संतों की सेवा एवं उनका सानिध्य मानव को सदैव आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है – श्री श्री 1008 शांति स्वरूपानंद जी महाराज

रतलाम। संत का संकल्प सदैव राष्ट्रहित और राष्ट्रकल्याण के लिए समर्पित रहता है। वे आध्यात्मिक संवर्धन एवं संरक्षण के माध्यम से समाज को धर्म का शुद्ध और सुदृढ़ आधार प्रदान करते हैं। सच्चा संत स्वार्थ से परे रहकर समाज के हित में अपनी साधना और आराधना को समर्पित कर देता है। इसलिए संतों की सेवा एवं उनका सानिध्य मानव को सदैव आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।
उक्त उद्गार निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री श्री 1008 शांति स्वरूपानंद जी महाराज ने शिव-शक्ति-हनुमत महायज्ञ के छठे दिवस अपने ओजस्वी उद्बोधन में व्यक्त किए।
प्रातःकाल नियमित हवन-महायज्ञ के उपरांत संतों एवं श्रद्धालुओं ने प्रसादी भंडारे में सहभागिता की। इस अवसर पर परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 आनंद गिरि जी महाराज को पूर्ण वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ‘हिंदू रत्न’ की उपाधि से अलंकृत कर प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
साथ ही सनातन धर्म एवं संस्कृति के संवर्धन हेतु युवाओं को प्रेरित करने वाली, सामाजिक सेवा में निरंतर सक्रिय तथा धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से जनमानस का मनोबल सुदृढ़ करने वाली अर्धनारीश्वर परिवार की काजल गुरु जागीरदार को नमस्कार ग्रुप द्वारा प्रदत्त ‘भारत गौरव सम्मान’ परम पूज्य महामंडलेश्वर जी के कर-कमलों से प्रदान किया गया।
अर्धनारीश्वर परिवार की औऱ से सभी भक्तों को एक लाख इक्कावन हज़ार अभिमंत्रित रुद्राक्ष प्रसादी वितरित की गई !
इस गरिमामयी अवसर पर महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 देव स्वरूपानंद जी महाराज, दत्त अखाड़े के स्वामी नील भारती जी महाराज, ऋषि संजय शिवशंकर दवे, महंत नरेंद्र गिरि जी महाराज तथा पूज्य स्वामी गौशरणानंद जी महाराज मंचासीन रहे।
महायज्ञ के सप्तमी दिवस पूर्णाहुति के उपरांत सभी संतों एवं श्रद्धालुओं ने यज्ञ की परिक्रमा की। तत्पश्चात यज्ञशाला परिसर से बैंड-बाजों के साथ भव्य मंगल कलश यात्रा दीनदयाल नगर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर पहुँची, जहाँ विधिवत पूजन-अर्चन कर भगवान श्री हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *