लेखक – प्रो. देवेन्द्र कुमार शर्मा
रतलाम
पिछले काफी समय से युवतियों की हत्याएं और मृत्यु के समाचार बहुत बड़ी संख्या में आने लगे है। किसी न किसी बहाने युवतियों को फंसाया जाता है, उनका शारीरिक शोषण किया जाता है और अंत में उन्हें मार दिया जाता है। आजकल किसी न किसी बहाने लड़कियां अपने घर से दूर किसी अन्य शहर में अकेली रहने लगी है। वहां यह देखने वाला कोई नहीं होता कि उनकी दिनभर की गतिविधि क्या होती है। अधिकतर लड़कियां पढ़ने के लिए किसी अन्य शहर में जाती है वे अकेली रहती हैं इसलिए कोई उनसे पूछने वाला नहीं होता कि वे कब-कहां क्यों जाती हैं। वर्तमान में शिक्षा के लिए अन्य शहर में अब लड़कियों का जाना बहुत आवश्यक हो गया है।
अकेली रहने वाली लड़कियां शातिर तत्वों की आसान शिकार हो जाती हैं. कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब अखबार में किसी युवती की हत्या की खबर न छपी हो। वे आसान शिकार के रूप में शातिर तत्वों को उपलब्ध होती है। कुछ तत्व ऐसे मौजूद रहते हैं जिनका उद्देश्य लड़कियों को अपना शिकार बनाना होता है।
अपने गृहनगर से दूर अन्य शहरों में रहने के अतिरिक्त बड़े शहरों में समस्या बढती जा रही है। बड़े शहरों में घर वालों को पता नहीं चलता कि लड़की कहां गई और किस प्रकार की अनुचित गतिविधि में उलझी हुई है। जब दुष्परिणाम सामने आते है तब घर वालों की आंख खुलती हैं। जब तक आंख खुलती है तब तक बहुत देर हो जाती हैं। परिणामस्वरूप लड़की का जीवन बर्बाद हो जाता है और अधिकतर उनकी हत्या कर दी जाती हैं। वे इतने गलत मार्ग पर चली जाती है कि उचित अनुचित का भान उन्हें नहीं रहता। लड़कियां बहुत आसान शिकार होती है, जब वे अकेली रहती हैं तब बहुत असुरक्षित रहती हैं। मानसिक रूप से भी वे अपने आपको सुरक्षित नहीं रख पाती। मोबाइल आज एक आवश्यकता है किन्तु यही सबसे अधिक हानिकारक हो गया है। मोबाइल पर विभिन्न प्रकार की जानकारियां सोशल मीडिया के नाम पर डाली जाती हैं, छोटे-छोटे बच्चे और बच्चियां उचित-अनुचित में भेद नहीं कर सकती और अनुचित भावनाओं की शिकार हो जाती हैं। शातिर तत्व लड़कियों की भावनात्मक कमजोरी का दुरूपयोग करते हैं। अधिकतर प्रकरणों में लड़कियों के साथ दुराचार होता है और अंत में उन्हें मार दिया जाता है। भावनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील होने के कारण लड़कियां शातिर तत्वों के जाल में फंस जाती है और उनकी शिकार हो जाती हैं। अधिकतर तो उन्हें मार ही दिया जाता है। जो बच जाती है उनका जीवन नष्ट और निरर्थक हो जाता है। समाज में काला मुंह लेकर समय काटना बहुत ही कठिन होता है। लड़कियां स्वयं ही नहीं उनका परिवार भी समाज में अछूत जैसा हो जाता है। लड़कियों को फंसाने का जो अभियान चल रहा है उससे लड़कियों को बचाना भी बहुत आवश्यक है। इसका एकमात्र उपाय माता-पिता की उचित सजगता और लड़कियों को उचित मार्गदर्शन ही हो सकता है।
लव जिहाद का घिनौना षड़यंत्र जिस प्रकार चल रहा है, सभी जानते है। लड़कियों को इनसे बचाना बहुत आवश्यक है। इसके लिए लड़कियों को उचित शिक्षा और मार्गदर्शन दिया जाना बहुत आवश्यक है। अकेले रहने वाली लड़कियों को शराब और सिगरेट पीते हुए देखा जा सकता है। शराब और सिगरेट पीने के बाद विवेक समाप्त हो जाना स्वाभाविक है। एक बार समझदारी गई तो परिणाम अवांछनीय अनुचित होना स्वाभाविक है। इसलिए लड़कियों को यह समझाना बहुत आवश्यक है कि स्वयं पर नियंत्रण रखे और अवांछनीय तत्वों से बचकर रहें। एक बार अवांछनीय शातिर तत्वों के जाल में लड़कियां फंस जाती है तो उसमें से निकलना असंभव होता है। नासमझी और उच्छृखंलता का जो दुःखद परिणाम होता है उससे केवल समझदारी ही बचा सकती है, इसलिए माता-पिता अपनी पुत्रियों को सतर्क और सचेत रहने की शिक्षा दें अन्यथा जो बुरे परिणाम सामने आ रहे हैं उनसे लड़कियों को बचाना संभव नहीं होगा। यदि सजगता से काम नहीं लिया गया तो लड़कियों का जीवन बर्बाद होता रहेगा।