रतलाम । नीमचौक स्थानक, रतलाम पर विषय लोगस्स की महिमा के तृतीय दिन प्रवचनकार आगमज्ञाता डॉ समकित मुनि जी मसा ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि काला धन परेशानी का कारण है लेकिन उससे ज्यादा काला मन परेशानी का कारण है। लोगस्स के पाठ से जीवन निर्माण होता है ।
आरोग्ग बोही लाभं – अच्छी समझ की कामना करना।
समाहिवरम-उत्तम दिन्तु – उत्तम शांति की कामना करना।
चंदेसु निम्मलयरा : मेरा जीवन चंद्रमा जैसा निर्मल हो जाए, प्योर हो, वाइब्रेंट हो । चंद्रमा की चांदनी की खासियत ये है की वो जख्म को भरती है। चंद्रमा को औषधीपति भी कहा गया है, मतलब दवाईयों का राजा, चंद्रमा को सुधाकर भी कहा गया है मतलब अमृत।
यदि मन निर्मल हो गया, प्योर हो गया शुध्द हो गया तो जो गलत काम है वो हमसे नही हो पाएंगे। जब तक काला मन रहेगा तब तक काले धन से पार नही पाया जा सकता है। अगर हमारा मन पवित्र है निर्मल है तो हम काला काम नही कर पाएंगे। अमृत ग्रहण करोगे तो अमृत वितरण करोगे। लोगस्स की साधना प्रारम्भ करते ही हमारे मन में केमिकल चेंज आते है । फिजिकल चेंज अस्थायी होते है लेकिन केमिकल चेंज स्थायी होते है। जैसे पानी का बर्फ बनना फिजिकल चेंज है वो बर्फ फिर पानी बन जाएगा लेकिन दूध का दही बनना केमिकल चेंज है क्योंकि दही फिर से दूध नही बनने वाला है।
अगर मन प्योर हो गया तो इधर उधर की गंदगी ग्रहण करने का मन नही करेगा । लोगग्स के पाठ की साधना से सही समझ, टॉप क्लास की समाधि और मन में चंद्रमा की तरह निर्मलता मिलती है।
कैकई का मन काला हुआ तो अयोध्या में उपद्रव शुरू हो गया। काला चेहरा खतरनाक नही है काला मन खतरनाक है। अच्छे रंग रूप से केवल 1/2 बार किसी को प्रभावित कर सकते है लेकिन स्थायी रूप से प्रभावित गुणों के द्वारा ही किया जा सकता है।
लड़का या लड़की देखने जाते है तो लक्षण देखने जाते है लेकिन लक्ष्मी देखने में रह जाते है। घर में रोज रोज दंगल नही मंगल चाहते हो तो प्रतिदिन सुबह लोगग्स की आराधना से दिन की शरुआत करो ।
मन के विचार अगर निर्मल नही है तो जिससे प्यार है दोस्ती है उसको ही चुना लगा देते है । 18 के 18 पाप इस काले मन के कारण होते है । छोटा सा बुरा विचार कभी कभी पूरे जीवन को बर्बाद कर देता है। हमारी संगत कैसी है इसपर विचार करो क्योंकि अच्छी संगत से अच्छे गुण आए या न आए लेकिन बुरी संगत से बुरे गुण आना निश्चित है। दुर्योधन को भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य आदि कई महान गुणी जनों का सानिध्य मिला लेकिन उसने संगत शकुनि की करी और महाभारत हो गई। सोहबत और मोहब्बत हमेशा अच्छे लोगो से करो। जब नया घर लेते है उस वक्त भी सबसे पहले ये देखते है की अड़ोसी पड़ोसी कैसे है।
श्रावक के घर में पौषध शाला होना चाहिए लेकिन होम थियेटर मिलते है । माना की व्यवसाय और ऑफिस के काम के लिए स्मार्ट फोन जरूरी है लेकिन घर के अंदर रहने वाली श्राविका के पास स्मार्टफोन की क्या जरूरत। अब तो बच्चों को भी पढ़ाई के कारण स्मार्टफोन जरूरी हो गया है लेकिन 2/3 घण्टे पढ़ाई के बाद बच्चा दिनभर फोन पर क्या कर रहा है यह देखना भी जरूरी है।
बाहर के माहौल पर हमारा कोई कंट्रोल नही है लेकिन घर के माहौल पर हमारा नियंत्रण जरूरी है। नियम बनाओ की 10 बजे बाद चौका चूल्हा नही चलेगा, 11 बजे बाद टीवी फोन नही चलेगा । लेकिन बच्चों को क्या दोष देवे आजकल तो दादा दादी भी प्रभु को याद करने की उम्र में स्मार्ट फोन पर लगे रहते है और कहते है की नींद नही आती है और फोन से टाइम पास हो जाता है। यदि मन को स्वच्छ रखना है तो मन को गन्दा करने वाली चीजों से दूर रहो। लोगस्स की आराधना से जुड़ोगे तो परिवार का वातावरण अच्छा होगा । प्रयास करो की हो सके तो लोगस्स की एक माला प्रतिदिन फेरना और नही हो सके तो कम से कम 27 लोगग्स की रोज आराधना करना।