विदाई में भी दी रोशनी” – नेत्रम संस्था के माध्यम से तीन नेत्रदान, छह जीवन में जगी नई आशा

रतलाम। दुःख की घड़ी को मानवता की प्रेरणा में बदलते हुए तीन परिवारों ने नेत्रदान का निर्णय लेकर समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सेवा और संवेदना की पहचान बन चुकी नेत्रम संस्था के समन्वय से ये तीनों नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न हुए, जिससे छह नेत्रहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
शास्त्री नगर निवासी श्रीमती पुष्पा देवी चांदवानी के निधन के पश्चात उनके पुत्र सतीश चांदवानी एवं हरीश चांदवानी ने भगवान ढलवानी की प्रेरणा से नेत्रदान का निर्णय लिया।
देवरा देव नारायण नगर निवासी जगदीश सिंह बघेल के निधन के बाद उनके पुत्र अभिषेक सिंह बघेल ने परिजनों सहित सुशील मीनु माथुर,डॉ अनील शर्मा, दिनेश शर्मा की प्रेरणा से यह महादान किया। ग्राम नलकुई निवासी ईश्वर लाल पाटीदार (भेसोला वाले) के निधन उपरांत उनके पुत्र राजाराम पाटीदार एवं भरतलाल पाटीदार ने धर्मराज पाटीदार (दाँतोड़ा),,पूनमचंद पाटीदार की प्रेरणा से यह पुण्य कार्य संपन्न किया।
परिजनों की सहमति मिलते ही संस्था द्वारा बड़नगर स्थित गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी. एल. ददरवाल को सूचना दी गई और पूरी प्रक्रिया को त्वरित व सम्मानजनक ढंग से पूर्ण किया गया।
नेत्रम संस्था: सेवा, सलाह और सहयोग के लिए 24×7 तत्पर नेत्रम संस्था नेत्रदान के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ 24×7 सेवा एवं मार्गदर्शन परिजनों को भावनात्मक सहयोग चिकित्सकीय समन्वय
पारदर्शी एवं सम्मानजनक प्रक्रिया के माध्यम से समाज में विश्वास का वातावरण निर्मित कर रही है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रमुख जन नेत्रदान प्रक्रिया के दौरान अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं जागरूक नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से हेमन्त मूणत, ओमप्रकाश अग्रवाल, शलभ अग्रवाल, सुशील मीनु माथुर, प्रशांत व्यास, भगवान ढलवानी, भगवान गंगवानी, आयुष शर्मा, राजेश शर्मा, योगेंद्रपाल सिंह, रविन्द्रपाल सिंह, पूनमचंद पाटीदार, अमृतलाल पाटीदार, नानूराम पाटीदार, रामेश्वर पाटीदार, मणिलाल पाटीदार सहित अन्य समाजजन शामिल रहे।
संस्था द्वारा तीनों परोपकारी परिवारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा उनके इस मानवीय योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
नेत्रदान केवल एक निर्णय नहीं, बल्कि किसी के जीवन में स्थायी प्रकाश देने का संकल्प है। आइए, हम भी इस सेवा-यज्ञ से जुड़ें और नेत्रदान को जन-आंदोलन बनाएं।

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