भारत सरकार द्वारा लागू काले कानून यूजीसी के विरोध में प्रतीकात्मक फांसी के फंदे बनाकर कायस्थ समाज ने टॉवर चौक पर प्रदर्शन किया, प्रधानमंत्री के नाम तरफे कलेक्टर को दिया ज्ञापन


उज्जैन । भारत सरकार द्वारा उच्च शिक्षा में यूजीसी एक्ट लागू किया गया है उसके विरोध में सवर्ण समाज के आव्हान पर रविवार को उज्जैन कायस्थ समाज एवं अखिल भारतीय कायस्थ महासभा मध्यभारत जिला इकाई द्वारा टॉवर चौक पर विरोध प्रदर्शन करते हुए बच्चों को गले में प्रतीकात्मक फांसी का फंदा डालकर एक अनूठा तरीका अपनाया जिससे वहां से निकलने वाला हर व्यक्ति का मन द्रवित हो उठा । महिलाओं ने और बच्चों ने एक स्वर में कहा कि यूजीसी एक्ट सामान्य वर्ग के बच्चों के लिए एक तरह फांसी का फंदा ही है यदि सरकार ने यह एक्ट नहीं हटाया तो वह कायस्थ समाज के बच्चों को आत्म हत्या करने पर मजबूर करेगी । अखिल भारतीय कायस्थ महासभा मध्यभारत के नेतृत्व में सवर्ण समाज के आव्हान पर यह विरोध प्रदर्शन था जिसमें सवर्ण समाज के पदाधिकारियों का भी समर्थन मिला ।
उज्जैन कायस्थ समाज अध्यक्ष दिनेश श्रीवास्तव ने बताया कि यूजीसी एक्ट के खिलाफ टावर चौक फ्रीगंज उज्जैन पर एक अनूठा विरोध प्रदर्शन किया गया जिसमें समाज के बच्चों द्वारा प्रतीकात्मक फांसी का फंदा बनाकर विरोध प्रकट किया गया । सामूहिक रूप से सबने कहा कि अगर यूजीसी कानून लागू होता है तो समाज के बच्चों के लिए यह एक तरह का फांसी का फंदा ही है । इस अवसर पर सवर्ण समाज के भी लोगों का समर्थन मिला कायस्थ समाज को मिला ।
यूजीसी एक्ट भेदभाव के साथ देश की शिक्षा पर आघात है …..
कायस्थ समाज के मोतीलाल श्रीवास्तव ने संबोधित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यु.जी.सी) द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन / नए नियम देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था मे गहरी असमानता और भेदभाव उत्पन्न करने वाले है। यह कानून अपने वर्तमान स्वरूप में एक पक्षीय प्रतीत होता है, जिसके कारण विशेष रूप से सवर्ण वर्ग के छात्रों का शैक्षणिक और व्यवसायिक भविष्य बाधित होने की स्थिति बन रही है। शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होना चाहिए ना कि अगड़ा-पिछड़ा के आधार पर किसी एक वर्ग के अधिकारों का हनन कर दूसरे वर्ग के लिए भूमि तैयार करना। भारत का संविधान समानता प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की भावना पर आधारित है। ऐसे मे किसी भी निर्णय समिति का संतुलित बहुवर्गीय और समावेशी होना अनिवार्य है। एक ही जाति वर्ग द्वारा लिए गए निर्णय सवर्ण छात्रों के अधिकारों और विश्वास को प्रभावित करते है।यह देश की शिक्षा पर बहुत बड़ा आघात है।वहीं महेश पुजारी ने कहा कि युजीसी के इस एक पक्षीय एवं सवर्ण छात्रों के विरूद्व प्रभाव डालने वाले काले कानून / ड्राफ्ट रेगुलेशन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।सपाक्स संगठन के अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी ने बोला कि नीति निर्धारण समितियों में सभी सामाजिक वर्गों को संतुलित और पारदर्शी प्रतिनिधित्व किया जाए।
बच्चों के गले में फांसी का फंदा देखा तो रो पड़ी महिलाएं..
कहा सरकार ने बहुत गलत किया ……
समाज के बच्चों के द्वारा जब फांसी का फंदा गले में प्रत्येक आत्मक रूप से डाला गया तो उपस्थित महिलाओं के आंखों में आंसू छलक गए सब महिलाएं बोल उठी सरकार ने हमारे बच्चों के साथ गलत किया अगर यह कानून वापस नहीं लिया तो हमारे बच्चे आत्महत्या करने पर मजबूर होंगे और हम जीते जी हमारे बच्चों को मरते देख नहीं सकते । सीमा निगम , पिंकी श्रीवास्तव , रजनी कुलश्रेष्ठ ने आंसू भरी आंखों से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अति शीघ्र यूजीसी कानून को हटाकर सामान्य वर्ग के बच्चों के साथ किए गए भेदभाव को समाप्त करें यही समाज की उनसे विनती है । यह दृश्य जिसने देखा उसका मन द्रवित हो उठा हर किसी के मन में बच्चों के गले में फांसी का यह फंदा देख सवाल खड़ा कर गया कि आखिर सरकार सामान्य वर्ग के बच्चों के साथ इतना बड़ा अन्य क्यों कर रही है। शशि श्रीवास्तव ने सरकार से मांग है कि छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं राज्य सरकारों से व्यापक संवाद के बाद ही कोई नई नीति लागु की जाए। अन्यथा कायस्थ समाज इसका उग्र विरोध करेगा।
इस अवसर पर श्रीमती चेतना श्रीवास्तव , रजनी कुलश्रेष्ठ,शशि श्रीवास्तव , सीमा निगम ,पिंकी श्रीवास्तव , वर्षा श्रीवास्तव , शिखा माथुर , स्मिता श्रीवास्तव, रवींद्र निगम, रक्षा अष्ठाना , रूपकिशोर कुलश्रेष्ठ, चेतन श्रीवास्तव , देवशरण भटनागर, अर्पित श्रीवास्तव ,आशुतोष गौड,सुनील कुलश्रेष्ठ , जितेंद्र श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव, पीयूष श्रीवास्तव, मृदुल कुलश्रेष्ठ, किरण गौड, दीपिका श्रीवास्तव, मेधा खोपकर , संजय जौहरी,सहित सवर्ण समाज से आदित्य नागर, तरुण उपाध्याय, रूपेश मेहता, संजय रघुवंशी, अशोक दुबे ,आशीष अग्निहोत्री, शैलेश दुबे, चंद्रशेखर दुबे, आरपीएस तोमर, निरुक्त भार्गव, अजेंद्र त्रिवेदी, विनय चौहान आदि ने उपस्थित होकर प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन द्वारा कलेक्टर तरफेे तहसीलदार डीएस गोयल को सौंपा गया ।