श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल स्थानक में विशाल धर्मसभा का आयोजन
रतलाम,04 अप्रैल। संसार में जीव अपने कर्मों से ही दुख पाता है। कर्म, पाप, आश्रव और बंधन के कारक है, इसलिए कर्म करते समय सदैव सजग, सतर्क रहा। कोई कार्य यदि सहजता से हो सकता हो, तो उसमें कलाकारी नहीं दिखाना चाहिए। कर्म के मार्ग पर कोई टोल प्लाजा नहीं होता, कि टैक्स चुकाया और चल दिए। इसमें कर्म साथ चलते है और जैसा सुख-दुख का कारण बनते है।
यह विचार प.पू. आचार्य सम्राट श्री आनंद ऋषि जी म.सा. के सुशिष्य श्रमणसंघीय आचार्य पूज्य डॉ. श्री शिवमुनि जी म.सा. के आज्ञानुवर्ती श्रमणसंघीय युवाचार्य श्री महेन्द्र ऋषिजी मसा ने नोलाईपुरा स्थित श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल स्थानक में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कर्मों का विस्तार से विवेचन करते हुए कहा कि दुख का कारण पाप और सुख का कारण धर्म है। यदि कर्म धर्ममय होंगे, तो निश्चित सुख मिलेगा, लेकिन पापमय कर्म करोगे, तो दुख ही दुख प्राप्त होगा। इस समय समाज में कई विकृतियां आ गई है। पहले लोग खोपरे का तेल या केसर-चंदन का लेप लगा लेते थे, लेकिन आजकल झेल और कई कास्मैटिक वस्तुएं उपयोग हो रही है। पहले केवल दुल्हन सजती थी जबकि अब सारे के सारे लोग सजने लगे है। इनमें कितने जीवों का हिसंा हो रही है, इसका अंदाजा किसी को नहीं है।
युवाचार्यजी ने कहा कि अनावश्यक जो भी है, वह पाप हैं। इससे बचना चाहिए। आजकल लोग खाना भी खाने के लिए कम और दिखाने के लिए ज्यादा रखने लगे है। सच्चाई ये है कि जितना मीनू बढता है, उतना ही पाप भी बढता है। व्यापार में भी जितना अतिरिक्त मुनाफे के लिए करते है, वह पाप है। घरों में भी निर्माण में यदि 1 करोड लगते है, तो इंटीरियर में 5 करोड लगा देते है। जबकि रहना तो 1 करोड के घर में होता है। मन, वचन और काया सभी से कर्म का बंधन होता है। मानव जीवन में इन सबसे मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए।
धर्मसभा में श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने युवाचार्यजी के साथ संत-सतिया मंडल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने सोमवार को सागोद रोड स्थित श्री सौभाग्य तीर्थ में प्रवचन की विनती करते हुए बताया कि नासिक में प्रवर्तकश्री प्रकाशमुनिजी मसा के रतलाम चातुर्मास की घोषणा युवाचार्य श्री महेन्द्र ऋषिजी मसा के मुखारविंद से ही हुई है। 5 अप्रैल को युवाचार्यजी के प्रवचन नीमचौक स्थानक पर होंगें। धर्मसभा से पूर्व युवाचार्यजी को श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल ने अध्यक्ष मनीष मंडलेचा और मंत्री महेन्द्र गंग के नैतृत्व में नीम चौक स्थानक से विशाल जुलूस के रूप में जय-जयकार के साथ लाया गया। इस दौरान श्री हितेंद्रऋषिजी धवलऋषिजी, महकऋषिजी मसा, उपप्रवर्तिनी दिव्य दर्शनाजी, सुचेताजी सहित संत-सतिया मंडल एवं बडी संख्या में श्रावक-श्राविकागण मौजूद रहे। प्रारम्भ में श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट,श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट,श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल,श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल,श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल,श्री सौभाग्य प्रकाश बालिका मंडल ने स्वागत किया । धर्मसभा का संचालन रखब चत्तर द्वारा किया गया ।