अभियोक्त्री को अपने घर में बुलाकर दुष्कर्म करने एवं गर्भवती करने वाले आरोपी को 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं अर्थदण्ड से दण्डित किया

रतलाम । थाना औ.क्षे. रतलाम के चिन्हित श्रेणी के अपराध क्रमांक 790/2022 एससी एटीआर क्रमांक 03/2023 मे माननीय न्यायालय श्रीमान (राकेश कुमार शर्मा) विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट रतलाम (म.प्र.) के द्वारा निर्णय दिनांक 28.01.2026 को अभियुक्त अजीम उर्फ राजु पिता राजा मंसूरी उम्र 25 वर्ष निवासी प्रोढ शिक्षा गारंटी स्कुल के पीछे डीजल शेड रतलाम थाना औ.क्षे. रतलाम जिला रतलाम (म.प्र.) को धारा 376 (2)(एन) में 10 वर्ष का सश्रम कारवास एवं 5,000/- रूपये अर्थदण्ड एवं धारा 342 भादवि में 01 वर्ष का सश्रम कारवास 1000/- रूपये अर्थदण्ड से दण्डित किया एवं अपराध से होने वाले संभावित मानसिक व शारीरिक आद्यात की प्रतिपूर्ति के लिए पॉक्सो एक्ट की धारा 33(8) के तहत, अभियुक्त से प्राप्त अर्थदण्ड की सम्पूर्ण राशि व उसके अतिरिक्त 3,00,000/-(अंकन तीन लाख रूपए ) प्रतिकर देने का आदेश दिया । उक्त अपराध में सह अभियुक्तगण करीम उर्फ समीर पिता राजा मंसुरी उम्र 22 वर्ष एवं रसीदा पति राजामंसुरी उम्र 45 वर्ष को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त किया गया।
प्रकरण में प्रभारी सहा. निदेशक अभियोजन अधिकारी श्री योगेश कुमार तिवारी ने बताया कि अभियोक्त्री ने दिनांक 02.11.2022 को औ.क्षे. रतलाम में पर उपस्थित होकर रिपोर्ट की कि मैं कक्षा 05 वी तक पढी लिखी हूँ। हम चार भाई बहन है जिसमें मैं छोटी हूँ मैं आरोपी अंजीम उर्फ राजु पिता राजा जाति मुसलमान कोे 09 महीने पुर्व से ही मैं अजिम मंसुरी को जानती हूँ मेरे घर के सभी सदस्य मजदूरी करने के लिये रोज बहार जाते है। आज से करीब 8 महिने पुर्व दिनाक 28.02.22 को मैं घर पर अकेली थी तभी सुबह 10 बजे करीब अजिम मसुरी मेरे घर आया व बोला कि मेरी मम्मी तुम्हे मेरे घर पर बुला रही है तब मैं उसके घर पर गई तो उसकी मम्मी घर पर नहीं थी तो वह बोला कि अभी दुकान गई है आती होगी तो वो मुझे बोला कि मैं तुम्हे पसंद करता हूँ ऐसा बोलकर अजिम मुझे उसके कमरे में लेकर गया व मेरे साथ मेरी मर्जी के बिना गलत काम किया व बोला कि किसी को यह बात बताई तो तुम्हे जान से खत्म कर दूंगा व तुम्हारी सब जगह बदनामी कर दूंगा। अजीम उसके भाई करीम उर्फ समीर को भी मुझे बुलाने के लिये भेजता था। करीम ने भी मुझे उसके घर पर 23 बार बुलाया था में करीम के घर जाती तो करीम मुझे अजीम के पास छोडकर कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर देता था। करीम ने मेरे साथ कभी गलत काम नहीं किया । अजीम ने मेरे साथ कई बार उसके घर पर डरा धमकाकर मेरी इक्छा के विरुद्ध मेरे साथ गलत काम (बलात्कार) किया। में अजीम को मना करती तो वह मुझे मेरे पिता को जान से मारने की धमकी देता था। अजिम मुझे बोलता था कि तू मेरी बात नहीं मानेगी तो में तेरे बाप को जो रोज दारू के नशे में रहता है उसे कभी भी मरवा दुगा। मैं उसके डर से कभी किसी को कोई बात नहीं बतायी। में सुबह लेटिंªग करने के लिये रेल्वे ट्रैक पर जाती थी वहा पर भी अजीम उर्फ राजू ने कई बार गलत काम किया था। मेरी बड़ी बहन ने मुझसे कहा की तेरा पेट क्यो बाहर आ रहा है। मैने कहा की मेरे पैट में पानी भर रहा है तो मेरी बहन पूजा मुझे चार पांच दिन पहले सरकारी अस्पताल ले गई वहाँ पर डाक्टर ने बताया की में पेट से हूँ। घर पर आकर मेने हिम्मत करके पुरी बात मेरी बहन ‘‘पू‘‘ और ‘‘ने‘‘ और मेरी मम्मी को बतायी। मेरी बहन ‘‘पू‘‘ ने अजीम की माँ को पुरी बात बतायी और कहा की मेरी बहन का ईलाज करा दो तो अजीम की माँ ने कहा की हम ईलाज नही करायेगे। डर के कारण यह बात हमारे पापा को नहीं बता रहे थे, फिर हिम्मत करके मेरी बहन ‘‘पू‘‘ ने यह बात दिनाक 31/10/22 को पापा को बतायी। जिस पर मेरे पापा और मम्मी ने कल रात में उसके माता पिता से इस बारे में बातचित की तो उसके भाई करीम व उसकी माँ रसीदा ने मेरे मम्मी पापा को माँ बहन की गालीया दी और जान से मारने की धमकी दी और कहा की हम इसका ईलाज नहीं करायेगे जो तुमसे जो हो कर लेना। आज मैं मेरे मम्मी पापा के साथ थाने पर आयी हूँ।
फरियादीया/अभियोक्त्री की रिपोर्ट पर से थाना औद्योगिक क्षेत्र रतलाम पर अपराध क्रमांक 790/2022 धारा 376, 376(3), 376(2)एन,376(डी),342, 294, 506 भारतीय दण्ड विधान व, 5एल/6,5j(ii)/6 पॉक्सो एक्ट एवं 3(2)(v),3(1)(wi),3(1)r,.3(2)(va) अनुसुचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1889 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट लेखबद्ध की जाकर प्रकरण विवेचना में लिया गया।
विवेचना के दौरान अभियोक्त्री का मेडिकल परीक्षण, कथन गवाहन आरोपी को गिरफ्तार कर, मेडीकल एवं अन्य विवचेना उपरांत आरोपी के विरूद्ध धारा 376, 376(3), 376(2)एन,376(डी),342, 294, 506 भारतीय दण्ड विधान व, 5एल/6,5j(ii)/6 पॉक्सो एक्ट एवं 3(2)(v),3(1)(wi),3(1)r,3(2)(va) अनुसुचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1889 का अभियोग पत्र माननीय विशेष न्यायालय पॉक्सों एक्ट में प्रस्तुत किया गया।
विचारण उपरांत माननीय विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट रतलाम द्वारा अपने निर्णय दिनांक 28.01.2026 को अभियोजन की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजी, मौखिक साक्ष्य एवं डीएनए रिपोर्ट के आधार के आधार पर अभियुक्त को अजीम को अभियोक्त्री के बच्चे का जैविक पिता मानते हुए अभियुक्त को बलात्कार एवं अभियोक्त्री को सदोष परिरोध करने के अपराध में दोषसिद्ध किया गया।
उक्त प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी श्रीमती गौतम परमार विशेष लोक अभियोजक रतलाम द्वारा की गई।

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