जीवन पर्यन्त समभाव में रहने वाला साधक ही सिद्ध गति को प्राप्त करने का अधिकारी बनता है – डॉ. राजेन्द्र मुनि म.सा.

फरीदकोट । दिं. २८ मार्च होली के उपलक्ष्य में फरीदकोट जैन स्थानक में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए प्रवर्तक डॉ. राजेन्द्रमुनि ने समशब्द से निर्मित सामयिक साधना की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन पर्यन्त समभाव में रहने वाला साधक ही सिद्ध गति को प्राप्त करने का अधिकारी बनता है । आज जीवन के चारों और मन अशांत रहता है । हमारा दृढ़ निश्चय होना चाहिए हम हर विषय समय में भी समत्व योग की साधना आराधना करते है चाहे मान सम्मान यश अपयश लाभ हानी जीवन मरण के प्रसंद उपस्थित हो पर अपने विचार को बनाए रखे । मुनिजी ने गजसुकुमाल को जलाने के बावजूद भी वो परम शांत अवस्था में रहे। विपरित स्थिति में अपना मैत्री करूणा भाव बनाए रखा, जगत कल्याण की भावना से मन वचन काया को शुद्ध बनाकर परम पद को प्राप्त कर लेते है। सभा में इसके पूर्व साहित्यकार सुरेन्द्रमुनि द्वारा नवकार महामंत्र की विशेषता का वर्णन करे हुए सामुहिक जाप सम्पन्न कराया। नवकार मंच्र के ४ पदों की व्याख्या करते उन परम विशुद्ध आत्मा अरिहंत सिद्ध आचार्य उपाध्याय जनों को वंदना अर्र्पित की । सभा में लुधियाना, नागापुराना, कोटकपुरा, जेतोमण्डी व भटिण्डा आदि क्षैत्र से आए हुए समाजवियों का हार्दिक स्वागत किया गया । प्रधान प्रवक्ता जैन एडव्होकेट मंत्री पकंज जैन व समाज के प्रमुखजनों ने विनती प्रस्तुत की । मुनिजी द्वारा अपना आगामी चार्तुमास भटिण्डा समाज में करने का वचन दिया गया।

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