इंदौर में अल्पसंख्यक विभाग की समग्र जैन समाज की उच्चस्तरीय बैठक – बासोकुंड संस्थान ,गिरनार तीर्थ, और विशेष सुरक्षा कानून की मांग बुलंद

इंदौर 24 अप्रैल (राजेश जैन दद्दू) । शहर के होटल मैरियट में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव श्री श्रीवत्स कृष्णा के सानिध्य में एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जैन समाज की प्रमुख संस्थाओं के प्रतिनिधिमंडल ने समुदाय की वर्तमान चुनौतियों, धार्मिक अधिकारों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर मंत्रालय के समक्ष अपनी बात मजबूती से रखी। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस प्रतिनिधिमंडल में ‘राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ’ के मयंक जैन और ‘विश्व जैन संगठन, इंदौर’ के सचिव एडवोकेट पारस जैन विशेष रूप से सम्मिलित हुए और उन्होंने समाज के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की।

बासोकुंड (कुंडलपुर) संस्थान के अस्तित्व पर संकट का मुद्दा प्रमुखता से उठा
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने वैशाली (बिहार) स्थित ‘प्राकृत जैन शास्त्र एवं अहिंसा शोध संस्थान, बासोकुंड (कुंडलपुर)’ के अस्तित्व को समाप्त करने वाले हालिया निर्णय पर गहरी आपत्ति जताई। प्रतिनिधियों ने सचिव के समक्ष स्पष्ट मांग रखी कि इस ऐतिहासिक संस्थान को बंद करने या इसके स्वरूप को बदलने वाले निर्णय को तत्काल निरस्त किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि यह संस्थान अल्पसंख्यक जैन समाज की अमूल्य शैक्षणिक और सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे पूर्ववत स्थिति में रखते हुए इसका संरक्षण और विकास सुनिश्चित करना मंत्रालय की प्राथमिकता होनी चाहिए।

गिरनार तीर्थ की पवित्रता और सुरक्षा सर्वोपरि
बैठक में ऐतिहासिक जैन सिद्ध क्षेत्र ‘गिरनार’ का विषय भी प्रमुखता से उठाया गया। मयंक जैन और एडवोकेट पारस जैन ने गिरनार में बढ़ते अतिक्रमण और अव्यवस्थाओं के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए वहां तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और तीर्थ की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए मंत्रालय से ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने की मांग की। वरीष्ठ समाज सेवी डॉ जैनेन्द्र जैन ने कहा कि अत्याचारों के खिलाफ ‘विशेष कानून’ की अनिवार्यता देशभर में जैन साधु-संतों, धार्मिक स्थलों और समाज के प्रति बढ़ती हिंसा व अत्याचारों की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रतिनिधियों ने सरकार से एक ‘विशेष सुरक्षा कानून’ बनाने की मांग की। जैन राजनीतिक चेतना मंच के अध्यक्ष सुभाष काला ने कहा कि जैन समाज का मानना है कि आस्था के केंद्रों और धार्मिक प्रतीकों पर हो रहे हमलों को रोकने व दोषियों को कठोर दंड देने के लिए एक सशक्त कानूनी सुरक्षा कवच का होना अत्यंत आवश्यक है।

अधिकारों और प्रतिनिधित्व पर नीतिगत चर्चा, बैठक में अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया गया
शिक्षा का संवर्धन: जैन शैक्षणिक संस्थानों को सरकारी अनुदान और मान्यता प्राप्त करने में आ रही बाधाओं को दूर करना। अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र: प्रमाण पत्र प्राप्त करने की जटिल प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन और पारदर्शी बनाना। नीतिगत प्रतिनिधित्व: अल्पसंख्यक आयोगों में जैन समाज के योग्य विद्वानों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करना। कल्याणकारी योजनाएं: अल्पसंख्यक समुदाय हेतु संचालित छात्रवृत्ति और ऋण योजनाओं का लाभ समाज के जरूरतमंद छात्रों और उद्यमियों तक सुनिश्चित करना। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा जैन बोर्ड का गठन करना। सचिव श्री श्रीवत्स कृष्णा ने समाज की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना और उन पर सकारात्मक चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने अपेक्षा जताई है कि मंत्रालय इन संवेदनशील मुद्दों पर त्वरित संज्ञान लेगा और ठोस कानूनी व प्रशासनिक पहल सुनिश्चित करेगा। समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार के साथ मिलकर इन सुधारों को धरातल पर लाने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।

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