एक पुण्य निर्णय बना दो जीवनों की रोशनी, नेत्रदान से समाज को मिला करुणा का संदेश

रतलाम। जब जीवन की अंतिम यात्रा पूरी होती है, तब यदि किसी के नेत्र किसी और की दुनिया रोशन कर दें, तो उससे बड़ा मानव धर्म और कोई नहीं। स्टेशन रोड निवासी भवरसिंह चौहान की धर्मपत्नी ललिता चौहान के निधन उपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान कर यही संदेश समाज को दिया कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि किसी और के जीवन की नई शुरुआत भी हो सकती है।
परिजनों के इस साहसिक और संवेदनशील निर्णय से दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की संभावना है, जिससे उनके जीवन में आशा, आत्मविश्वास और उजाले का संचार होगा। यह निर्णय समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।
इस पुनीत कार्य के लिए रमेश चोइथानी ने दिवंगत के पुत्र प्रदीपसिंह चौहान ,नरेन्द्र सिंह चौहान,एवं समस्त परिजनों को नेत्रदान के महत्व से अवगत कराया। परिजनों ने दुःख की इस घड़ी में मानवता को सर्वोपरि रखते हुए सहर्ष नेत्रदान की अनुमति प्रदान कर समाज के समक्ष अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत ने जानकारी देते हुए बताया कि परिजनों की स्वीकृति मिलते ही गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल को तत्काल सूचित किया गया। डॉ. ददरवाल के मार्गदर्शन में उनकी टीम के परमानंद राठौड़ ने तत्परता से मौके पर पहुंचकर नेत्र संरक्षण की प्रक्रिया को पूर्ण निष्ठा एवं सम्मान के साथ सफलतापूर्वक संपन्न किया।
नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान
हेमन्त मूणत, सुशील मीनू माथुर, भगवान ढलवानी,हरीश छबलानी , उपस्थित रहे।
नेत्रम संस्था द्वारा परिजनों को प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनकी उदारता, करुणा एवं मानवता के प्रति समर्पण का सम्मान किया गया।