दीक्षा कर्मो से मुक्त होने के लिए नही बल्कि पकड़ से मुक्त होने के लिये ली जाती है- पूज्य गुरुदेव डॉ. समकित मुनि जी म. सा.

रतलाम। आगम ज्ञाता पूज्य गुरुदेव डॉ समकित मुनि जी महाराज ने स्मारक पर फरमाया कि बिना पकड़ छुटे आदमी संसार से नही छूट सकता । दिक्षा कर्मो से मुक्त होने के लिए नही बल्कि पकड़ से मुक्त होने के लिये ली जाती है।
मोक्ष मार्ग सौदे का नही त्याग का मार्ग है। जो पकड़ में अटक गया समझो वह भटक गया । पकड़ को पकड़ कर आज तक किसी की साधना सिद्ध नही हुई। जब कान प्रशंसा के शब्द सुनने के लिए आतुर हो और और प्रशंसा के शब्द कान में न पड़े तो व्यक्ति परेशान हो जाता है। जो व्यक्ति दूसरों को परेशान करने की न सोचे वही सरल होता है।
जब अपने ही अपनों को मजबूर कर देते है उस समय अपनों को अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ता है। रिश्ते जब पाप के होते है तो रिश्ते तकलीफ देते है। खाने में संयम नही तो पेट में झगड़ा शुरू हो जाता है और बोलने में संयम नही तो घर में झगड़ा शुरू हो जाता है।
जितनी तेज जुबान हिलती है उतनी ही तेज मन भागता है। मन को कंट्रोल करना है तो जीभ को कंट्रोल करो। शांति की इच्छा है तो पहले इच्छाओं को शांत करो। इच्छाएं जब खत्म होती है तब जाकर खुशियां प्रारंभ होती है।

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