रतलाम । राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मार्च से जुलाई तक तापमान में बढ़ोतरी परिलक्षित होने के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संध्या बेलसरे ने गर्मी से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए बताया कि अत्यधिक गर्मी से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पिए, भले ही आपको प्यास न लगी हो। यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ रखें । ओआरएस का उपयोग करें और अपने घर के बने पेय जैसे नींबू पानी छाछ, लस्सी फलों के रस में थोड़ा नमक मिलाकर पिये। उच्च जल सामग्री वाले मौसमी फल और सब्जियां खाएं जैसे तरबूज, खरबूजा, संतरा, अंगूर अनानास, ककड़ी, खीरा और सलाद पत्ते का उपयोग करें। ढीले, सूती और हल्के रंग के कपड़े पहने। सीधे धूप के संपर्क में आने पर अपने सर को ढकने के लिए छाता, टोपी, तोलिया या अन्य पारंपरिक कपड़ों का उपयोग करें। धूप में बाहर निकलते समय जूते या चप्पल पहने । हवादार और ठंडी जगह पर रहे, दिन के दौरान खिड़कियां और पर्दे बंद रखें रात के समय में ठंडी हवा आने देने के लिए उन्हें खोल दें। यदि बाहर जाना आवश्यक हो तो अपनी बाहरी गतिविधियों को सुबह और शाम सीमित रखें। दोपहर 12:00 से 3:00 तक धूप में बाहर निकलने से बचे । दोपहर में बाहर होने पर भारी मेहनत वाले काम ना करें। खाना पकाने के क्षेत्र को हवादार रखने के लिए दरवाजे और खिड़कियां खोलें। शराब ,चाय , कॉफी और अत्यधिक चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक से बचे, यह शरीर से तरल पदार्थ कम करते हैं और पेट में मरोड़ पैदा कर सकते हैं। अधिक प्रोटीन वाले भोजन से बचें और बासी खाना ना खाएं। बच्चों या पालतू जानवरों को खड़ी गाड़ी में ना छोड़े वाहन के अंदर का तापमान खतरनाक हो सकता है।
उच्च बाहरी या इनडोर तापमान के संपर्क में आने से हीट स्ट्रेस उत्पन्न हो सकता है, जो सीधे और परोक्ष रूप से हीट संबंधित बीमारियों का कारण बनता है। गर्मी के कारण चक्कर या बेहोशी अत्यधिक प्यास, मतली उलटी , सर दर्द, पेशाब कम होना और असामान्य रूप से गहरा पीला पेशाब होना आदि लक्षण हो सकते हैं, इस प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर किसी ठंडी जगह पर विश्राम करें और ओआरएस पिए, आवश्यक होने पर नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार कराए।