अनूठी शैली में लिखी गई कविताओं की विचार भूमि सकारात्मक चिंतन हेतु सहज आकर्षित करती है

रतलाम 23 मार्च। काव्य सृजन केवल यश प्रतिष्ठा अर्थाजन ही नहीं देता अपितु आत्मिक विचारों का सार्थक प्रकटीकरण भी है । ”श्रममेव जयते” (काव्य कुंज) की प्रारम्भिक कविताएं श्री फुहार के शिक्षकीय जीवन का प्रतिबिम्बन है । अनूठी शैली में लिखी गई कविताओं की विचार भूमि सकारात्मक चिंतन हेतु सहज आकर्षित करती है।
यह उदगार शिक्षाविद व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला ने साहित्यिक संस्था ”अनुभूति” के स्वर्ण जंयति वर्ष एवं विश्व कविता दिवस के उपलक्ष्य में वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामचन्द्र फुहार के ”श्रममेव जयते” (काव्य कुंज) के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए । आपने यह भी कहाकि श्री फुहार विगत ६५ वर्षो से काव्य रचना कर रहे है । उनका यह प्रथम काव्य संकलन का विमोचन संयोग से विश्व कविता दिवस के दिन हो रहा है। जो अपने आप में महत्वपूर्ण है।विशेष अतिथि व प्रसिद्ध कवि श्री धमचक मुलथानी ने कहाकि रतलाम नगर प्रारम्भ से ही साहित्य का गौरव रहा है। यहां पर ”रत्नरासो” की रचना हुई । वर्तमान में भी यहां का साहित्य देश भर में प्रतिष्ठा प्राप्त है। यहां के साहित्यकारों का भारत में उनके द्वारा रचे गए साहित्य के कारण रतलाम का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। यह अंचल हिन्दी मालवी का केन्द्र है । श्री मुलथानी का मालवी में ”पिंडदान” कविता का पाठ भी किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. मोहन परमार ने कहा कि श्री फुहार की कविताएं सामाजिक, सांस्कृतिक व शिक्षण की दृष्टि से पुरी तरह परिपक्व है । डॉ. परमार ने रचना शीलता, श्रमशीलता व पारंपरिक व्यवस्याओं को केन्द्र में रखकर रची गई कई कविताओं का विश्लेषण कर श्रेष्ठ कविताओं पर समीक्षात्मक टिप्पणी की । इस मौके पर सुश्री अंतिमा भागचंदानी ने काव्य संकलन की काव्यगत विशेषताओं को रेखांकित किया और श्री फुहार को विश्व कविता दिवस पर काव्य संकलन का विमोचन होने पर बधाई दी । लक्षकार समाज के अध्यक्ष श्री शिवशंकर बागड़ी ने भी अपनी बात कहीं । ”श्रममेव जयते” (काव्य कुंज) लेखक श्री रामचन्द्र फुहार ने संकलन की रचना प्रक्रिया और कविताओं में शिक्षकीय जीवन एवं ग्रामीण अंचल की कविताओं की पृष्ठभूमि की चर्चा करते हुए अपनी प्रतिनिधि तीन कविताओं का रचना पाठ किया । श्री हरिशंकर भटनागर ने अनुभूति संस्था 50 वर्षो की साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी देते हुए श्री फुहार को अपनी बधाई और शुभकामनाएं दी। प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिकृति पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरूवात की। अतिथियों का स्वागत प्रोफेसर रतन चौहान, प्रणयेश जैन, सिद्धीक रतलामी, मुकेश सोनी, गौरीशंकर खिंची, प्रकाश हेमावत, श्रीमती छवि नीलिमा सिंह, कीर्तिकुमार शर्मा,राजेश कुमार, राजेश पंवार, रेवाशंकर बागड़ी (मंदसौर) आदि ने स्वागत किया।डॉ. चांदनीवाला, पुस्तक प्रकाशक विश्वास शर्मा समाज के अध्यक्ष श्री बागड़ी और अन्य पदाधिकारियों ने श्री फुहार का शाल श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में दिनेश कुमार जैन, अब्दुल सलाम खोकर, लक्ष्मण पाठक, आशीष दशोत्तर, सुरेन्द्र छाजेड़, आशारानी उपाध्याय, दिनेश उपाध्याय, सुशाष यादव, कैलाश वशिष्ठ, सुरेश माथुर, सुरेन्द्र मेहता, उत्कृर्ष शर्मा, निर्मला बागड़ी, मंजु बागड़ी, वर्षा चौहान आदि उपस्थित रहे । कार्यक्रम का संचालन व्यंग्य कवि जुझारसिंह भाटी ने किया एवं आभार श्री राजेश पंवार (मुम्बई) ने किया । फोटो संलग्न

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