
रतलाम। “जब हमारी आंखें इस दुनिया को देखना बंद कर देती हैं, तब भी वे किसी और की दुनिया रोशन कर सकती हैं।” इसी भावनात्मक संदेश को साकार करते हुए शांति निकेतन कॉलोनी निवासी वीरेन्द्र मेहता के निधन उपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान का संकल्प लेकर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने समाज को एक गहरी प्रेरणा दी है।
शोक की इस घड़ी में भी परिवार ने संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए यह निर्णय लिया कि स्व. वीरेन्द्र मेहता की आंखें दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में उजाला भरेंगी। यह निर्णय केवल नेत्रदान नहीं, बल्कि किसी के अंधकारमय जीवन में आशा का दीप प्रज्ज्वलित करने जैसा है।
नेत्रम संस्था के ओमप्रकाश मेहता एवं विशाल गादिया ने परिवारजनों को नेत्रदान के महत्व से अवगत कराया। उनकी प्रेरणा से पुत्री डिम्पल, योगिता, पुत्र जिनेन्द्र मेहता सहित समस्त परिजनों ने सहर्ष नेत्रदान की अनुमति प्रदान की।
संस्था के हेमन्त मूणत ने बताया कि सूचना प्राप्त होते ही गीता भवन न्यास, बड़नगर के डॉ. जी.एल. ददरवाल ने परमानंद राठौड़ के सहयोग से नेत्र संरक्षण की प्रक्रिया पूर्ण की। इस दौरान हेमन्त मूणत, ओमप्रकाश अग्रवाल, गोपाल राठौड़ पतरा वाला, गिरधारीलाल वर्धानी, विशाल गादिया, अभय पिरोदिया, नीलेश गोधा, हर्ष मेहता सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर नेत्रम संस्था एवं गीता भवन न्यास, बड़नगर द्वारा परोपकारी परिवार को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
नेत्रदान—महादान
एक व्यक्ति का नेत्रदान दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि दे सकता है। मृत्यु जीवन का अंत अवश्य है, लेकिन नेत्रदान के माध्यम से यह किसी और के लिए नई शुरुआत बन सकता है।
समाज के प्रत्येक नागरिक से अपील है कि वे नेत्रदान के प्रति जागरूक हों और अपने परिवार में इस विषय पर सकारात्मक चर्चा करें। क्योंकि आपकी एक सहमति किसी की पूरी दुनिया रोशन कर सकती है।