घर-घर से एक मुट्ठी अनाज लेकर बनेगी कुटुंब रसोई

  • परिवार एकता का संदेश देने के लिए कायस्थ समाज करेगा एक जाजम पर भोजन
  • भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे भगवान श्री चित्रगुप्त
  • 23 अप्रैल को है कर्म के लेखक भगवान श्री चित्रगुप्त का प्राकट्य दिवस

उज्जैन। बिखरते टूटते परिवारों को जोड़ने के उद्देश्य से कायस्थ समाज ने एक अनूठी पहल शुरू की है । प्रतिवर्ष भगवान श्री चित्रगुप्त जी के प्राकट्य दिवस के अवसर पर भगवान श्री चित्रगुप्त जनदर्शन यात्रा निकाल कर कुटुंब रसोई का आयोजन किया जाता है जिसमें सभी समाज बंधु ऊंच नीच का फर्क तोड़कर एक जाजम पर भोजन करते है। प्राकट्य दिवस पर कायस्थ समाज के घरों में चूल्हा नहीं जलता है । कुटुंब रसोई के लिए परिवारों से एक मुट्ठी अनाज का सहयोग लिया गया ताकि समानता और आत्मीयता का भाव प्रकट हो सके । शाम 5 बजे ग्रांड होटल से जनदर्शन यात्रा प्रारंभ होगी जो विभिन्न मार्गो से होते श्री चित्रगुप्त घाट क्षिप्रा तट पर महाआरती के साथ समाप्त होगी ।
उज्जैन कायस्थ समाज अध्यक्ष दिनेश श्रीवास्तव ने बताया कि प्रतिवर्ष अनुसार वैशाख शुक्ल गंगा सप्तमी तिथि 23 अप्रैल 2026 को कर्मों का हिसाब किताब रखने वाले कुल आराध्य भगवान श्री चित्रगुप्त की के प्राकट्य दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा मध्यभारत इकाई उज्जैन व सभी चित्रगुप्त मंदिर प्रबंध समिति सहित सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से भगवान श्री चित्रगुप्त जनदर्शन यात्रा ग्रांड होटल टॉवर फ्रीगंज से शाम 5 बजे यात्रा प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्ग टॉवर,शहीद पार्क , इंद्रा गांधी चौराहा से चामुंडा देवासगेट होते हुए दौलतगंज कंठाल सती गेट से होकर गोपाल मंदिर से दानी गेट चित्रगुप्त घाट पर जाकर समाप्त होगी । महाआरती के पश्चात समाज की कुटुंब रसोई होगी।

महिलाओं ने परिवार जोड़ने का लिया संकल्प
भगवान श्री चित्रगुप्त के प्राकट्य दिवस पर निकलने वाली जनदर्शन यात्रा की तैयारी नारी शक्ति कर रही है। अनुपमा श्रीवास्तव ने कहा कि सभी मातृ शक्ति कुटुंब जोड़ने का संदेश दे रही है।कोई परिवार टूटे नहीं इसलिए घर घर से एक मुट्ठी अनाज का सहयोग लिया जा रहा है ताकि बिखरते रिश्तों में मिठास बनी रहे ।

नगर वासियों को दर्शन देंगे भगवान चित्रगुप्त, क्यों पड़ा चित्रगुप्त नाम
वैशाख शुक्ल की गंगा सप्तमी को ब्रह्मा जी की काया और उनके चित्त से प्रकट हुए एक दिव्य शरीर धारण करने वाले चित्रगुप्त का नाम ब्रह्मा जी ने रखते कहा था कि तुम मेरी काया से अस्थ होकर मेरे चित्त से प्रकट हुए हो इसलिए तुम्हारी जाति कायस्थ होकर नाम चित्रगुप्त होगा ।दिनेश श्रीवास्तव ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार तब से ही भगवान चित्रगुप्त जी महत्ता है । जो धर्मराज चित्रगुप्त के नाम से भी जाने जाते है । जिनका काम ब्रह्मांड के समस्त जीवों के कर्मों का लेखा जोखा रखने का है। माना जाता है कि जो भी प्राणी भगवान श्री चित्रगुप्त जी की पूजा अर्चना करता उसे यम दूत सताते नहीं है।

केसरिया धर्म ध्वजा के साथ ऊर्जा बचाने का संदेश देते हुए निकाली जाएगी यात्रा
भगवान श्री चित्रगुप्त जनदर्शन यात्रा में केसरिया धर्म ध्वजा के साथ समाज जन देश में ईंधन की समस्या आ रही है उसके निदान के लिए तेल गैस ईंधन को बचाने के लिए संकल्प लेकर इलेक्ट्रॉनिक वाहनों व संसाधनों के उपयोग करने का संदेश देगा ताकि जरूरतमंद लोगों को राहत हो सके और हमारा राष्ट्र मजबूत हो । यात्रा को सफल बनाने के लिए मोतीलाल श्रीवास्तव,उर्मिला श्रीवास्तव, अनुपमा श्रीवास्तव , चेतना श्रीवास्तव, रूपकिशोर कुलश्रेष्ठ, अतुल सक्सेना, संजय श्रीवास्तव, चेतन श्रीवास्तव, अशीष अष्ठाना, राजभूषण श्रीवास्तव, निखलेश गौर, रजनी कुलश्रेष्ठ , नेहा श्रीवास्तव, शशि श्रीवास्तव, रक्षा अष्ठाना, सीमा निगम , श्वेता श्रीवास्तव, सिखा माथुर , पिंकी श्रीवास्तव , वर्षा श्रीवास्तव ,पिंकी निगम आदि का प्रयास है।

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