रतलाम 5 जनवरी। उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग श्रीमती नीलम सिंह चौहान ने बताया कि वर्तमान में तापमान में गिरावट के कारण रबी फसलों में पाले का प्रभाव होने की संभावना है। यदि शाम के समय उत्तरी हवाएं चलती है, तो किसानों को पाले से फसलों को बचाव के लिये निम्न उपाय करना चाहिये ।
1- खेत के पास धुआ करें:- अपनी फसल को पाले से बचाने के लिये आप अपने खेत के मेड़ो पर 06-07 जगह धुंआ कर दें जिससे तापमान जमाव बिन्दु तक नहीं गिर पाता और पाले से होने वाली हानि से बचा जा सकता है ।
2- पौधे को ढकें:- पाले से सबसे अधिक नुकसान नर्सरी में होता है नर्सरी में पौधो को रात में प्लास्टिक की चादर से ढकने की सलाह दी गई है, ऐसा करने से प्लास्टिक के अंदर का तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है जिससे सतह का तापमान जमाव बिन्दु तक नहीं पहुच पाता और पौधे पाले से बच जाते है। पॉलिथिन की जगह पर पुआल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। पौधो को ढकते समय इस बात का ध्यान जरूर रखे कि पौधो का दक्षिण पूर्वी भाग खुला रहें ताकि पौधो को सुबह व दोपहर को धूप मिलती रहे ।
3- रसायनिक उपचारः- पाला पड़ने की संभावना हो उन दिनो फसलो पर गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल का छिड़काव करना चाहियें । इस हेतु एक लीटर गंधक के तेजाब को 1000 लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टर क्षेत्र में प्लास्टिक के स्प्रेयर से छिड़के । ध्यान रखे की पौधों पर घोल की फुहार अच्छी तरह लगें । छिड़काव का असर दो सप्ताह तक रहता है। यदि इस अवधि के बाद भी शीत लहर व पाले की संभावना बनी रहे तो गंधक के तेजाब को 15-15 दिन के अंतर से दोहराते रहें ।
सल्फर 90 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी पाउडर को 3 किलोग्राम एक एकड़ में छिड़काव करने के बाद सिंचाई करें। सल्फर 80 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी पाउडर को 40 ग्राम प्रति पम्प (15 लीटर पानी) में मिलाकर स्प्रे करें।