प्रेमचंद सृजन पीठ का व्याख्यान और कवि सम्मेलन


रतलाम। मालवी और निमाड़ी हमारी लोक भाषाएं हैं। इनमें हमारा जीवन धड़कता है। हमारी ज़मीन की ख़ुशबू इनमें आती है। देश की प्रत्येक लोकभाषा उसके जनजीवन से जुड़ी है। हमारी इन जन भाषाओं के प्रति चिंता ही हमारे मन में उनके प्रति लगाव को दर्शाती है।
उक्त विचार वरिष्ठ साहित्यकार एवं विद्वान डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश शासन की प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा आयोजित मालवी- निमाड़ी बोली के संरक्षण- संवर्धन पर विमर्श एवं कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। गुलाब चक्कर परिसर में हुए आयोजन में प्रेमचंद सृजन पीठ, उज्जैन के निदेशक मुकेश जोशी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पीठ के उद्देश्य से परिचित कराया।
विश्वकीर्तिमानक मालवी दोहाकार डॉ. ओम जोशी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मालवी के लिए आकाशवाणी में रहते हुए कई कार्यक्रम आयोजित किए। लोगों में आज भी इन लोक भाषाओं के प्रति जागरूकता है। मुख्य अतिथि वरिष्ठ निमाड़ी गीतकार शिशिर उपाध्याय ने निमाड़ी के उत्थान और जनता का भाषा के प्रति उत्साह प्रदर्शित किया। मालवी की वरिष्ठ कवयित्री डॉ. माया बदेका ने कहा कि हमें इन भाषाओं को बढ़ाने के लिए अपनी नई पीढ़ी को इसे जोड़ना बहुत जरूरी है तभी हमारा यह प्रयास सार्थक होगा। वरिष्ठ निमाड़ी कवयित्री डॉ .रेखा मंडलोई ने निमाड़ी के प्रति उनके आकर्षण और सीखने की प्रक्रिया से अवगत कराया। कवि सुरेंद्र सर्किट (उज्जैन) के संचालन और व्यंग्यकार, ग़ज़लकार आशीष दशोत्तर के समन्वय में हुए इस आयोजन में कवि डॉ. कारूलाल जमड़ा (जावरा), डॉ.राजेश रावल (गोंदिया), दीपक पगारे (बड़वाह), कैलाश सोनी सार्थक (नागदा), जुझार सिंह भाटी , यशपाल तंवर, संजय परसाई ‘सरल’ (रतलाम), राहुल शर्मा (शाजापुर) ,सीमा देवेन्द्र (उज्जैन), ऋतुराज गुर्जर (पोलाय) , भरत पंड्या (रूपाखेड़ी ) ने प्रभावी रचनाओं का पाठ किया। कवियों ने अपनी मालवी – निमाड़ी रचनाओं से रतलामवासियों को अपनी आंचलिकता से परिचित करवाया। संचालन सुरेन्द्र सर्किट और आशीष दशोत्तर ने किया तथा आभार सृजन पीठ के निदेशक व्यंग्यकार मुकेश जोशी ने व्यक्त किया। आयोजन में रतलाम और आसपास के सुधिजन मौजूद रहे।