श्रीमती कृष्णा देवी रावल के नेत्रदान से दो नेत्रहीनों को मिला आशा का प्रकाश

रतलाम। कहते हैं कि जीवन का अंत भी किसी के लिए नए जीवन की शुरुआत बन सकता है। रतलाम शहर में ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण तब देखने को मिला, जब सेवा और संवेदना के भाव से ओतप्रोत एक परिवार ने अपने दुख को मानवता की सेवा में बदल दिया।
नेत्रदान के क्षेत्र में निरंतर जनजागरूकता का कार्य कर रही नेत्रम संस्था के प्रयासों से राजीव नगर, अलकापुरी निवासी स्व. बालकृष्ण रावल की धर्मपत्नी श्रीमती कृष्णा देवी रावल के निधन उपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान का पुण्य निर्णय लिया। इस महान कार्य से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को नया जीवन और नई दृष्टि मिलने की आशा जगी है।
स्वर्गीय श्रीमती कृष्णा देवी रावल के पुत्र प्रदीप, सतीश, दिनेश एवं देवेंद्र रावल तथा समस्त परिजनों ने पैरालीगल वॉलंटियर नवनीत मेहता की प्रेरणा से यह निर्णय लिया, जो समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।
नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत ने जानकारी देते हुए बताया कि परिजनों की सहमति मिलते ही रतलाम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मुथा को सूचित किया गया। उनके मार्गदर्शन में नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेन्द्र सिसोदिया के नेतृत्व में नर्सिंग ऑफिसर राजवंत सिंह, विनोद कुशवाहा एवं चिकित्सा दल ने नेत्रदान की प्रक्रिया को पूर्ण संवेदनशीलता एवं सम्मान के साथ संपन्न किया।
विशेष उल्लेखनीय यह रहा कि नेत्रदान हेतु मेडिकल टीम को दिवंगत के निवास स्थान तक पहुँचाने एवं पुनः मेडिकल कॉलेज ले जाने की व्यवस्था नेत्रम संस्था के सदस्य सुशील मीनू द्वारा अपने निजी वाहन से की गई, जो सेवा भाव का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इस अवसर पर ओमप्रकाश अग्रवाल, शीतल भंसाली, गिरधारीलाल वर्धानी, सुशील मीनू माथुर, भगवान ढलवानी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे और परिजनों के इस मानवीय निर्णय की सराहना की।
नेत्रम संस्था एवं डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज, शासकीय नेत्र बैंक द्वारा परोपकारी परिवार को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में देहदान एवं नेत्रदान जैसे महादान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए समाज से अधिक से अधिक लोगों को इस पुण्य कार्य से जुड़ने का आह्वान किया गया।
यह प्रेरक घटना यह संदेश देती है कि किसी के जीवन का अंत, यदि सेवा से जुड़ जाए, तो वह अनेक ज़िंदगियों को रोशन कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *