
रतलाम। हिन्द की सांस्कृतिक विरासत समूह के तत्वावधान में अजमेर स्थित लोढ़ा धर्मशाला में रविवार को “क्षेत्रीय पुरातत्त्व धरोहर” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में देशभर से आए इतिहासकारों, पुरातत्त्वविदों एवं शोधार्थियों ने अपने-अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर इतिहास एवं पुरातत्व के क्षेत्र में रतलाम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले इतिहासविद नरेन्द्रसिंह पंवार ने रतलाम जिले के इतिहास और पुरातत्व पर आधारित शोध-पत्र का वाचन किया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व श्री पंवार दिसंबर माह में इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली द्वारा समालखा (पानीपत, हरियाणा) में आयोजित राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में भी अपना शोध-पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं।
आयोजित संगोष्ठी में लगभग 25 इतिहासकारों, पुरातत्ववेत्ताओं एवं शोधार्थियों ने सहभागिता करते हुए अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अज्ञात एवं अल्पज्ञात ऐतिहासिक धरोहरों, शिलालेखों तथा दुर्लभ ग्रंथों के संरक्षण एवं उनके प्रकाशन की दिशा में विमर्श को आगे बढ़ाना था।
सेमिनार के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए श्री पंवार ने अपने शोध-पत्र में रतलाम जिले के इतिहास एवं पुरातत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों—विरुपाक्ष महादेव मंदिर (बिलपांक), धराड़ का शिव मंदिर, उच्चानगढ़ का पुरातत्व, धरोला (आलोट) स्थित अनादि कल्पेश्वर शिव मंदिर तथा गुणावद का पुरातत्व—को विशेष रूप से रेखांकित किया।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में पुराविद् डॉ. नारायण व्यास (भोपाल), डॉ. आर.सी. ठाकुर (निदेशक, अश्विनी शोध संस्थान, महिदपुर) तथा डॉ. ध्रुवेन्द्रसिंह जोधा (शोध अधिकारी, वाकणकर शोध संस्थान, भोपाल) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. धर्मजीत कौर (अधीक्षक तकनीकी, राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय, जयपुर) ने की।
कार्यक्रम का स्वागत भाषण एवं अतिथि परिचय श्री ललित शर्मा ने प्रस्तुत किया, संचालन डॉ. वर्षा नालने ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. उर्मिला शर्मा द्वारा किया गया।