जलज’ स्मृति आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा – डॉ. चांदनीवाला

कविता प्रतियोगिता के विजेता पुरस्कृत हुए

रतलाम। साहित्यकार एवं भाषाविद डॉ. जयकुमार ‘जलज’ के कारण रतलाम का नाम राष्ट्रीय साहित्य जगत में प्रतिष्ठित हुआ है। उनका व्यक्तित्व जितना सरल और सहज था, उनकी साहित्यिक प्रतिभा उतनी ही विराट, बहुआयामी और प्रभावशाली थी। ये विचार वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने डॉ. जयकुमार ‘जलज’ की स्मृति में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए।आयोजन की सहयोगी संस्था राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह पंवार ने जानकारी देते हुए बताया कि विख्यात साहित्यकार एवं भाषाविद डॉ. जयकुमार ‘जलज’ की स्मृति में प्रतिवर्ष उनकी पुण्यतिथि पर “हमारे–अपने जलजजी” शीर्षक से साहित्यिक आयोजन किया जाता है। गत वर्षों में यह आयोजन क्रमशः जलजजी की कविताओं की संगीतमय प्रस्तुति एवं कविता लेखन प्रतियोगिता पर आधारित रहा है।यह साहित्यिक आयोजन आई.एम.ए. हॉल, राजेन्द्र नगर, रतलाम में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. लीला जोशी रहीं, जबकि विशेष अतिथि के रूप में ‘हम लोग’ संस्था के अध्यक्ष सुभाष जैन सहित डॉ पदम घाटे, निर्मल हुम्बड़ मंचासीन रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती एवं डॉ. जलजजी के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। तत्पश्चात डॉ. जलजजी की पुत्रियाँ श्रद्धा घाटे एवं स्मिता हुम्बड़ द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। स्वागत भाषण नरेन्द्रसिंह पंवार ने दिया।मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. लीला जोशी ने अपने उद्बोधन में कहा कि डॉ. जलजजी की स्मृति में इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य के प्रति प्रेरित करेंगे तथा उन्हें रचनात्मक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। डॉ. जलज जैसे साहित्यकारों के कारण रतलाम की पहचान साहित्यिक क्षेत्र में और अधिक सुदृढ़ हुई है।कार्यक्रम के अंतर्गत “डॉ. जलज स्मृति कविता लेखन प्रतियोगिता–2025” के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता दो वर्गों—महाविद्यालयीन एवं ओपन वर्ग—में आयोजित की गई थी। *महाविद्यालयीन वर्ग* मेंप्रथम स्थान – कुमारी रितिका जैन (स्वामी विवेकानंद कॉमर्स कॉलेज, रतलाम)द्वितीय स्थान – श्री अमन बेग (श्री साईं इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रतलाम)तृतीय स्थान – कुमारी सलेहा कुरेशी (शासकीय कन्या महाविद्यालय, रतलाम) *ओपन वर्ग में* प्रथम स्थान – श्रीमती उदय कुंवर पंवार (गोपनील, सहायक मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय, रतलाम)द्वितीय स्थान – डॉ. सुनीता जैन (अतिथि विद्वान, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रतलाम)तृतीय स्थान – डॉ. अर्जुनसिंह पंवार (सहायक प्राध्यापक, शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, रतलाम)दोनों वर्गों में प्रथम पुरस्कार ₹2500, द्वितीय ₹1500 एवं तृतीय ₹1100 नगद राशि के साथ प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में सहभागी कुल 20 प्रतिभागियों को भी प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर डॉ. जलजजी के साहित्यिक अवदान पर आधारित संस्मरण प्रस्तुत किए गए तथा उनकी चयनित कविताओं का सस्वर पाठ किया गया। कविता पाठ में आशीष दशोत्तर ने “उनका क्या होगा”, गायत्री तिवारी ने “बात केवल एक है”, आई.एल. पुरोहित ने “हर द्वार तुम्हारा द्वार” तथा इन्दु सिन्हा ने “बैठ कहीं विश्राम करें” का भावपूर्ण पाठ किया।इसके अतिरिक्त डॉ. जलजजी की स्वयं की आवाज़ में रिकॉर्ड की गई कविता “किसे पता है किस बादल में” तथा मुकेश बनसोडे की कविता “गाओ मन, सूने में रहा नहीं जाता” का श्रवण भी कराया गया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह नरेन्द्र सिंह पंवार और सुभाष जैन ने प्रदान किए।कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, साहित्य-प्रेमी एवं विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आशीष दशोत्तर (अध्यक्ष, वनमाली सृजन केन्द्र, रतलाम) ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. मुनीन्द्र दुबे (अध्यक्ष, स्व. अरुण भार्गव हिन्दी साहित्य सेवा समिति) ने किया।

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