




(मुकेश आर. कंकु चौपड़ा, प्रचार प्रसार समिति रजत महोत्सव)
गढ़ सिवाना । दादा जिनकुशल सूरीजी की जन्मस्थली गढ़ सिवाना नगर की पुण्यभूमि चम्पावाड़ी एक बार फिर इतिहास की साक्षी बनी, जब श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ श्री चम्पाश्रीजी स्मारक ट्रस्ट के तत्वावधान में सीमंधर स्वामी जिनालय, दादावाड़ी एवं गुरुमंदिर की प्रतिष्ठा की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित पंचदिवसीय रजत जयंती महोत्सव (17 से 21 जनवरी) अत्यंत भव्यता, आध्यात्मिक गरिमा एवं जनसहभागिता के साथ सम्पन्न हुआ।
खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रसूरीश्वरजी म.सा. की पावन निश्रा तथा प.पू. धवल यशस्वी साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी म.सा., पू. विदुषी साध्वीवर्या डॉ. श्री सौम्यगुणाश्रीजी म.सा., साध्वी श्री श्रुतदर्शनाश्रीजी म.सा., साध्वी श्री विश्वज्योतिश्रीजी म.सा. आदि साधु – साध्वीजी ठाणा के सान्निध्य में यह आयोजन आस्था से अनुष्ठान और भक्ति से भावुकता की अनुपम मिसाल बना।
ट्रस्ट अध्यक्ष वंशराज भंसाली ने बताया कि यह रजत जयंती महोत्सव न केवल धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि जिनशासन, संस्कृति और समाज को जोड़ने वाला महापर्व सिद्ध हुआ, जिसमें नगर सहित देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर इसे महामहोत्सव की गरिमा प्रदान की।
प्रथम दिवस : धर्म, भक्ति और संगीत का शुभारंभ
महोत्सव का शुभारंभ गुरु भगवंतों के मंगल प्रवेश, श्री महाविदेह नगरी , श्री शालीभद्र नगरी भोजन खंड , श्री कुशल कान्ति नगरी , श्री चम्पानगरी के उद्घाटन, श्री सन्तिकरम अभिषेक, कुंभ स्थापना,अखंड दीपक स्थापना, ज्वारारोपण , क्षेत्रपाल पूजन, दश दिगपाल पूजन , नवग्रह पूजन , अष्ट मंगल पाटला पूजन एवं प्रवचनों के साथ हुआ। गुरुभगवंत के प्रवचन , विश स्थानक पूजन , श्री आदिनाथ पंच कल्याणक पूजन , कुमारपाल महाराजा के परिवेश में आरती व परमात्मा भक्ति के साथ प्रारंभ हुआ ।
प्रथम दिवस संगीतकार राजीव कानुंगा मुंबई के निर्देशन में अनिल सालेचा , यशराज मुंबई , दर्शित गादिया – झालना , अंकित लोढ़ा रायपुर व जागृति वड़ेरा ने प्रभु व गुरु भक्ति की धूम मचाई ।
द्वितीय दिवस : गांव सांझी व धार्मिक गरबा और सामूहिक आस्था
द्वितीय दिवस 18 जनवरी को प्रातः नमिऊण स्तोत्र द्वारा अभिषेक व स्नात्र पूजा, श्री सीमंधरस्वामीजी अठारह अभिषेक पूजन, गुरुभगवंत प्रवचन , गांव सांझी एवं धार्मिक गरबा का आयोजन हुआ, जिसमें लोगों का उत्साह चरम सीमा पर नजर आया । गांव सांझी एवं धार्मिक गरबा में पायल राणावत, मुंबई व झरना वोरा अहमदाबाद माहौल को भक्तिमय बनाया व श्राविकाओं ने हृदय के भावों के साथ प्रस्तुतियां पेश की ।
तृतीय दिवस : भक्ति, साधना और उल्लास
