

रतलाम। व्यक्ति को मानव जीवन में कर्तव्य का पालन करना चाहिए तथा धर्म व यज्ञ करना चाहिए। भारत देश का नामकरण महान राजा भरत के नाम पर हुआ है इसके पहले भारत देश का नाम अजनार हुआ करता था। यह बात सैलाना बस स्टैंड क्षेत्र स्थित अखंड ज्ञान आश्रम में अनंत श्री विभूषित आचार्य महामंडलेश्वर चित्रकूट पीठाधीश्वर डॉ स्वामी दिव्यानंद महाराज की निश्रा में श्री स्वामी स्वरूपानंद जी महाराज के तृतीय निर्वाण दिवस पर आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के दौरान कथा व्यास स्वामी देव स्वरूपानंद महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहीं। उन्होंने कहा कि राजा भरत अपनी प्रजा का पालन पुत्रवत करते थे तथा निष्काम भाव से धर्म, यज्ञ व सेवा कार्य करते थे। उन्होंने कभी भी कोई कार्य सकाम भाव से नहीं किया तथा एक करोड़ वर्ष तक पृथ्वी पर शासन किया उसके बाद अपना राज्य आदि पुत्रादि को देकर नेपाल देश स्थित गंडकी नदी के किनारे भगवत आराधना में लग गए, उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों पर कहां की जब घर में बच्चे कमाने लगे व बहु घर संभाल ले तो व्यक्ति को घर के कार्यों में हस्तक्षेप बंद कर देना चाहिए तो मानव का ग्रहस्थ जीवन प्रसन्नता से गुजरेगा । हमें भगवान की साधना आराधना प्रेम से करना चाहिए यह हमारी परंपरा है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को मनुष्य जन्म बार-बार नहीं मिलता है इसलिए व्यक्ति को मनुष्य जीवन में सब कम करना चाहिए जो राजा भगवान की पूजा अर्चना कर राज कार्य करता हैउसकी प्रजा का भी उद्धार हो जाता है। उन्होंने कहा कि नाभि के पुत्र ऋषभदेव जी थे ऋषभदेव के सो पुत्र हुए थे पिता के धर्म से ही पुत्र आगे बढ़ते हैं। इस अवसर पर हरिद्वार से आए हरिहरानंद दंडी स्वामी ने गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो राधा रमन हरि गोविंद बोलो.. भजन सुमधुर स्वर में प्रस्तुत किया व कहा कि परमात्मा के अनेक रूप तथा नाम है भगवान के 24 अवतार हुए हैं उनमें से मुख्य रूप से राम अवतार व कृष्ण अवतार है परमात्मा एक ही है किंतु उसके रूप अनेक है भगवान विष्णु व्यापक है जो उनकी भक्ति करता है भगवान विष्णु उनकी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं ।
कथा जजमान श्रीमती शकुंतला पांडे ,कुमारी ललिता पांडे, प्रफुल पांडे ने पोथी पूजन किया अंत में आरती कर प्रसादी वितरित की गई इस अवसर पर मुन्नी देवी ,मनोरमा देवी ,सुशीला बाई ,शारदा बहन राठौर, मंगला देवी, केसर देवी चौहान, साधना तंवर, गोविंद कुमार सहित श्रद्धालु मौजूद थे।