नेत्रम संस्था के प्रयास से एक घंटे में दो नेत्रदान – सहमति व प्रेरणा से जगमगाई मानवता, चार जिंदगियों में जली आशा की रोशनी

रतलाम। जब संवेदनाएं जीवित होती हैं, तब समाज में बदलाव की रोशनी स्वतः फैलती है। नेत्रम संस्था के प्रयासों से मात्र एक घंटे के भीतर दो नेत्रदान संपन्न होना न केवल एक उपलब्धि है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा, जागरूकता और मानवता का जीवंत संदेश भी है। इस पुनीत कार्य से चार नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला आने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
गहरे दुःख के क्षणों में भी परिजनों द्वारा लिया गया नेत्रदान का निर्णय यह दर्शाता है कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो किसी और के जीवन को संवार दे।
पहला नेत्रदान प्रतापनगर निवासी स्व. श्रीमती बिटौला बाई भदौरिया के निधन के पश्चात उनके परिजनों—पुत्र दिनेश सिंह भदौरिया, पुत्रवधू रीता भदौरिया, पौत्री शिवांगी भदौरिया, शालिनी भदौरिया—की सहमति से संपन्न हुआ। इस प्रेरणादायक निर्णय के लिए सुशील मीनू माथुर एवं शैलेन्द्र सिंह भदौरिया ने परिवार को जागरूक एवं प्रेरित किया।
दूसरा नेत्रदान काटजू नगर निवासी स्व. महेशचंद्र लड्डा के निधन के पश्चात उनके परिजनों—पुत्र निखिल लड्डा एवं परिवार—की सहमति से संपन्न हुआ। इस पुण्य कार्य के लिए शीतल भंसाली ने परिवार को प्रेरित कर समाज के सामने एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत ने बताया कि सहमति प्राप्त होते ही गीता भवन न्यास बड़नगर के नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी. एल. ददरवाल को तुरंत सूचित किया गया। उनके मार्गदर्शन में परमानंद राठौड़ ने समय पर पहुंचकर अत्यंत सम्मान, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ नेत्र संरक्षण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
इस सेवा कार्य में ओमप्रकाश अग्रवाल,नवनीत मेहता, शीतल भंसाली, प्रशांत व्यास, शलभ अग्रवाल, सुशील मीनू माथुर, भगवान ढलवानी, शिवम माथुर, रितेश छाजेड़, सुरेन्द्र मूंदड़ा, महेन्द्र मूंदड़ा, अर्चित डागा, शैलेन्द्र सिंह भदौरिया, अंकित, धन सिंह राठौर एवं माया सोलंकी सहित अनेक समाजसेवी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। अंत में नेत्रम संस्था एवं गीता भवन न्यास बड़नगर द्वारा परिजनों को प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनके इस महान निर्णय को सम्मानित किया गया।
नेत्रम संस्था ने समाज के सभी वर्गों से भावपूर्ण अपील की है कि नेत्रदान के प्रति जागरूक बनें। मृत्यु के बाद भी हम अपने नेत्रों के माध्यम से किसी के जीवन में प्रकाश भर सकते हैं। आइए, हम सभी संकल्प लें कि “नेत्रदान” को एक जनआंदोलन बनाकर हर अंधेरी जिंदगी में रोशनी पहुंचाएंगे।
“नेत्रदान – केवल दान नहीं, बल्कि किसी के जीवन में नया सवेरा लाने का संकल्प है।”

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