महोत्सव के तृतीय दिवस श्रद्धा-भक्ति से सम्पन्न भक्ति, साधना एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में कार्यक्रम प्रारंभ हुआ व खरतगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रसूरीश्वरजी म.सा. के पावन सान्निध्य एवं साधु-साध्वीजी भगवंतों की प्रेरणामयी उपस्थिति में प्रातः विभिन्न शक्रस्तव अभिषेक व स्नात्र पूजा का आयोजन हुआ व दोपहर को दादा गुरुदेव महापूजन का भव्य आयोजन हुआ जिसमें 111 सजोडो के साथ सैकड़ों गुरु भक्तों ने लाभ लिया । दोपहर मेहंदी रस्म का आयोजन हुआ जिसमें जोधपुर की कंठ कोकिला खुशबू कुम्भट व लिप्सा जैन ने अद्भुत प्रस्तुतियां पेश की व सैकड़ों महिलाएं ” मेहंदी राचण लागी प्रभु तारा नाम री ” गीत पर झूमती हुई नजर आई । संध्या काल में परमात्मा भक्ति एवं आरती के कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। तृतीय दिवस परमात्मा भक्ति में इंदौर से शरीक हुए सुविख्यात संगीतकार लवेश बुरड़ व हिमांशु बुरड़ की जुगल बंधी ने परमात्मा भक्ति व गुरु भक्ति का अनोखा समा बांधा व उपस्थित जनमेदनी भक्ति भावो के साथ झूमने लगी । जैसे जैसे महोत्सव आगे बढ़ रहा था वैसे भक्तों की संख्या में भी वृद्धि हुई व धर्ममय वातावरण से माहौल सराबोर रहा और श्रद्धालुओं ने उत्साह व उमंग के साथ सभी ने प्रभु व गुरुदेव का आशीर्वाद अर्जित किया।
चतुर्थ दिवस : भव्य वरघोड़ा व बहु सम्मेलन
महोत्सव के चतुर्थ दिवस प्रभात से ही लोगों में उत्साह व उमंग नजर आ रहा था दिन की शुरुआत जयतिहुएण स्तोत्र अभिषेक व स्नात्र पूजा से हुआ व नाश्ते के पश्चात परमात्मा का भव्यातिभव्य वरघोड़ा चम्पावाड़ी मन्दिर से प्रारम्भ हुआ जो नगर के हाई स्कूल के आगे से होते हुए नयापुरा , सदर बाजार , श्री गोड़ी पार्श्वनाथ मंदिर , श्री उम्मेदपुरा मंदिर , श्री हनवंतपूरा मंदिर आदि विभिन्न नगर के मंदिरों व दादावाड़ी के दर्शन करते हुए राजमार्गो से पुनः चम्पावाड़ी मन्दिर पंहुचा । वरघोड़े दरम्यान इंद्रध्वजा, गजराज , घोड़े , परमात्मा का भव्यातिभव्य सुसज्जित रथ, सीमंधरस्वामीजी के तस्वीर, दादा गुरुदेव तस्वीर व गुरूवर्या चम्पाश्रीजी की तस्वीर की भव्य बग्गियों के साथ गुरुदेव की पालकी कार्यक्रम का आकर्षण बढ़ा रही थी वहीं शिव संपत बैंड , वीरमगाम के शहनाई वादक , नासिक ढोल , भटिंडा पंजाब के बैंड माहौल को संगीतमय बनाते हुए नजर आए । वरघोड़े में कच्छी घोड़ी व मोटू पतलू भी आकर्षण का केंद्र रहे ।
वरघोड़े में लोग प्रभु भक्ति व गुरु भक्ति में थिरकते हुए नजर आए । बीच बीच में श्रद्धालुओं ने परमात्मा को अक्षत से बधाया व महोत्सव के निश्रा प्रदाता खरतगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रसूरीश्वरजी म.सा. आदि साधू साध्वीजी के सामेया भी किए । दोपहर 2 बजे गृहलक्ष्मी कुल की रौनक , बहु सम्मेलन का विशेष रूप से सामाजिक आयोजन हुआ जिसमें लगभग 800 नगर की बहुओं ने भाग लिया सभी बहुओं को ट्रस्ट द्वारा बहुमान स्वरूप एक ही कलर की साड़ी अर्पित की गई जिनको पहनकर सभी बहुएं सिवाना की शान लग रही थी बहु सम्मेलन के लाभार्थी परिवार के निवास से सभी बहुएं रवाना हुई व आशापुरा मंदिर से स्वागत यात्रा प्रारंभ हुई जो महाविदेह नगरी पहुंची जहां पर लाभार्थी परिवार के साथ सभी बहुओं का स्वागत पुष्पवृष्टि से हुआ व लाभार्थी परिवार की बहुओं ने सुंदर नृत्य की प्रस्तुति से सभी का स्वागत किया व कार्यक्रम में इंदौर से विशेष रूप से आमन्त्रित लिवांशी सुराणा व जोधपुर से लक्ष्मी खंडेलवाल ने बहुत ही मनमोहक प्रस्तुतियां पेश कर सभी बहुओं का दिल जीत लिया व परिवार में बहु की महत्ता के बारे में प्रकाश डाला । महिला विंग की सदस्यों ने भी बहुत ही मनभावन नृत्य पेश कर कार्यक्रम में चार चांद लगाए । बहु सम्मेलन के अंत में संगीतकार राजीव