बरबड़ मेले में नागरिकों ने कविताओं का लुफ्त उठाया

रतलाम 4 अप्रैल । नगर निगम द्वारा आयोजित पांच दिवसीय बरबड़ मेले में रात्रि में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में 2 अप्रैल गुरूवार को निगम रंगमंच पर आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने काव्य पाठ कर श्रोताओं की खुब दाद बटौरी।

कवि सम्मेलन में देश की राजधानी दिल्ली से आये हास्य रस के कवि सुदीप भोला ने अपनी कविता पाठ करते हुए कहा –
सिया संग राम पधारे हैं, अवध पूरी में देखो शालिग्राम पधारे हैं
प्रतीक्षारत थे सारे, मगर जब राम पधारे
करें हम दर्शन कैसे, भरे हैं नयन हमारे
क्या बतलायें कैसे हमने राम निहारे हैं
माँगते थे प्रमाण जो, उन्हें परिणाम मिले है
जिन्हें विश्वास राम पर, उन्हीं को राम मिले हैं
न्यायालय से जीत महासंग्राम पधारे हैं।

मैनपुरी से आये ओज रस के कवि मनोज चौहान ने कुछ यूं कहा –
कुछ तो पढ़कर लिखीं कुछ जुबानी लिखीं।
जिंदगी हमने बस पानी-पानी लिखीं।।
लोग तो प्यार सुनते रहे उम्र भर,
हमने बस सरहदों की कहानी लिखीं।।

कवि सम्मेलन में दिल्ली से आई श्रृंगार रस की कवियत्री रजनीसिंह अवनी ने अपना कविता पाठ सुनाते हुए कहा –
कल तक घर के भीतर थी अब कदम बढ़ाना सीख गयी
लाख रुकावट आये फ़िर भी आगे जाना सीख गयी
नारी को कमजोर समझना भूल तुम्हारी है सुन लो
नारी तो अब सूरज से भी आँख मिलाना सीख गयी

मेरठ से आई श्रृंगार रस की कवियत्री शुभम् त्यागी ने कुछ यूं कहा –
मीठी थपकी हो गालों पर,बाहों में मैं सो जाऊँ।
प्यार करो मुझको तुम इतना,इंद्रधनुष में खो जाऊँ।
प्यार नहीं केवल एकाकी,वैश्विक इसे बना दो तुम,
विश्व गरल का पान करो जो,पार्वती मैं हो जाऊं।।

नाथद्वारा से आये हास्य रस के कवि लोकेश महाकाली ने अपनी कविता सुनाते हुए कहा कि-
है कथा यह ज्ञान गुण सागर बली हनुमान की।
है कथा प्रभु दास द्वारा आन के संज्ञान की।
रुक गए यह सोच हाथों राम ही रावण मरे,
वीर वरना मुक्त कर लाते स्वयम् माँ जानकी।
धार से गीतकार कवि पंकज प्रसून ने कविता पाठ करते हुए कहा –

खोल के बंद खिड़किया आईं
व्योमिका और सोफिया आई
मार सीमां के पार दुश्मन को
करके सिदूर बेटियां आई
प्रजा ने कहा कैसे इंसान हो तुम
उन्हें क्या बताऊ के भगवान हो तुम
पाऊ तुमको में जब लूँ जनम
मेरे राम तुमको नमन

प्रतापगढ़ से आये वीर रस के कवि विजयसिंह राठौड़ ने अपनी कविता में कुछ यूं कहा –
दस्तुर ए साहित्य थोड़ा सा समझते हैं
आहार संग रोज अल्फ़ाज़ निगलते हैं
स्वभाव में हैं हमारे भी शीतलता मगर
विद्रोही होने से जज़्बात सुलगते हैं

राजस्थान चित्तौड़गढ़ से आये हास्य रस के कवि नवीन सारथी ने अपनी कविता पाठ करते हुए कहा कि –
ये बलिदानों की धरती है वीरो को जन्म दिया करती है।
प्रारंभ में कवियों का स्वागत महापौर प्रहलाद पटेल, भाजपा जिला कोषाध्यक्ष पवन सोमानी, सामान्य प्रशासन समिति प्रभारी धर्मेन्द्र व्यास, महापौर परिषद सदस्य मनोहरलाल राजू सोनी के अलावा विवेक शर्मा आदि ने पुष्पहार व पुष्पगुच्छ से किया व प्रतीक चिन्ह भेंट किये।

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