीच नगर का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा, वहीं गरिमामयी सम्मान ने स्वागत को अविस्मरणीय बना दिया।
शहर में प्रवेश के साथ गूंजा भक्ति का वातावरण
सुबह 8 बजे छः री पालीत पैदल संघ रतलाम में प्रवेश किया। स्टेशन रोड स्थित पारसनाथ मंदिर पर संघ ने दर्शन–वंदन किया और इसके पश्चात तीर्थयात्रा गजराज की अग्रिम अगवानी, पीछे साधु-साध्वियों का भगवत का समूह, फिर श्रावक–श्राविकाओं की भक्ति यात्रा तथा अंत में बैंड-बाजों पर नृत्य करते श्रद्धालुओं के साथ आगे बढ़ी। और जयकारों से वातावरण पावन हो उठा।
कई स्थानों पर हुआ विशेष स्वागत, स्टेशन रोड पर भव्य अभिनंदन
स्टेशन रोड पर जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ श्री संघ के अध्यक्ष अशोक चोपड़ा, रखबदेव बाबा साहब जैन मंदिर के संयोजक कांतिलाल चोपड़ा, मालवा श्री संघ के राजेंद्र कोठारी तथा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता महेंद्र कटारिया सहित अनेक गणमान्यजनों ने संघ का गर्मजोशी से स्वागत किया।
महलवाड़ा मुख्य द्वार पर गरिमामयी सम्मान
महलवाड़ा मुख्य द्वार पर चोपड़ा एवं तलेरा परिवार द्वारा संघ का पारंपरिक स्वागत कर विशेष सम्मान किया गया। श्री सोहनलाल चोपड़ा द्वारा संघपति और साधु–साध्वियों वंदन अभिनंदन किया गया। खरतरगच्छ संघ के पदाधिकारियों ने संघ पतियों और आराधकों का बहुमान कर चरण–पूजन किया।
नगर के प्रमुख मार्गों से हुआ शोभायात्रा का नगर-भ्रमण
संघ ने निम्न मार्ग से नगर यात्रा की
नगर निगम, महलवाड़ा, डालू मोती बाजार,तोपखाना,चांदनी चौक,आनंद भवन उपाश्रय आनंद भवन उपाश्रय पहुंचने पर खरतरगच्छ संघ अध्यक्ष अशोक चोपड़ा, मनोहर छाजेड़, मनसुख चोपड़ा, लोकेश लालन, राजेंद्र कोठारी ‘सारंगीवाले’ सहित अनेक विशिष्टजनों ने शाल–श्रीफल से स्वागत कर यात्रा को भावपूर्ण विराम दिया।
विचक्षण विद्यापीठ विद्यालय में विशेष सम्मान
यहां रविंद्र मालू, हेमंत बोथरा, कमल नयन लालन राजेंद्र कोठारी, , प्राचार्य अवनीश पांडे तथा स्टाफ द्वारा संघ का सौहार्दपूर्ण स्वागत किया गया।
50 से अधिक साधु–साध्वी व 200 से अधिक श्रावक यात्रा में सम्मिलित
यह ऐतिहासिक यात्रा अपने आप में अद्वितीय है। इसमें—
50+ साधु–साध्वी
200+ श्रावक–श्राविकाएँ
घोड़े, हाथी, रथ और साउंड सिस्टम
प्रभु आदिनाथ की भव्य मूर्ति से सुसज्जित विशेष रथ
आकर्षण का केंद्र रहे। यह रथ प्रतिदिन पूजा–अर्चना के बाद ही आगे बढ़ता है। यात्रा 45 दिन पैदल चलकर गुजरात के पावन पालीताणा तीर्थ पहुंचेगी।
“परमात्मा से मिलने के लिए परमात्मा जैसा बनना होगा” — संवेग रत्न सुरेश्वर
रतलाम के समीप करमदी शत्रुंजय तीर्थ में आयोजित धर्मसभा में संवेग रत्न सुरेश्वर ने कहा “सिद्ध क्षेत्र में जाकर परमात्मा जैसा बनने के लिए भाव यात्रा अत्यंत आवश्यक है। यह यात्रा हमारे जीवन के मोक्ष मार्ग को अग्रेषित करती है। यात्रा से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन आगे बढ़ते रहना ही सच्ची साधना है।” प्रज्ञा श्रीजी की शिष्या प्रशमनिधि जी ने उपस्थित भक्तों को शत्रुंजय तीर्थ की भाव यात्रा का आध्यात्मिक अर्थ समझाकर भावनात्मक भाव–यात्रा करवाई।
रतलाम एवं करमदी में हुआ भव्य बहुमान
स्वागत करने वालों में प्रमुख रूप से भूपेंद्र चिपड, जयंतीलाल दख, नितेश बांठिया, महेंद्र चोपड़ा, डॉ. सुनील चोपड़ा, अंबालाल चंडालिया, हसमुख छोरिया, विकेश चिपड, आदर कुमार भंसाली, शैलेंद्र मोदी आदि शामिल रहे।
खरतरगच्छ संघ की ओर से अशोक चोपड़ा (अध्यक्ष), कपिल सुराणा (युवा संघ अध्यक्ष), लोकेश लालन, मनोहर छाजेड़, कांतिलाल चोपड़ा, मनसुख चोपड़ा, राजेंद्र कोठारी, राकेश सोनी, अमित नाहटा, मोहन चोपड़ा, जितेंद्र चोपड़ा, विषाक्षण महिला मंडल एवं बहू मंडल के सदस्यों की प्रभावी उपस्थिति रही।