कानुंगा ने लाभार्थी परिवार की मातृ वंदना का अनूठा कार्यक्रम पेश किया जिससे उपस्थित जनमेदनी भावुक हो उठी व सभी ने अपने माता पिता को भावो से वंदन किया । कुमारपाल महाराजा के परिवेश में आरती का नजारा दिल को छूने जैसा रहा वही आज की परमात्मा भक्ति अदभुत, अद्वितीय, अलौकिक रही सुविख्यात संगीतकार जैनम वारिया व पारस गड़ा ने ऐसा समा बांधा कि लोग भाव विभोर हों गए भक्तजनों ने भावो के साथ गिरनार व सिद्धाचल तीर्थ की यात्रा कर भक्ति का आनंद लिया ।
पंचम दिवस : आध्यात्मिक उत्कर्ष व गरिमामय समापन
रजत जयंती पंचदिवसीय महोत्सव का दिनांक 21 जनवरी को पंचम एवं अंतिम दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। रजत जयंती महोत्सव खरतरगच्छाधिपति आचार्य भगवंत श्री जिनमणिप्रसूरीश्वरजी म.सा. आदि साधु साध्वीजी की पावन निश्रा एवं प.पू. पदम् विभूषिता गुरुवर्या श्री चम्पाश्रीजी म.सा. के दिव्य आशीर्वाद से ऐतिहासिक, आध्यात्मिक एवं स्मरणीय बना व खरतरगच्छाधिपति आचार्य प्रवर ने सभी धर्मप्रेमियों को जिनशासन सेवा हेतु प्रेरित किया । सिवाना नंदन गणिवर्य मेहुलप्रभ सागरजी ने भी धर्मसभा को संबोधित करते हुए गुरूवर्या चम्पाश्रीजी के उपकारों पर प्रकाश डाला ।
धर्मसभा दरम्यान चम्पावाड़ी के अध्यक्ष वंशराजजी संघवी को चम्पावाड़ी ट्रस्ट में 25 वर्षों से अनवरत अध्यक्ष के रूप में सेवाएं प्रदान करने व जिनशासन सेवा में सुकृत कार्य हेतु आचार्य प्रवर ने संघ गौरव पद से विभूषित किया व अभिनन्दन पत्र प्रदान किया वही शासन गौरव मुकेश आर. चौपड़ा को भी शासन के व रजत महोत्सव के उत्कृष्ट कार्य करने हेतु ट्रस्ट द्वारा बहुमान कर अभिनन्दन पत्र अर्पित किया ।
महोत्सव के पंचम दिवस का शुभारंभ प्रातः 8.00 बजे श्री चम्पावाड़ी जिन मंदिर में उवग्गहरम अभिषेक एवं स्नात्र पूजा के साथ हुआ। इसके पश्चात 8.30 बजे शाही करबा नाश्ते का आयोजन श्री शालीभद्र नगरी भोजन खंड में किया गया। 8.45 बजे श्री चम्पावाड़ी जिन मंदिर में विधिपूर्वक श्री सत्तरभेदी पूजा संपन्न हुई। सुबह 10 बजे श्री महाविदेह नगरी में संयम वंदनावली का भावपूर्ण आयोजन किया गया। यह आयोजन सा. श्री नूतनप्रियाश्रीजी म.सा., सा. श्री मधुरप्रियाश्रीजी म.सा. एवं सा. श्री चारित्रप्रियाश्रीजी म.सा. के रजत संयम वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ, जिसमें साध्वीवृंद के प्रति संघजन ने श्रद्धा एवं कृतज्ञता व्यक्त की। दोपहर 11.30 बजे से सूर्यास्त तक बड़ी नवकारशी का आयोजन श्री शालीभद्र नगरी भोजन खंड में हुआ । मध्याह्न 12.39 बजे श्री सीमंधरस्वामी जिन मंदिर, श्री दादागुरुदेव एवं गुरुवर्या श्री चम्पाश्रीजी म.सा. के गुरु मंदिर में विधिविधान से ध्वजारोहण संपन्न हुआ। दोपहर 2.30 बजे श्री कुशल–कान्ति नगरी, चम्पावाड़ी परिसर में शांति स्नात्र महापूजन अत्यंत भक्ति भाव से संपन्न हुआ। सायं 7.00 बजे श्री चम्पावाड़ी जिन मंदिर में कुमारपाल महाराजा के परिसर में परमात्मा की आरती एवं संध्या भक्ति का आयोजन किया गया। रात्रि 8.00 बजे श्री महाविदेह नगरी में परमात्मा भक्ति में भरत ओसवाल ने भक्ति की धूम मचाई व महोत्सव का आध्यात्मिक समापन हुआ।
सहयोग, समर्पण और सफलता की कहानी
