शीतल तीर्थ कमेटी ने किया श्रुत संवेगी से निवेदन – अब रतलाम में भी होगी मंत्राक्ष की गूंज

रतलाम । आचार्य योगीन्द्र सागर जी का ही उपकार है कि आज आचार्य कुंद कुंद द्वारा रचित पाहुड़ में से हम एक पाहुड़ झाण झयण पाहुड़ को बचा पाए । जैन साहित्य पर उनके ऐसे उपकार को ध्यान रखते हुए पूज्य श्री की स्मृति में एक ऐसे जिनवाणी मंदिर का निर्माण शीतल तीर्थ पर हो जहां हजारों वर्षों तक जिनवाणी का संरक्षण किया जा सके और इस पुनीत कार्य के लिए मैं शीतल तीर्थ जरूर आऊंगा। भीलवाड़ा प्रवास के दौरान श्रुत संवेगी मुनि 108 श्री आदित्य सागर जी मुनिराज ने शीतल तीर्थ कमेटी को आशीर्वाद देते हुए यह बात कही । क्षेत्र अधिष्ठात्री ब्र.डॉ सविता दीदी ने बताया कि प. पू समाधिस्थ आचार्य योगीन्द्र सागर जी महामुनिराज की प्रेरणा से रतलाम से 11 किमी धामनोद में स्थित श्री दिगम्बर जैन धर्मस्थल शीतल तीर्थ का निर्माण किया गया और सन 2024 में पूज्य चर्या शिरोमणि आचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी मुनिराज सहित 72 श्रमण श्रमणियों के सानिध्य में इस क्षेत्र का ऐतिहासिक पंचकल्याणक संपन्न हुआ । तब ही से निरन्तर भाव था कि एक बार श्रुत संवेगी मुनि आदित्य सागर जी भी इस क्षेत्र पर आए ।
ट्रस्ट अध्यक्ष महेन्द्र जैन (गुड़ वाला) ने बताया कि पिछले 2 साल से क्षेत्र कमेटी निरंतर मुनि संघ से निवेदन कर रही है इसी क्रम में भीलवाड़ा प्रवास के दौरान डॉ सविता दीदी के नेतृत्व में महावीर गांधी, प्रभातदोषी, दिलीप जैन,सरिता जैन, राकेश जैन सहित पूरी कमेटी द्वारा पुनः निवेदन किया गया और इस बार हमारे निवेदन को स्वीकार करते हुए पूज्य मुनि श्री ने शीतल तीर्थ आगमन की स्वीकृति हमें प्रदान की । इस अवसर पर मुनि संघ के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का पुण्यार्जन भी योगी परिवार शीतल तीर्थ को प्राप्त हुआ। आगामी फरवरी माह में मुनि आदित्य सागर जी के सानिध्य में बांसवाड़ा में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के पश्चात मुनि संघ का विहार शीतल तीर्थ के लिए होगा ऐसे निर्देश पूज्य श्री द्वारा दिए गए ।
मंत्राक्ष आयोजन के साथ जिनवाणी मंदिर का भी होगा निर्माण
प्रवक्ता राकेश पोरवाल व राकेश जैन ‘चपलमन’ के अनुसार मुनि श्री द्वारा णमोकर मंत्र उद्भूत मंत्राक्ष की ध्वनियों से विभिन्न रोगों के निवारण हेतु अद्भुत सेमिनार आयोजित किए जाते है ऐसे में इस आतिशायिक शांत और पावन भूमि पर इस आयोजन के परिमाण ओर फलदायी होंगे कमेटी द्वारा मंत्राक्ष हेतु भी पूज्य श्री को निवेदन किया जायेगा ओर मुनि श्री की ही कल्पना जिनवाणी मंदिर को क्षेत्र पर आकर देने का प्रयास किया जाएगा । पूज्य श्री की अनुमति पर इस संपूर्ण आयोजन की तिथियां शीघ्र ही प्रसारित की जायेगी।

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