आदिनाथ भगवान जन्म कल्याणक सत्वाचारी विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया जाएगा



बेलूर सत्यवाचारी जैन भवन 10 मार्च। अपरिग्रह की नींव पर ही अहिंसा की मंजिल खड़ी की जा सकती हैl परिग्रही हिंसा की जननी है ,मकड़ी के जाल की तरह उसमें फंसकर जीवन का अंत कर देता है l उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने संबोधित करते कहा कि परिग्रह आशा और तृष्णा आकाश के समान अनंत है lजैसे जैसे लाभ होता जाता है परिग्रह की भावना बढ़ती ही जाता है उसका कहीं अंत नहीं आता l
उन्होंने कहा कि संपूर्ण विश्व का धन एक व्यक्ति को मिल जाए तो भी उसकी आत्मा को संतोष नहीं होगा उसकी पूर्ति के लिए नीति अनीति न्याय अन्याय सबको भूलकर अंधा बना हुआ कर्मों का संचय करता है माल परिवार खाता है कर्म स्वयं को भोगना पड़ता है l
मुनि कमलेश ने बताया कि आसक्ति के भाव परिग्रह प्रति रखना कुंडली मार कर बैठना प्राणों से उसको ज्यादा प्यार करने वाला दुर्गति का मेहमान बनता है l राष्ट्रसंत ने कहा कि मौका आने पर अपनी परवाह न करते हुए सब कुछ परमार्थ में भामाशाह की तरह जनता को लुटा देता है वही सच्चा अपरिग्रही है l अनासक्ति भाव से उसके साथ जीना जिवन का लक्ष्य होना चाहिए l
जैन संत ने कहा कि इंसान को छोड़कर पशु और किसी प्राणी जगत के पास परिग्रह के नाम पर कुछ नहीं है तो भी जीवन चल रहा है l हमने जन्म लिया तब तन पर कपड़ा भी नहीं था और जाएंगे तब भी खाली हाथ जाएंगे l परिग्रह की आसक्ति से ब्लड प्रेशर हार्ट अटैक ब्रेन हेमरेज डिप्रेशन जैसे रोगों का शिकार बनता है l
अंत में कहा की पवित्र मन आत्मा के साथ शुभ कर्मों का संचय करना मनुष्य की असली संपत्ति है जो अगले जन्म में भी अनंत गुना बढ़कर साथ में चलती है। अरकाट सत्वाचारी बेलूर के वरिष्ठ श्रावक विमल लोढ़ा, राजेश कोठारी, राजेश तालेड़ा, धर्मी चंद कावड़िया, कुशल कोटेचा, दीपक गुलिया ने बिहार सेवा का लाभ लिया। 11 मार्च को आदिनाथ भगवान जन्म कल्याणक सत्वाचारी जैन भवन में सुबह 9:00 बजे विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया जाएगा।