कार्यक्रम को स्वर्णिम व ऐतिहासिक बनाने में सहयोग प्रदान करने वाले संयोजक समिति , भोजन व्यवस्था समिति , यातायात समिति , मंगल गृह समिति , बहुमान व मंच समिति , वेयावच्छ समिति , प्रचार प्रसार समिति , वित्त समिति , साज सज्जावट समिति , पूछताश समिति , स्वागत समिति , महिला विंग समिति आदि विभिन्न समितियों का अभिनन्दन व सराहना ट्रस्ट मंडल द्वारा की गई। कार्यक्रम दरम्यान प्रतिदिन सुंदर गंहुली रचना , रंग बिरंगी रंगोली , फूलों की सजावट माहौल को भव्य बना रही थी । प्रतिदिन परमात्मा की नयनरम्य आंगी भक्तों को भगवान की ओर खींच रही थी ।
महोत्सव दरम्यान विभिन्न चढ़ावों द्वारा लाभ लेने वाले पुण्यशालियों का बहुमान किया गया । महोत्सव दरम्यान विभिन्न पूजा अनुष्ठानों में शुद्ध विधिविधान विधिकारक अरविन्दभाई चोरड़िया इंदौर वालो ने किया ।
22 जनवरी को प्रातः भगवान के मंदिरजी का द्वार उदघाटन किया गया ।
पंच दिवसीय महोत्सव में मंच संचालन मुकेश आर. चोपड़ा व ऐंकर दिनेश शर्मा आहोर ने किया। कार्यक्रम दरम्यान सिवाना विधानसभा के विधायक श्री हमीरसिंहजी भायल , प्रधान मुकनसिंहजी , बाड़मेर से पधारे रुमादेवी आदि का बहुमान किया गया ।
इस भव्य आयोजन का सफल आयोजन श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ श्री चम्पाश्रीजी स्मारक ट्रस्ट, गढ़सिवाना द्वारा किया गया।
ट्रस्ट पदाधिकारियों ने समस्त समाजजनों, श्रावक–श्राविकाओं एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन विविध धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का क्रम निरंतर जारी रहा जिसमें नगर सहित आस-पास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में सहभागी बने ।
महोत्सव को सफल एवं ऐतिहासिक बनाने में ट्रस्ट मंडल, कार्यकारिणी सदस्यगण एवं रजत जयंती महोत्सव समिति का विभिन्न समितियों के साथ निरंतर समन्वय, सक्रिय सहयोग एवं उपस्थिति रही। इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष संघवी श्री वंशराज भंसाली, उपाध्यक्ष श्री बाबूलाल भंसाली, सचिव श्री भूरचंद जीरावला, कोषाध्यक्ष श्री बाबूलाल तातेड़, सहसचिव श्री डूंगरचंद गणधर चौपड़ा, ट्रस्टी श्री घेवरचंद धारीवाल, श्री रायचंद छाजेड़, संघवी श्री माणकचन्द ललवाणी, श्री महेन्द्रकुमार छाजेड़, श्री प्रकाशकुमार कंकु चौपड़ा एवं श्री विरमचंद बोकडिया सदैव उपस्थित रहकर आयोजन को दिशा प्रदान करते रहे।
इसी क्रम में कार्यकारिणी सदस्यगण संघवी श्री अशोककुमार भंसाली, श्री सांकलचंद जीरावला, श्री जेठमल कवाड़, श्री पुखराज तातेड़, श्री झणकारमल कंकुचौपड़ा, श्री नरेन्द्रकुमार संकलेचा, श्री गौतमकुमार धारीवाल, श्री जयंतीलाल गणधरचोपड़ा, श्री धनराज संकलेचा, श्री सुरेशकुमार ललवाणी, श्री हरिशकुमार गुलेच्छा, श्री लालचंद रांका, श्री बाबूलाल छाजेड़ एवं श्री महेन्द्रकुमार भंसाली का समर्पित सहयोग आयोजन की सफलता का आधार बना।
रजत जयंती महोत्सव समिति के संयोजक श्री बाबूलाल भंसाली एवं सह-संयोजकगण श्री भुरचंद जीरावला, श्री बाबूलाल तातेड़, श्री झणकारमल कंकुचौपड़ा तथा श्री अरुणकुमार ललवाणी ने विभिन्न समितियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करते हुए महोत्सव को सुव्यवस्थित, भव्य एवं स्मरणीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपरोक्त जानकारी प्रचार प्रसार समिति के मुकेश आर. कंकु चौपड़ा ने प्रेस विज्ञप्ति में जारी की ।