
रतलाम 1 अप्रैल । मध्य प्रदेश शासन सांस्कृतिक मंत्रालय एवं ‘नादब्रह्म नागपूर’ की ओर से स्थानिक कालिका माता मंदिर प्रांगण मे ‘संघसृजन का भव्य नाट्यविष्कार ”युगप्रवर्तक डॉक्टर हेडगेवार’ का महानाट्य मंचन सफलतापूर्ण संपन्न हुआ। इस महानाट्य के निर्माता नादब्रह्म नागपुर के अध्यक्ष श्री पद्माकर धानोरकर है और नाट्य लेखन डॉक्टर अजय प्रधान ने किया है, दिग्दर्शन श्री सुबोध सुरजीकर का है, नाट्य मे प पू डॉक्टर हेडगेवार जी की प्रमुख भूमिका मे श्री सतीश खेकाळे, प पू श्री गुरुजी की भूमिका मे श्री अमोल तेलपांडे, म. गांधी तथा सावरकर जी के भूमिका मे श्री प्रशांत मंगदे, डॉक्टर मुंजे श्री रमेशचंद्र दीक्षित, लोक. तिलक मंगेश बावसे, अरविंद घोष श्री विनय लोहित तथा अन्य भूमीकाओ मे 30 कलावंत सम्मिलित है।
इस मंचन के उद्घाटन समारोह मे आदरणीय श्री चैतन्य जी कश्यप,मान. मंत्री मध्य प्रदेश सरकार, श्री प्रल्हादजी पटेल महापौर रतलाम एवम श्री प्रदीप उपाध्याय, भारतीय जनता पार्टी जिल्हाध्यक्ष रतलाम तथा श्री विंपी छाबडा, अध्यक्ष स्वामी विवेकानंद व्याख्यानमाला समिति रतलाम के करकमलो द्वारा दीपप्रज्वलन कर और भारत माता, प.पू डॉक्टर हेडगेवारजी और प. पू. श्री गुरुजी के प्रतिमा को माल्यार्पण करते हुए संपन्न हुआ। इस मंचन मे संघ निर्मिती की प्रेरणा एवम संघ निर्मिती का उद्देश डॉक्टर हेडगेवार जी के मनोपटल पर किस प्रकार उभर आया और उन्होने लोकमान्य तिलक, योगी अरविंद घोष और स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी के जाज्वल्य देशभक्तीपर विचार,मार्गदर्शन एवं अनुभव से बोध लेकर अपने हिंदू संघटन की नीवं रखी, उन्हीके आदर्श पर चलते हुए और सनातन धर्म का लहराता हुआ परचम पूजनीय भगवा ध्वज को अपनी संघटना का ध्वज बनाया और उसे गुरुस्थान पर रखकर अपने देशभक्त साथियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। इस विचार को ज्वलंत देशभक्ती के साथ आगे बढाया, उनके सहयोगी भी देशभक्ती से प्रेरित थे उनके पदचिन्हौ पर चलकर आज का संघ संपूर्ण विश्व मे सनातन धर्म का परचम लहरा रहा है। डॉक्टर जी के महानिर्वाण उपरांत श्री गुरुजी को संघ का दायित्व सोपा गया.संघ के विचार, संघ के आदर्श, संघ की कार्यप्रणाली, उद्देश और भविष्य मे संघ द्वारा समाज हितैशी कार्य किस प्रकार कीए जायेंगे ये सभी का विस्तृत विवरण इस मनोहर नाट्यमंचन मे दिखाया गया । युगप्रवर्तक डॉक्टर हेडगेवार के मंचन का आयोजन स्वामी विवेकानंद व्याख्यान माला समिति के नेतृत्व मे संपन्न हुआ।और इस मंचन को देखने के लिए और अंत तक मंत्रमुग्ध होकर रसिको ने इस मंचन का न केवल आस्वाद लिया बल्कि राष्ट्रभक्ती से प्रेरित होकर देशभक्तीमय वातावरण निर्माण करने का कार्य इस नाट्यमंचन द्वारा संपन्न हुआ। कार्यक्रम के प्रारंभ में माननीय मंत्री जी श्री कश्यप जी ने अपने उद्बोधन में कहा की नाट्य मंचन मुख्य रूप से महाराष्ट्र की विद्या है और इस विधा के द्वारा किसी घटना को जीवंत रूप दिया जाता है आज का नाट्य मंचन भी 100 वर्ष पूर्व संघ की स्थापना किन परिस्थितियों में हुई उसका जीवंत मंचन है । कार्यक्रम का संचालन श्री विकास शेवाल जी ने किया तथा कार्यक्रम के अंत में आभार नादब्रह्म नागपुर के अध्यक्ष श्री पद्माकर धानोरकर एवं स्वामी विवेकानंद व्याख्यान माला समिति के अध्यक्ष श्री विम्पी छाबड़ा ने माना।