रतलाम में दो परिवारों की सहमति व संवेदना से चार नेत्रहीनों को मिला नई दृष्टि का वरदान


रतलाम । किसी प्रियजन के निधन का क्षण अत्यंत पीड़ादायक होता है, किंतु उसी क्षण में मानवता का दीप प्रज्वलित कर देना असाधारण साहस और उच्च सामाजिक चेतना का प्रतीक है। रतलाम शहर में दो परिवारों ने नेत्रदान कर यह सिद्ध कर दिया कि मृत्यु भी जीवन देने का माध्यम बन सकती है। इन दो सफल नेत्रदानों से चार दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिलने की आशा जगी है, जिससे समाज में सेवा, संवेदना और जागरूकता का सशक्त संदेश प्रसारित हुआ है।
नेत्रम संस्था के अनुसार गोपाल गोशाला कॉलोनी निवासी स्वर्गीय बापूलाल सकलेचा के निधन उपरांत उनके परिजनों —
पुत्र नरेश सकलेचा, पौत्र रजत सकलेचा (एस.पी. मंडला), स्वर्ण सकलेचा एवं पुत्रवधू निवेदिता नायडु (एस.पी. पन्ना) — ने काकानी सोशल फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी एवं रवि पिरोदिया की प्रेरणा से नेत्रदान हेतु सहमति प्रदान की।
इसी प्रकार चांदनी चौक निवासी स्वर्गीय वर्धमान मूणत, सराफा व्यवसायी, के निधन के पश्चात उनके पुत्रों — कांतिलाल मूणत, अनोखीलाल मूणत, रमनलाल मूणत, राजकुमार मूणत एवं सुरेंद्र मूणत — ने अरविंद कटारिया, यशवंत पावेचा एवं सौरभ भंडारी की प्रेरणा से नेत्रदान का मानवीय निर्णय लेते हुए सहमति प्रदान की।
दोनों परिवारों की सहमति प्राप्त होते ही रतलाम मेडिकल कॉलेज को सूचना दी गई, जहां चिकित्सा टीम द्वारा पूर्ण सम्मान, संवेदनशीलता एवं तत्परता के साथ नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। यह प्रक्रिया समाज, चिकित्सा तंत्र और सेवा संस्थाओं के आपसी समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण रही।
नेत्रदान के समय राजमल नागौरी, हीरालाल लोढ़ा, जिंदास लूनिया, दशरथ बंबोरी, रखबचंद नागौरी, अनिल देसरला, पूनमचंद मेहता, सुदर्शन मांडोत, अरविंद कटारिया, प्रफुल्ल लोढ़ा, सौरभ भंडारी, झमक भरगट,विजय जैन , पीयूष बाफना, हेमन्त मूणत, ओमप्रकाश अग्रवाल, सुशील मीनु माथुर, भगवान ढलवानी एवं गिरधारी लाल वर्धानी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
विशेष उल्लेखनीय रहा कि नेत्रदान टीम को दिवंगतों के निवास स्थान तक ले जाने एवं पुनः मेडिकल कॉलेज पहुंचाने की संपूर्ण व्यवस्था सुशील मीनु माथुर ने गिरधारी लाल वर्धानी के सहयोग से अपने निजी वाहन द्वारा की।
काकानी सोशल वेलफेयर एवं नेत्रम संस्था द्वारा दोनों परोपकारी परिवारों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर गोविंद काकानी एवं सुशील मीनु माथुर ने समाज से आह्वान किया कि नेत्रदान एवं देहदान को लेकर फैली भ्रांतियों को त्यागकर इसे जीवन का संकल्प बनाएं। यह नेत्रदान केवल चार व्यक्तियों को दृष्टि नहीं दे रहा, बल्कि पूरे समाज को मानवता का मार्ग दिखा रहा