मातृ देवो भव-पितृ देवो भव ये भारतवर्ष की संस्कृति है – आगमज्ञाता डॉ. समकित मुनि जी मसा

रतलाम । आज नीमचौक स्थानक पर श्रणव चारित्र विषय पर प्रथम दिवस धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए प्रवचनकार आगमज्ञाता डॉ समकित मुनि जी मसा ने कहा कि पेन किलर के साइड इफैक्ट हो सकते है लेकिन माँ बाप के पास बैठ कर उनका हाल चाल पूछना ये उनके लिए बहुत बड़ा पेन किलर है और इसके कोई साइड इफैक्ट भी नहीं है । जिंदा रहने पर तो पूछते नहीं है और मरने के बाद तस्वीर टाँगते है, सच तो ये है दोस्तों बच्चे आजकल रिश्तो की कीमत मांगते है ।
इस संसार में 3 लोगो का उपकार चुकाना बहुत मुश्किल है – माता पिता, धर्माचार्य और जिसने रोजगार की कला सिखाई है ।
शरीर के 3 अंग पिता की दें है और 3 अंग माता की दें है, हड्डीया, अस्थि मज्जा, नाखून, केश मस्तिष्क ये पिता के अंग है और जो हमारी रगों मे खून बहता है, मस्तिष्क मे जो भेजा है वो माँ का है ।
बहुत बार हम माता पिता को कह देते है की आपने हमारे लिए किया ही क्या है, ये बोलते समय एक बार सोचना की बिना हड्डी के शरीर, खून का एक एक कतरा कितना अमूल्य है, अपने आप को कितना भी बुद्धिमान समझ लो लेकिन ये जरूर ध्यान रखना की ये जो दिमाग है वो माँ की ही दिया हुआ है ।
हमारे लिए दिन भर दुआएं करने वाले हमारे माँ बाप होते है, शाम को जब घर पँहुचो तो उनके पास कुछ समय बिताओ उनका हाल चाल जानो, माँ बाप को आपके पैसे नहीं चाहिए आपकी परवाह चाहिए कभी भी इतने बड़े मत बन जाना की माँ बाप छोटे लागने लगे । मातृ देवो भाव पितृ देवो भव ये भारतवर्ष की संस्कृति है ।
भगवान महावीर जब गर्भ में थे तब उन्होने अपने ज्ञान से जाना की उनके हिलन चलन से माता की कष्ट होता है तो उन्होने गर्भ मे हिलना डुलना बंद कर दिया इससे माता आशंकित होकर और ज्यादा दुखी हो गई, जब भगवान ने पुन: हिलना डुलना प्रारम्भ किया और तभी यह संकल्प ले लिए की जब तक माता पिता संसार मे रहेंगे तब तक उनकी सेवा करूंगा और सन्यास नहीं लूँगा ।
सम्राट अशोक के 9 वर्षीय पुत्र कुनाल को सोतेली माँ ने षडयंत्र पूर्वक सम्राट अशोक का पत्र पहुचाया की अपनी दोनों आंखे फोड़ लो, कुनाल ने पिता की आज्ञा को शिरोधार्य करते हुए अपनी दोनों आंखे फोड़ ली, ऐसी संस्कारो की भारतीय संस्कृति की विरासत हमे प्राप्त हुई है, यदि विरासत में खजाना मिल जाए और उसे बर्बाद कर दे तो ये सबसे बड़ी बदकिस्मती है ।
आजकल इंसान पूरी दुनिया की सुन लेता है लेकिन अपने माँ बाप की नहीं सुनता है । माँ बाप के साथ होना सबसे बड़ा सौभाग्य है और साथ रहते हुए माँ बाप को बोझ समझना सबसे बड़ा दुर्भाग्य है । इस सौभाग्य को दुर्भाग्य मे बदलने वाला जि़ंदगी मे इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाता है ।
हर खुशी है लोगो के दामन मे पर हंसने के लिए वक्त नहीं, दिन रात दौड़ती इस दुनिया मे खुद के लिए वक्त नहीं, आंखो मे नींद तो बहुत है लेकिन सोने के लिए वक्त नहीं, दिल जख्मों से भरा पड़ा है लेकिन रोने के लिए वक्त नहीं है, माँ की ममता का अहसास तो है पर माँ से बात करने का वक्त नहीं है, तू ही बता ए जि़ंदगी एसी जि़ंदगी का क्या जिसमे हर पल मरने वालों के पास भी मरने के लिए वक्त नहीं है । महाभारत युद्ध के वक्त अर्जुन और दुर्योधन श्रीकृष्ण के पास सहायता मांगने पहुचे, अर्जुन ने निहत्थे श्री कृष्ण को चुना और दुर्योधन ने उनकी विशाल सेना को, परिणाम सबके सामने है, जि़ंदगी मे जब कभी माँ बाप या माँ बाप की दौलत मे से कोई एक चुनने का मौका आए तो अर्जुन की तरह बनना और माँ बाप को ही चुनना विजयश्री निश्चित है ।
शांतुन ब्राहमण और ज्ञानमति के घर बालक ने जन्म लिया, नाम रखा श्रवण कुमार, माँ बाप नेत्रहीन थे, लेकिन श्रवण कुमार उनकी बहुत सेवा करता था, बुढ़ापे में जब माता पिता ने तीर्थ दर्शन की इच्छा प्रकट की तो श्रवण कुमार ये नहीं बोला की आपको तो दिखता ही नहीं है तीर्थ दर्शन कैसे करोगे, माँ बाप ने कहा इच्छा तो है लेकिन पैरो मे ताकत नहीं है, श्रवण कुमार बोला आप इसकी चिंता मत करो आप बस चलने की तैयारी करो । श्रवण कुमार कोई संत, तपस्वी, साधक नहीं था, वो केवल माँ बाप की भक्ति करता था, लेकिन उसे युगो युगो तक आज भी याद किया जाता है, जि़ंदगी मे जब भी मौका मिले श्रवण कुमार की तरह बनो ।
संघ अध्यक्ष सुरेश कटारिया ने बताया की गुरुदेव के मुखारविंद से श्रवण कुमार चारित्र पर आधारित 4 दिवस शिविर प्रवचन माला का आयोजन आज दिनांक 18 से 21 मार्च तक रहेगा, बहुत ही करुणामय प्रवचन के द्वारा गुरुजी द्वारा समझाइश दी जा रही है, प्रवचन में बच्चे भी बड़ी संख्या मे उपस्थित थे । बच्चो के उत्साह वर्धन के लिए लक्की ड्रा निकले गए जिसमे जैना श्रीश्रीमल, भवी पोखरना और अनमोल पटवा का ड्रा खुला, इस पारिवारिक और आज के समय मे प्रासंगिक प्रवचनमाला का नगरवासी अधिक से अधिक लाभ लेवे ।

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